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ترجمة معاني سورة: ابراهيم
آية:
 

سورة ابراهيم - सूरा इब्राहीम

الٓرۚ كِتَٰبٌ أَنزَلۡنَٰهُ إِلَيۡكَ لِتُخۡرِجَ ٱلنَّاسَ مِنَ ٱلظُّلُمَٰتِ إِلَى ٱلنُّورِ بِإِذۡنِ رَبِّهِمۡ إِلَىٰ صِرَٰطِ ٱلۡعَزِيزِ ٱلۡحَمِيدِ
अलिफ़, लाम, रा। ये (क़ुर्आन) एक पुस्तक है, जिसे हमने आपकी ओर अवतरित किया है, ताकि आप लोगों को अंधेरों से निकालकर प्रकाश की ओर लायें, उनके पालनहार की अनुमति से, उसकी राह की ओर, जो बड़ा प्रबल सराहा हुआ है।
التفاسير العربية:
ٱللَّهِ ٱلَّذِي لَهُۥ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۗ وَوَيۡلٞ لِّلۡكَٰفِرِينَ مِنۡ عَذَابٖ شَدِيدٍ
अल्लाह की ओर। जिसके अधिकार में आकाश और धरती का सब कुछ है तथा काफ़िरों के लिए कड़ी यातना के कारण विनाश है।
التفاسير العربية:
ٱلَّذِينَ يَسۡتَحِبُّونَ ٱلۡحَيَوٰةَ ٱلدُّنۡيَا عَلَى ٱلۡأٓخِرَةِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَيَبۡغُونَهَا عِوَجًاۚ أُوْلَـٰٓئِكَ فِي ضَلَٰلِۭ بَعِيدٖ
जो सांसारिक जीवन को परलोक पर प्रधानता देते हैं, अल्लाह की डगर ( इस्लाम) से रोकते हैं और उसे कुटिल बनाना चाहते हैं, वही कुपथ में दूर निकल गये हैं।
التفاسير العربية:
وَمَآ أَرۡسَلۡنَا مِن رَّسُولٍ إِلَّا بِلِسَانِ قَوۡمِهِۦ لِيُبَيِّنَ لَهُمۡۖ فَيُضِلُّ ٱللَّهُ مَن يَشَآءُ وَيَهۡدِي مَن يَشَآءُۚ وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ
और हमने किसी (भी) रसूल को उसकी जाति की भाषा ही में भेजा, ताकि वह उनके लिए बात उजागर कर दे। फिर अल्लाह जिसे चाहता है, कुपथ करता है और जिसे चाहता है, सुपथ दर्शा देता है और वही प्रभुत्वशाली और ह़िक्मत वाला है।
التفاسير العربية:
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا مُوسَىٰ بِـَٔايَٰتِنَآ أَنۡ أَخۡرِجۡ قَوۡمَكَ مِنَ ٱلظُّلُمَٰتِ إِلَى ٱلنُّورِ وَذَكِّرۡهُم بِأَيَّىٰمِ ٱللَّهِۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّكُلِّ صَبَّارٖ شَكُورٖ
और हमने मूसा को अपनी आयतों (चमत्कारों) के साथ भेजा, ताकि अपनी जाति को अन्धेरों से निकालकर प्रकाश की ओर लायें और उन्हें अल्लाह के दिनों (पुरस्कार और यातना) का स्मरण करायें। वास्तव में, इसमें कई निशानियाँ हैं, प्रत्येक अति सहनशील, कृतज्ञ के लिए।
التفاسير العربية:

وَإِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِ ٱذۡكُرُواْ نِعۡمَةَ ٱللَّهِ عَلَيۡكُمۡ إِذۡ أَنجَىٰكُم مِّنۡ ءَالِ فِرۡعَوۡنَ يَسُومُونَكُمۡ سُوٓءَ ٱلۡعَذَابِ وَيُذَبِّحُونَ أَبۡنَآءَكُمۡ وَيَسۡتَحۡيُونَ نِسَآءَكُمۡۚ وَفِي ذَٰلِكُم بَلَآءٞ مِّن رَّبِّكُمۡ عَظِيمٞ
तथा (याद करो) जब मूसा ने अपनी जाति से कहाः अपने ऊपर अल्लाह के पुरस्कार को याद करो, जब उसने तुम्हें फ़िरऔनियों से मुक्त किया, जो तुम्हें घोर यातना दे रहे थे, तुम्हारे पुत्रों को वध कर रहे थे और तुम्हारी स्त्रियों को जीवित रहने देते[1] थे और इसमें तुम्हारे परलनहार की ओर से एक महान परीक्षा थी।
1. ताकि उन के पुरुषों की अधिक संख्या से अपने राज्य के लिये भय न हो। और उन की स्त्रियों का अपमान करें।
التفاسير العربية:
