Übersetzung der Bedeutungen von dem heiligen Quran - Indische Übersetzung * - Übersetzungen

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Übersetzung der Bedeutungen Surah / Kapitel: Al-A‘râf
Vers:
 

सूरा अल्-आराफ़

الٓمٓصٓ
अलिफ़, लाम, मीम, साद।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
كِتَٰبٌ أُنزِلَ إِلَيۡكَ فَلَا يَكُن فِي صَدۡرِكَ حَرَجٞ مِّنۡهُ لِتُنذِرَ بِهِۦ وَذِكۡرَىٰ لِلۡمُؤۡمِنِينَ
ये पुस्तक है, जो आपकी ओर उतारी गयी है। अतः (हे नबी!) आपके मन में इससे कोई संकोच न हो, ताकि आप इसके द्वारा सावधान करें[1] और ईमान वालों के लिए उपदेश है।
1. अर्थात अल्लाह के इन्कार और उस के दुष्परिणाम से।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
ٱتَّبِعُواْ مَآ أُنزِلَ إِلَيۡكُم مِّن رَّبِّكُمۡ وَلَا تَتَّبِعُواْ مِن دُونِهِۦٓ أَوۡلِيَآءَۗ قَلِيلٗا مَّا تَذَكَّرُونَ
(हे लोगो!) जो तुम्हारे पालनहार की ओर से तुमपर उतारा गया है, उसपर चलो और उसके सिवा दूसरे सहायकों के पीछे न चलो। तुम बहुत थोड़ी शिक्षा लेते हो।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَكَم مِّن قَرۡيَةٍ أَهۡلَكۡنَٰهَا فَجَآءَهَا بَأۡسُنَا بَيَٰتًا أَوۡ هُمۡ قَآئِلُونَ
तथा बहुत सी बस्तियाँ हैं, जिन्हें हमने ध्वस्त कर दिया है, उनपर हमारा प्रकोप अकस्मात रात्रि में आया या जब वे दोपहर के समय आराम कर रहे थे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَمَا كَانَ دَعۡوَىٰهُمۡ إِذۡ جَآءَهُم بَأۡسُنَآ إِلَّآ أَن قَالُوٓاْ إِنَّا كُنَّا ظَٰلِمِينَ
और जब उनपर हमारा प्रकोप आ पड़ा, तो उनकी पुकार यही थी कि वास्तव में हम ही अत्याचारी[1] थे।
1. अर्थात अपनी हठधर्मी को उस समय स्वीकार किया।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَلَنَسۡـَٔلَنَّ ٱلَّذِينَ أُرۡسِلَ إِلَيۡهِمۡ وَلَنَسۡـَٔلَنَّ ٱلۡمُرۡسَلِينَ
तो हम उनसे अवश्य प्रश्न करेंगे, जिनके पास रसूलों को भेजा गया तथा रसूलों से भी अवश्य[1] प्रश्न करेंगे।
1. अर्थात प्रयल के दिन उन समुदायों से प्रश्न किया जायेगा कि तुम्हारे पास रसूल आये या नहीं? वह उत्तर देंगेः आये थे। परन्तु हम ही अत्याचारी थे। हम ने उन की एक न सुनी। फिर रसूलों से प्रश्न किया जायेगा कि उन्हों ने अल्लाह का संदेश पहुँचाया या नहीं? तो वह कहेंगेः अवश्य हम ने तेरा संदेश पहुँचा दिया।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَلَنَقُصَّنَّ عَلَيۡهِم بِعِلۡمٖۖ وَمَا كُنَّا غَآئِبِينَ
फिर हम अपने ज्ञान से उनके समक्ष वास्तविक्ता का वर्णन कर देंगे तथा हम अनुपस्थित नहीं थे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَٱلۡوَزۡنُ يَوۡمَئِذٍ ٱلۡحَقُّۚ فَمَن ثَقُلَتۡ مَوَٰزِينُهُۥ فَأُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ
तथा उस (प्रलय के) दिन (कर्मों की) तोल न्याय के साथ होगी। फिर जिसके पलड़े भारी होंगे, वही सफल होंगे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَمَنۡ خَفَّتۡ مَوَٰزِينُهُۥ فَأُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓاْ أَنفُسَهُم بِمَا كَانُواْ بِـَٔايَٰتِنَا يَظۡلِمُونَ
और जिनके पलड़े हलके होंगे, वही स्वयं को क्षति में डाल लिए होंगे। क्योंकि वे हमारी आयतों के साथ अत्याचार करते[1] रहे।
1. भावार्थ यह है कि यह अल्लाह का नियम है कि प्रत्येक व्यक्ति तथा समुदाय को उन के कर्मानुसार फल मिलेगा। और कर्मों की तौल के लिये अल्लाह ने नाप निर्धारित कर दी है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَلَقَدۡ مَكَّنَّـٰكُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَجَعَلۡنَا لَكُمۡ فِيهَا مَعَٰيِشَۗ قَلِيلٗا مَّا تَشۡكُرُونَ
तथ हमने तुम्हें धरती में अधिकार दिया और उसमें तुम्हारे लिए जीवन के संसाधन बनाये। तुम थोड़े ही कृतज्ञ होते हो।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَلَقَدۡ خَلَقۡنَٰكُمۡ ثُمَّ صَوَّرۡنَٰكُمۡ ثُمَّ قُلۡنَا لِلۡمَلَـٰٓئِكَةِ ٱسۡجُدُواْ لِأٓدَمَ فَسَجَدُوٓاْ إِلَّآ إِبۡلِيسَ لَمۡ يَكُن مِّنَ ٱلسَّـٰجِدِينَ
और हमने तुम्हें पैदा किया[1], फिर तुम्हारा रूप बनाया, फिर हमने फ़रिश्तों से कहा कि आदम को सज्दा करो, तो इब्लीस के सिवा सबने सज्दा किया। वह सज्दा करने वालों में से न हुआ।
1. अर्थात मूल पुरुष आदम को अस्तित्व दिया।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

قَالَ مَا مَنَعَكَ أَلَّا تَسۡجُدَ إِذۡ أَمَرۡتُكَۖ قَالَ أَنَا۠ خَيۡرٞ مِّنۡهُ خَلَقۡتَنِي مِن نَّارٖ وَخَلَقۡتَهُۥ مِن طِينٖ
अल्लाह ने उससे कहाः किस बात ने तुझे सज्दा करने से रोक दिया, जबकि मैंने तुझे आदेश दिया था? उसने कहाः मैं उससे उत्तम हूँ। मेरी रचना तूने अग्नि से की है और उसकी मिट्टी से।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ فَٱهۡبِطۡ مِنۡهَا فَمَا يَكُونُ لَكَ أَن تَتَكَبَّرَ فِيهَا فَٱخۡرُجۡ إِنَّكَ مِنَ ٱلصَّـٰغِرِينَ
तो अल्लाह ने कहाः इस (स्वर्ग) से उतर जा। तेरे लिए ये योग्य नहीं कि इसमें घमण्ड करे। तू निकल जा। वास्तव में, तू अपमानितों में है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ أَنظِرۡنِيٓ إِلَىٰ يَوۡمِ يُبۡعَثُونَ
उसने कहाः मुझे उस दिन तक के लिए अवसर दे दो, जब लोग फिर जीवित किये जायेंगे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ إِنَّكَ مِنَ ٱلۡمُنظَرِينَ
अल्लाह ने कहाः तुझे अवसर दिया जा रहा है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ فَبِمَآ أَغۡوَيۡتَنِي لَأَقۡعُدَنَّ لَهُمۡ صِرَٰطَكَ ٱلۡمُسۡتَقِيمَ
उसने कहाः तो जिस प्रकार तूने मुझे कुपथ किया है, मैंभी तेरी सीधी राह पर इनकी घात में लगा रहूँगा।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
ثُمَّ لَأٓتِيَنَّهُم مِّنۢ بَيۡنِ أَيۡدِيهِمۡ وَمِنۡ خَلۡفِهِمۡ وَعَنۡ أَيۡمَٰنِهِمۡ وَعَن شَمَآئِلِهِمۡۖ وَلَا تَجِدُ أَكۡثَرَهُمۡ شَٰكِرِينَ
फिर उनके पास उनके आगे और पीछे तथा दायें और बायें से आऊँगा[1] और तू उनमें से अधिक्तर को (अपना) कृतज्ञ नहीं पायेगा[2]।
1. अर्थात प्रत्येक दिशा से घेरूँगा और कुपथ करूँगा। 2. शैतान ने अपना विचार सच्च कर दिखाया और अधिक्तर लोग उस के जाल में फंस कर शिर्क जैसे महा पाप में पड़ गये। (देखियेः सूरह सबा, आयतः20)
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ ٱخۡرُجۡ مِنۡهَا مَذۡءُومٗا مَّدۡحُورٗاۖ لَّمَن تَبِعَكَ مِنۡهُمۡ لَأَمۡلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنكُمۡ أَجۡمَعِينَ
अल्लाह ने कहाः यहाँ से अपमानित धिक्कारा हुआ निकल जा। जो भी उनमें से तेरी राह चलेगा, तो मैं तुम सभी से नरक को अवश्य भर दूँगा।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَيَـٰٓـَٔادَمُ ٱسۡكُنۡ أَنتَ وَزَوۡجُكَ ٱلۡجَنَّةَ فَكُلَا مِنۡ حَيۡثُ شِئۡتُمَا وَلَا تَقۡرَبَا هَٰذِهِ ٱلشَّجَرَةَ فَتَكُونَا مِنَ ٱلظَّـٰلِمِينَ
और हे आदम! तुम और तुम्हारी पत्नी स्वर्ग में रहो और जहाँ से चाहो, खाओ और इस वृक्ष के समीप न जाना, अन्यथा अत्याचरियों में हो जाओगे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَوَسۡوَسَ لَهُمَا ٱلشَّيۡطَٰنُ لِيُبۡدِيَ لَهُمَا مَا وُۥرِيَ عَنۡهُمَا مِن سَوۡءَٰتِهِمَا وَقَالَ مَا نَهَىٰكُمَا رَبُّكُمَا عَنۡ هَٰذِهِ ٱلشَّجَرَةِ إِلَّآ أَن تَكُونَا مَلَكَيۡنِ أَوۡ تَكُونَا مِنَ ٱلۡخَٰلِدِينَ
तो शैतान ने दोनों को संशय में डाल दिया, ताकि दोनों के लिए उनके गुप्तांगों को खोल दे, जो उनसे छुपाये गये थे और कहाः तुम्हारे पालनहार ने तुम दोनों को इस वृक्ष से केवल इसलिए रोक दिया है कि तुम दोनों फ़रिश्ते अथवा सदावासी हो जाओगे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَقَاسَمَهُمَآ إِنِّي لَكُمَا لَمِنَ ٱلنَّـٰصِحِينَ
तथा दोनों के लिए शपथ दी कि वास्तव में, मैं तुम दोनों का हितैषी हूँ।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَدَلَّىٰهُمَا بِغُرُورٖۚ فَلَمَّا ذَاقَا ٱلشَّجَرَةَ بَدَتۡ لَهُمَا سَوۡءَٰتُهُمَا وَطَفِقَا يَخۡصِفَانِ عَلَيۡهِمَا مِن وَرَقِ ٱلۡجَنَّةِۖ وَنَادَىٰهُمَا رَبُّهُمَآ أَلَمۡ أَنۡهَكُمَا عَن تِلۡكُمَا ٱلشَّجَرَةِ وَأَقُل لَّكُمَآ إِنَّ ٱلشَّيۡطَٰنَ لَكُمَا عَدُوّٞ مُّبِينٞ
तो उन दोनों को धोखे से रिझा लिया। फिर जब दोनों ने उस वृक्ष का स्वाद लिया, तो उनके लिए उनके गुप्तांग खुल गये और वे उनपर स्वर्ग के पत्ते चिपकाने लगे और उन्हें उनके पालनहार ने आवाज़ दीः क्या मैंने तुम्हें इस वृक्ष से नहीं रोका था और तुम दोनों से नहीं कहा था कि शैतान तुम्हारा खुला शत्रु है?
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