وَإِذۡ تَأَذَّنَ رَبُّكُمۡ لَئِن شَكَرۡتُمۡ لَأَزِيدَنَّكُمۡۖ وَلَئِن كَفَرۡتُمۡ إِنَّ عَذَابِي لَشَدِيدٞ
तथा (याद करो) जब तुम्हारे पालनहार ने घोषणा कर दी कि यदि तुम कृतज्ञ बनोगे, तो तुम्हें और अधिक दूँगा तथा यदि अकृतज्ञ रहोगे, तो वास्तव में मेरी यातना बहुत कड़ी है।
التفاسير العربية:
وَقَالَ مُوسَىٰٓ إِن تَكۡفُرُوٓاْ أَنتُمۡ وَمَن فِي ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعٗا فَإِنَّ ٱللَّهَ لَغَنِيٌّ حَمِيدٌ
और मूसा ने कहाः यदि तुम और सभी लोग जो धरती में हैं, कुफ़्र करें, तो भी अल्लाह निरीह तथा[1] सराहा हुआ है।
1. ह़दीस में आया है कि अल्लाह तआला फ़रमाता है। हे मेरे बंदो! यदि तुम्हारे अगले पिछले तथा सब मनुष्य और जिन्न संसार के सब से बुरे मनुष्य के बराबर हो जायें तो भी मेरे राज्य में कोई कमी नहीं आयेगी। (सह़ीह़ मुस्लिमः2577)
التفاسير العربية:
أَلَمۡ يَأۡتِكُمۡ نَبَؤُاْ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِكُمۡ قَوۡمِ نُوحٖ وَعَادٖ وَثَمُودَ وَٱلَّذِينَ مِنۢ بَعۡدِهِمۡ لَا يَعۡلَمُهُمۡ إِلَّا ٱللَّهُۚ جَآءَتۡهُمۡ رُسُلُهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَرَدُّوٓاْ أَيۡدِيَهُمۡ فِيٓ أَفۡوَٰهِهِمۡ وَقَالُوٓاْ إِنَّا كَفَرۡنَا بِمَآ أُرۡسِلۡتُم بِهِۦ وَإِنَّا لَفِي شَكّٖ مِّمَّا تَدۡعُونَنَآ إِلَيۡهِ مُرِيبٖ
क्या तुम्हारे पास उनका समाचार नहीं आया, जो तुमसे पहले थे; नूह़, आद और समूद की जाति का और जो उनके पश्चात् हुए, जिन्हें अल्लाह ही जानता है? उनके पास उनके रसूल प्रत्यक्ष प्रमाण लाये, तो उन्होंने अपने हाथ अपने मुखों में दे[1] लिए और कह दिया कि हम उस संदेश को नहीं मानते, जिसके साथ तुम भेजे गये हो और वास्तव में, उसके बारे में संदेह में हैं, जिसकी ओर हमें बुला रहे हो, (तथा) द्विधा में हैं।
1. यह ऐसी ही भाषा शैली है, जिसे हम अपनी भाषा में बालते हैं कि कानों पर हाथ रख लिया, और दाँतो से उँगली दबा ली।
التفاسير العربية:
۞قَالَتۡ رُسُلُهُمۡ أَفِي ٱللَّهِ شَكّٞ فَاطِرِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ يَدۡعُوكُمۡ لِيَغۡفِرَ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمۡ وَيُؤَخِّرَكُمۡ إِلَىٰٓ أَجَلٖ مُّسَمّٗىۚ قَالُوٓاْ إِنۡ أَنتُمۡ إِلَّا بَشَرٞ مِّثۡلُنَا تُرِيدُونَ أَن تَصُدُّونَا عَمَّا كَانَ يَعۡبُدُ ءَابَآؤُنَا فَأۡتُونَا بِسُلۡطَٰنٖ مُّبِينٖ
उनके रसूलों ने कहाः क्या उस अल्लाह के बारे में संदेह है, जो आकाशों तथा धरती का रचयिता है। वह तुम्हें बुला[1] रहा है, ताकि तुम्हारे पाप क्षमा कर दे और तुम्हें एक निर्धारित[2] अवधि तक अवसर दे। उन्होंने कहाः तो तुम हमारे ही जैसे एक मानव पुरुष हो, तुम चाहते हो कि हमें उससे रोक दो, जिसकी पूजा हमारे बाप-दादा कर रहे थे। तुम हमारे पास कोई प्रत्यक्ष प्रमान लाओ।
1. अपनी आज्ञा पालन की ओर। 2. अर्थात मरण तथा संसारिक यातना से सुरक्षित रखे। (क़ुर्तुबी)
التفاسير العربية:

قَالَتۡ لَهُمۡ رُسُلُهُمۡ إِن نَّحۡنُ إِلَّا بَشَرٞ مِّثۡلُكُمۡ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ يَمُنُّ عَلَىٰ مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦۖ وَمَا كَانَ لَنَآ أَن نَّأۡتِيَكُم بِسُلۡطَٰنٍ إِلَّا بِإِذۡنِ ٱللَّهِۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ
उनसे उनके रसूलों ने कहाः हम तुम्हारे जैसे मानव पुरुष ही हैं, परन्तु अल्लाह अपने भक्तों में से जिसपर चाहे, उपकार करता है और हमारे बस में नहीं कि अल्लाह की अनुमति के बिना कोई प्रमाण ले आयें और अल्लाह हीपर ईमान वालों को भरोसा करना चाहिए।
التفاسير العربية:
وَمَا لَنَآ أَلَّا نَتَوَكَّلَ عَلَى ٱللَّهِ وَقَدۡ هَدَىٰنَا سُبُلَنَاۚ وَلَنَصۡبِرَنَّ عَلَىٰ مَآ ءَاذَيۡتُمُونَاۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ ٱلۡمُتَوَكِّلُونَ
और क्या कारण है कि हम अल्लाह पर भरोसा न करें, जबकि उसने हमें हमारी राहें दर्शा दी हैं? और हम अवश्य उस दुःख को सहन करेंगे, जो तुम हमें दोगे और अल्लाह हीपर भरोसा करने वालों को निर्भर रहना चाहिए।
التفاسير العربية:
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لِرُسُلِهِمۡ لَنُخۡرِجَنَّكُم مِّنۡ أَرۡضِنَآ أَوۡ لَتَعُودُنَّ فِي مِلَّتِنَاۖ فَأَوۡحَىٰٓ إِلَيۡهِمۡ رَبُّهُمۡ لَنُهۡلِكَنَّ ٱلظَّـٰلِمِينَ
और काफ़िरों ने अपने रसूलों से कहाः हम अवश्य तुम्हें अपने देश से निकाल देंगे अथवा तुम्हें हमारे पंथ में आना होगा। तो उनके पालनहार ने उनकी ओर वह़्यी की कि हम अवश्य अत्याचारियों को विनाश कर देंगे।
التفاسير العربية:
وَلَنُسۡكِنَنَّكُمُ ٱلۡأَرۡضَ مِنۢ بَعۡدِهِمۡۚ ذَٰلِكَ لِمَنۡ خَافَ مَقَامِي وَخَافَ وَعِيدِ
और तुम्हें उनके पश्चात् धरती में बसा देंगे, ये उसके लिए है, जो मेरे महिमा से खड़े[1] होने से डरा तथा मेरी चेतावनी से डरा।
1. अर्थात संसार में मेरी महिमा का विचार कर के सदाचार किया।
التفاسير العربية:
وَٱسۡتَفۡتَحُواْ وَخَابَ كُلُّ جَبَّارٍ عَنِيدٖ
और उन (रसूलों) ने विजय की प्रार्थना की, तो सभी उद्दंड विरोधी असफल हो गये।
التفاسير العربية:
مِّن وَرَآئِهِۦ جَهَنَّمُ وَيُسۡقَىٰ مِن مَّآءٖ صَدِيدٖ
उसके आगे नरक है और उसे पीप का पानी पिलाया जायेगा।
التفاسير العربية:
يَتَجَرَّعُهُۥ وَلَا يَكَادُ يُسِيغُهُۥ وَيَأۡتِيهِ ٱلۡمَوۡتُ مِن كُلِّ مَكَانٖ وَمَا هُوَ بِمَيِّتٖۖ وَمِن وَرَآئِهِۦ عَذَابٌ غَلِيظٞ
वह उसे थोड़ा-थोड़ा गले से उतारेगा, मगर उतार नहीं पायेगा और उसके पास प्रत्येक स्थान से मौत आयेगी जबकि वह मरेगा नहीं और उसके आगे भीषण यातना होगी।
التفاسير العربية:
مَّثَلُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِرَبِّهِمۡۖ أَعۡمَٰلُهُمۡ كَرَمَادٍ ٱشۡتَدَّتۡ بِهِ ٱلرِّيحُ فِي يَوۡمٍ عَاصِفٖۖ لَّا يَقۡدِرُونَ مِمَّا كَسَبُواْ عَلَىٰ شَيۡءٖۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلضَّلَٰلُ ٱلۡبَعِيدُ
जिन लोगों ने अपने पालनहार के साथ कुफ़्र किया, उनके कर्म उस राख के समान हैं, जिसे आँधी के दिन की प्रचण्ड वायु ने उड़ा दिया हो। ये लोग अपने किये में से कुछ नहीं पा सकेंगे, यही (सत्य से) दूर का कुपथ है।
التفاسير العربية:

أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ بِٱلۡحَقِّۚ إِن يَشَأۡ يُذۡهِبۡكُمۡ وَيَأۡتِ بِخَلۡقٖ جَدِيدٖ
क्या तूने नहीं देखा कि अल्लाह ही ने आकाशों तथा धरती की रचना सत्य के साथ की है, यदि वह चाहे, तो तुम्हें ले जाये और नई उत्पत्ति ले आये?
التفاسير العربية:
وَمَا ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ بِعَزِيزٖ
और वह अल्लाह पर कठिन नहीं है।
التفاسير العربية:
وَبَرَزُواْ لِلَّهِ جَمِيعٗا فَقَالَ ٱلضُّعَفَـٰٓؤُاْ لِلَّذِينَ ٱسۡتَكۡبَرُوٓاْ إِنَّا كُنَّا لَكُمۡ تَبَعٗا فَهَلۡ أَنتُم مُّغۡنُونَ عَنَّا مِنۡ عَذَابِ ٱللَّهِ مِن شَيۡءٖۚ قَالُواْ لَوۡ هَدَىٰنَا ٱللَّهُ لَهَدَيۡنَٰكُمۡۖ سَوَآءٌ عَلَيۡنَآ أَجَزِعۡنَآ أَمۡ صَبَرۡنَا مَا لَنَا مِن مَّحِيصٖ
और सब अल्लाह के सामने खुलकर[1] आ जायेंगे, तो निर्बल लोग उनसे कहेंगे, जो बड़े बन रहे थे कि हम तुम्हारे अनुयायी थे, तो क्या तुम अल्लाह की यातना से बचाने के लिए हमारे कुछ काम आ सकोगे? वे कहेंगेः यदि अल्लाह ने हमें मार्गदर्शन दिया होता, तो हम अवश्य तुम्हें मार्गदर्शन दिखा देते। अब तो समान है, चाहे हम अधीर हों या धैर्य से काम लें, हमारे बचने का कोई उपाय नहीं है।
1. अर्थात प्रलय के दिन अपनी समाधियों से निकल कर।
التفاسير العربية:
وَقَالَ ٱلشَّيۡطَٰنُ لَمَّا قُضِيَ ٱلۡأَمۡرُ إِنَّ ٱللَّهَ وَعَدَكُمۡ وَعۡدَ ٱلۡحَقِّ وَوَعَدتُّكُمۡ فَأَخۡلَفۡتُكُمۡۖ وَمَا كَانَ لِيَ عَلَيۡكُم مِّن سُلۡطَٰنٍ إِلَّآ أَن دَعَوۡتُكُمۡ فَٱسۡتَجَبۡتُمۡ لِيۖ فَلَا تَلُومُونِي وَلُومُوٓاْ أَنفُسَكُمۖ مَّآ أَنَا۠ بِمُصۡرِخِكُمۡ وَمَآ أَنتُم بِمُصۡرِخِيَّ إِنِّي كَفَرۡتُ بِمَآ أَشۡرَكۡتُمُونِ مِن قَبۡلُۗ إِنَّ ٱلظَّـٰلِمِينَ لَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ
और शैतान कहेगा, जब निर्णय कर दिया[1] जायेगाः वास्तव में, अल्लाह ने तुम्हें सत्य वचन दिया था और मैंने तुम्हें वचन दिया, तो अपना वचन भंग कर दिया और मेरा तुमपर कोई दबाव नहीं था, परन्तु ये कि मैंने तुम्हें (अपनी ओर) बुलाया और तुमने मेरी बात स्वीकार कर ली। अतः मेरी निन्दा न करो, स्वयं अपनी निंदा करो, न मैं तुम्हारी सहायता कर सकता हूँ और न तुम मेरी सहायता कर सकते हो। वास्तव में, मैंने उसे स्वीकार कर लिया, जो इससे पहले[2] तुमने मुझे अल्लाह का साझी बनाया था। निःसंदेह अत्याचारियों के लिए दुःखदायी यातना है।
1. स्वर्ग और नरक के योग्य का निर्णय कर दिया जायेगा। 2. संसार में।
التفاسير العربية:
وَأُدۡخِلَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ جَنَّـٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا بِإِذۡنِ رَبِّهِمۡۖ تَحِيَّتُهُمۡ فِيهَا سَلَٰمٌ
और जो ईमान लाये और सदाचार करते रहे, उन्हें ऐसे स्वर्गों में प्रवेश दिया जायेगा, जिनमें नहरें बहती होंगी। वे अपने पालनहार की अनुमति से उसमें सदा रहने वाले होंगे और उसमें उनका स्वागत ये होगाः तुमपर शान्ति हो।
التفاسير العربية:
أَلَمۡ تَرَ كَيۡفَ ضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلٗا كَلِمَةٗ طَيِّبَةٗ كَشَجَرَةٖ طَيِّبَةٍ أَصۡلُهَا ثَابِتٞ وَفَرۡعُهَا فِي ٱلسَّمَآءِ
(हे नबी!) क्या आप नहीं जानते कि अल्लाह ने कलिमा तय्येबा[1]( पवित्र शब्द) का उदाहरण एक पवित्र वृक्ष से दिया है, जिसकी जड़ (भूमि में) सुदृढ़ स्थित है और उसकी शाखा आकाश में है?
1. (कलिमा तय्यिबा) से अभिप्राय "ला इलाहा इल्लल्लाह" है। जो इस्लाम का धर्म सूत्र है। इस का अर्थ यह है कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं है। और यही एकेश्वरवाद का मूलाधार है। अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहू अन्हुमा कहते हैं कि हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि व सल्लम के पास थे कि आप ने कहाः मुझे ऐसा वृक्ष बताओ जो मुसलमान के समान होता है। जिस का पत्ता नहीं गिरता, तथा प्रत्येक समय अपना फल दिया करता है? इब्ने उमर ने कहाः मेरे मन में यह बात आयी कि वह खजूर का वृक्ष है। और अबू बक्र तथा उमर को देखा कि बोल नहीं रहे हैं, इस लिये मैं ने भी बोलना अच्छा नहीं समझा। जब वे कुछ नहीं बोले तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहाः वह खजूर का वृक्ष है। (संक्षिप्त अनुवाद के साथ, सह़ीह़ बुख़ारीः4698, सह़ीह़ मुस्लिमः2811)
التفاسير العربية:

تُؤۡتِيٓ أُكُلَهَا كُلَّ حِينِۭ بِإِذۡنِ رَبِّهَاۗ وَيَضۡرِبُ ٱللَّهُ ٱلۡأَمۡثَالَ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمۡ يَتَذَكَّرُونَ
वह अपने पालनहार की अनुमति से प्रत्येक समय फल दे रहा है और अल्लाह लोगों को उदाहरण दे रहा है, ताकि वे शिक्षा ग्रहण करें।
التفاسير العربية:
وَمَثَلُ كَلِمَةٍ خَبِيثَةٖ كَشَجَرَةٍ خَبِيثَةٍ ٱجۡتُثَّتۡ مِن فَوۡقِ ٱلۡأَرۡضِ مَا لَهَا مِن قَرَارٖ
और बुरी[1] बात का उदाहरण एक बुरे वृक्ष जैसा है, जिसे धरती के ऊपर से उखाड़ दिया गया हो, जिसके लिए कोई स्थिरता नहीं है।
1. अर्थात शिर्क तथा मिश्रणवाद की बात।
التفاسير العربية:
يُثَبِّتُ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِٱلۡقَوۡلِ ٱلثَّابِتِ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَفِي ٱلۡأٓخِرَةِۖ وَيُضِلُّ ٱللَّهُ ٱلظَّـٰلِمِينَۚ وَيَفۡعَلُ ٱللَّهُ مَا يَشَآءُ
अल्लाह ईमान वालों को स्थिर[1] कथन के सहारे लोक तथा परलोक में स्थिरता प्रदान करता है तथा अत्याचारियों को कुपथ कर देता है और अल्लाह जो चाहता है, करता है।
1. स्थिर तथा दृढ़ कथन से अभिप्रेत "ला इलाहा इल्लल्लाह" है। (क़ुर्तुबी) बराअ बिन आज़िब रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि आप ने कहाः मुसलमान से जब क़ब्र में प्रश्न किया जाता है, तो वह "ला इलाहा इल्लल्लाह मुह़म्मदुर् रसूलुल्लाह" की गवाही देता है। अर्थात अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं और मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के रसूल हैं। इसी के बारे में यह आयत है। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4699)
التفاسير العربية:
۞أَلَمۡ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ بَدَّلُواْ نِعۡمَتَ ٱللَّهِ كُفۡرٗا وَأَحَلُّواْ قَوۡمَهُمۡ دَارَ ٱلۡبَوَارِ
क्या आपने उन्हें[1] नहीं देखा, जिन्होंने अल्लाह के अनुग्रह को कुफ़्र से बदल दिया और अपनी जाति को विनाश के घर में उतार दिया।
1. अर्थात मक्का के मुश्रिक जिन्हों ने आप का विरोध किया। (देखियेः सह़ीह़ बुख़ारीः4700)
التفاسير العربية:
جَهَنَّمَ يَصۡلَوۡنَهَاۖ وَبِئۡسَ ٱلۡقَرَارُ
(अर्थात) नरक में, जिसमें वे झोंके जायेंगे और वह रहने का बुरा स्थान है।
التفاسير العربية:
وَجَعَلُواْ لِلَّهِ أَندَادٗا لِّيُضِلُّواْ عَن سَبِيلِهِۦۗ قُلۡ تَمَتَّعُواْ فَإِنَّ مَصِيرَكُمۡ إِلَى ٱلنَّارِ
और उन्होंने अल्लाह के साझी बना लिए, ताकि उसकी राह (सत्धर्म) से कुपथ कर दें। आप कह दें कि तनिक आनन्द ले लो, फिर तुम्हें नरक की ओर ही जाना है।
التفاسير العربية:
قُل لِّعِبَادِيَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ يُقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُنفِقُواْ مِمَّا رَزَقۡنَٰهُمۡ سِرّٗا وَعَلَانِيَةٗ مِّن قَبۡلِ أَن يَأۡتِيَ يَوۡمٞ لَّا بَيۡعٞ فِيهِ وَلَا خِلَٰلٌ
(हे नबी!) मेरे उन भक्तों से कह दो, जो ईमान लाये हैं कि नमाज़ की स्थापना करें और उसमें से, जो हमने प्रदान किया है, छुपे और खुले तरीक़े से दान करें, उस दिन के आने से पहले, जिसमें न कोई क्रय-विक्रय होगा और न कोई मैत्री।
التفاسير العربية:
ٱللَّهُ ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَأَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَخۡرَجَ بِهِۦ مِنَ ٱلثَّمَرَٰتِ رِزۡقٗا لَّكُمۡۖ وَسَخَّرَ لَكُمُ ٱلۡفُلۡكَ لِتَجۡرِيَ فِي ٱلۡبَحۡرِ بِأَمۡرِهِۦۖ وَسَخَّرَ لَكُمُ ٱلۡأَنۡهَٰرَ
और अल्लाह वही है, जिसने तुम्हारे लिए आकाशों तथा धरती की उत्पत्ति की और आकाश से जल बरसाया, फिर उससे तुम्हारी जीविका के लिए अनेक प्रकार के फल निकाले और नौका को तुम्हारे वश में किया, ताकि सागर में उसके आदेश से चले और नदियों को तुम्हारे लिए वशवर्ती किया।
التفاسير العربية:
وَسَخَّرَ لَكُمُ ٱلشَّمۡسَ وَٱلۡقَمَرَ دَآئِبَيۡنِۖ وَسَخَّرَ لَكُمُ ٱلَّيۡلَ وَٱلنَّهَارَ
तथा तुम्हारे लिए सूर्य और चाँद को काम में लगाया, जो दोनों निरन्तर चल रहे हैं और तुम्हार लिए रात्री और दिवस को वश में[1] कर दिया।
1. वश में करने का अर्थ यह है कि अल्लाह ने इन के ऐसे नियम बना दिये हैं, जिन के कारण यह मानव के लिये लाभदायक हो सकें।
التفاسير العربية:

وَءَاتَىٰكُم مِّن كُلِّ مَا سَأَلۡتُمُوهُۚ وَإِن تَعُدُّواْ نِعۡمَتَ ٱللَّهِ لَا تُحۡصُوهَآۗ إِنَّ ٱلۡإِنسَٰنَ لَظَلُومٞ كَفَّارٞ
और तुम्हें उससब में से कुछ दिया, जो तुमने माँगा[1] और यदि तुम अल्लाह के पुरस्कारों की गणना करना चाहो, तो भी नहीं कर सकते। वास्तव में, मनुष्य बड़ा अत्याचारी कृतघ्न (ना शुकरा) है।
1. अर्थात तुम्हारी प्रत्येक प्राकृतिक माँग पूरी की, और तुम्हारे जीवन की आवश्यक्ता के सभी संसाधनों की व्यवस्था कर दी।
التفاسير العربية:
وَإِذۡ قَالَ إِبۡرَٰهِيمُ رَبِّ ٱجۡعَلۡ هَٰذَا ٱلۡبَلَدَ ءَامِنٗا وَٱجۡنُبۡنِي وَبَنِيَّ أَن نَّعۡبُدَ ٱلۡأَصۡنَامَ
तथा (याद करो) जब इब्राहीम ने प्रार्थना कीः हे मेरे पालनहार! इस नगर (मक्का) को शान्ति का नगार बना दे और मुझे तथा मेरे पुत्रों को मूर्ति-पूजा से बचा ले।
التفاسير العربية:
رَبِّ إِنَّهُنَّ أَضۡلَلۡنَ كَثِيرٗا مِّنَ ٱلنَّاسِۖ فَمَن تَبِعَنِي فَإِنَّهُۥ مِنِّيۖ وَمَنۡ عَصَانِي فَإِنَّكَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ
मेरे पालनहार! इन मूर्तियों ने बहुत-से लोगों को कुपथ किया है, अतः जो मेरा अनुयायी हो, वही मेरा है और जो मेरी अवज्ञा करे, तो वास्तव में, तू अति क्षमाशील, दयावान् है।
التفاسير العربية:
رَّبَّنَآ إِنِّيٓ أَسۡكَنتُ مِن ذُرِّيَّتِي بِوَادٍ غَيۡرِ ذِي زَرۡعٍ عِندَ بَيۡتِكَ ٱلۡمُحَرَّمِ رَبَّنَا لِيُقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ فَٱجۡعَلۡ أَفۡـِٔدَةٗ مِّنَ ٱلنَّاسِ تَهۡوِيٓ إِلَيۡهِمۡ وَٱرۡزُقۡهُم مِّنَ ٱلثَّمَرَٰتِ لَعَلَّهُمۡ يَشۡكُرُونَ
हमारे पालनहार! मैंने अपनी कुछ संतान मरुस्थल की एक वादी (उपत्यका) में तेरे सम्मानित घर (काबा) के पास बसा दी है, ताकि वे नमाज़ की स्थापना करें। अतः लोगों के दिलों को उनकी ओर आकर्षित कर दे और उन्हें जीविका प्रदान कर, ताकि वे कृतज्ञ हों।
التفاسير العربية:
رَبَّنَآ إِنَّكَ تَعۡلَمُ مَا نُخۡفِي وَمَا نُعۡلِنُۗ وَمَا يَخۡفَىٰ عَلَى ٱللَّهِ مِن شَيۡءٖ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا فِي ٱلسَّمَآءِ
हमारे पालनहार! तू जानता है, जो हम छुपाते और जो व्यक्त करते हैं और अल्लाह से कुछ छुपा नहीं रहता, धरती में और न आकाशों में।
التفاسير العربية:
ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي وَهَبَ لِي عَلَى ٱلۡكِبَرِ إِسۡمَٰعِيلَ وَإِسۡحَٰقَۚ إِنَّ رَبِّي لَسَمِيعُ ٱلدُّعَآءِ
सब प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है, जिसने मुझे बुढ़ापे में (दो पुत्र) इस्माईल और इस्ह़ाक़ प्रदान किये। वास्तव में, मेरा पालनहार प्रार्थना अवश्य सुनने वाला है।
التفاسير العربية:
رَبِّ ٱجۡعَلۡنِي مُقِيمَ ٱلصَّلَوٰةِ وَمِن ذُرِّيَّتِيۚ رَبَّنَا وَتَقَبَّلۡ دُعَآءِ
मेरे पालनहार! मुझे नमाज़ की स्थापना करने वाला बना दे तथा मेरी संतान को। हे मेरे पालनहर! और मेरी प्रार्थना स्वीकार कर।
التفاسير العربية:
رَبَّنَا ٱغۡفِرۡ لِي وَلِوَٰلِدَيَّ وَلِلۡمُؤۡمِنِينَ يَوۡمَ يَقُومُ ٱلۡحِسَابُ
हे मेरे पालनहार! मूझे क्षमा कर दे तथा मेरे माता-पिता और ईमान वालों को, जिस दिन ह़िसाब लिया जायेगा।
التفاسير العربية:
وَلَا تَحۡسَبَنَّ ٱللَّهَ غَٰفِلًا عَمَّا يَعۡمَلُ ٱلظَّـٰلِمُونَۚ إِنَّمَا يُؤَخِّرُهُمۡ لِيَوۡمٖ تَشۡخَصُ فِيهِ ٱلۡأَبۡصَٰرُ
और तुम कदापि अल्लाह को, उससे अचेत न समझो, जो अत्याचारी कर रहे हैं! वह तो उन्हें उस[1] दिन के लिए टाल रहा है, जिस जिन आँखें खुली रह जायेँगी।
1. अर्थात प्रलय के दिन के लिये।
التفاسير العربية:

مُهۡطِعِينَ مُقۡنِعِي رُءُوسِهِمۡ لَا يَرۡتَدُّ إِلَيۡهِمۡ طَرۡفُهُمۡۖ وَأَفۡـِٔدَتُهُمۡ هَوَآءٞ
वे दौड़ते हुए अपने सिर ऊपर किये हुए होंगे, उनकी आँखें उनकी ओर नहीं फिरेंगी और उनके दिल गिरे[1] हुए होंगे।
1. यहाँ अर्बी भाषा का शब्द "हवाअ" प्रयुक्त हुआ है। जिस का एक अर्थ शून्य (ख़ाली), अर्थात भय के कारण उसे अपनी सुध न होगी।
التفاسير العربية:
وَأَنذِرِ ٱلنَّاسَ يَوۡمَ يَأۡتِيهِمُ ٱلۡعَذَابُ فَيَقُولُ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ رَبَّنَآ أَخِّرۡنَآ إِلَىٰٓ أَجَلٖ قَرِيبٖ نُّجِبۡ دَعۡوَتَكَ وَنَتَّبِعِ ٱلرُّسُلَۗ أَوَلَمۡ تَكُونُوٓاْ أَقۡسَمۡتُم مِّن قَبۡلُ مَا لَكُم مِّن زَوَالٖ
(हे नबी!) आप लोगों को उस दिन से डरायें, जब उनपर यातना आ जायेगी। तो अत्याचारी कहेंगेः हमारे पालनहार! हमें कुछ समय तक अवसर दे, हम तेरी बात (आमंत्रण) स्वीकार कर लेंगे और रसूलों का अनुसरण करेंगे, क्या तुम वही नहीं हो, जो इससे पहले शपथ ले रहे थे कि हमारा पतन होना ही नहीं है?
التفاسير العربية:
وَسَكَنتُمۡ فِي مَسَٰكِنِ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ وَتَبَيَّنَ لَكُمۡ كَيۡفَ فَعَلۡنَا بِهِمۡ وَضَرَبۡنَا لَكُمُ ٱلۡأَمۡثَالَ
जबकि तुम उन्हीं की बस्तियों में बसे हो, जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किया और तुम्हारे लिए उजागर हो गया है कि हमने उनके साथ क्या किया? और हमने तुम्हें बहुत-से उदाहरण भी दिये हैं।
التفاسير العربية:
وَقَدۡ مَكَرُواْ مَكۡرَهُمۡ وَعِندَ ٱللَّهِ مَكۡرُهُمۡ وَإِن كَانَ مَكۡرُهُمۡ لِتَزُولَ مِنۡهُ ٱلۡجِبَالُ
और उन्होंने अपना षड्यंत्र रच लिया तथा उनका षड्यंत्र अल्लाह के पास[1] है और उनका षड्यंत्र ऐसा नहीं था कि उससे पर्वत टल जायें।
1. अर्थात अल्लाह उस को निष्फल करना जानता है।
التفاسير العربية:
فَلَا تَحۡسَبَنَّ ٱللَّهَ مُخۡلِفَ وَعۡدِهِۦ رُسُلَهُۥٓۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٞ ذُو ٱنتِقَامٖ
अतः कदापि ये न समझें कि अल्लाह अपने रसूलों से किया वचन भंग करने वाला है, वास्तव में, अल्लाह प्रभुत्वशाली, बदला लेने वाला है।
التفاسير العربية:
يَوۡمَ تُبَدَّلُ ٱلۡأَرۡضُ غَيۡرَ ٱلۡأَرۡضِ وَٱلسَّمَٰوَٰتُۖ وَبَرَزُواْ لِلَّهِ ٱلۡوَٰحِدِ ٱلۡقَهَّارِ
जिस दिन ये धरती दूसरी धरती से तथा आकाश बदल दिये जायेंगे और सब अल्लाह के समक्ष[1] उपस्थित होंगे, जो अकेला प्रभुत्वशाली है।
1. अर्थात अपनी क़ब्रों (समाधियों) से निकल कर।
التفاسير العربية:
وَتَرَى ٱلۡمُجۡرِمِينَ يَوۡمَئِذٖ مُّقَرَّنِينَ فِي ٱلۡأَصۡفَادِ
और आप उस दिन अपराधियों को ज़ंजीरों में जकड़े हुए देखेंगे।
التفاسير العربية:
سَرَابِيلُهُم مِّن قَطِرَانٖ وَتَغۡشَىٰ وُجُوهَهُمُ ٱلنَّارُ
उनके वस्त्र तारकोल के होंगे और उनके मुखों पर अग्नि छायी होगी।
التفاسير العربية:
لِيَجۡزِيَ ٱللَّهُ كُلَّ نَفۡسٖ مَّا كَسَبَتۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَرِيعُ ٱلۡحِسَابِ
ताकि अल्लाह प्रत्येक प्राणी को, उसके किये का बदला दे। निःसंदेह अल्लाह शीघ्र ह़ीसाब लेने वाला है।
التفاسير العربية:
هَٰذَا بَلَٰغٞ لِّلنَّاسِ وَلِيُنذَرُواْ بِهِۦ وَلِيَعۡلَمُوٓاْ أَنَّمَا هُوَ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞ وَلِيَذَّكَّرَ أُوْلُواْ ٱلۡأَلۡبَٰبِ
ये मनुष्यों के लिए एक संदेश है और ताकि इसके द्वारा उन्हें सावधान किया जाये और ताकि वे जान लें कि वही एक सत्य पूज्य है और ताकि मतिमान लोग शिक्षा ग्रहण करें।
التفاسير العربية:

 
ترجمة معاني سورة: ابراهيم
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ترجمة معاني القرآن الكريم - الترجمة الهندية - فهرس التراجم

ترجمة معاني القرآن الكريم إلى اللغة الهندية، ترجمها عزيز الحق العمري.

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