قَالَا رَبَّنَا ظَلَمۡنَآ أَنفُسَنَا وَإِن لَّمۡ تَغۡفِرۡ لَنَا وَتَرۡحَمۡنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡخَٰسِرِينَ
दोनों ने कहाः हे हमारे पालनहार! हमने अपने ऊपर अत्याचार कर लिया और यदि तू हमें क्षमा तथा हमपर दया नहीं करेगा, तो हम अवश्य ही नाश हो[1] जायेंगे।
1. अर्थात आदम तथा ह़व्वा ने अपने पाप के लिये अल्लाह से क्षमा मांग ली। शैतान के समान अभिमान नहीं किया।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ ٱهۡبِطُواْ بَعۡضُكُمۡ لِبَعۡضٍ عَدُوّٞۖ وَلَكُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُسۡتَقَرّٞ وَمَتَٰعٌ إِلَىٰ حِينٖ
उसने कहाः तुम सब उतरो, तुम एक-दूसरे के शत्रु हो और तुम्हारे लिए धरती में रहना और एक निर्धारित समय तक जीवन का साधन है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ فِيهَا تَحۡيَوۡنَ وَفِيهَا تَمُوتُونَ وَمِنۡهَا تُخۡرَجُونَ
तथा कहाः तुम उसीमें जीवित रहोगे, उसीमें मरोगे और उसीसे (फिर) निकाले जाओगे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
يَٰبَنِيٓ ءَادَمَ قَدۡ أَنزَلۡنَا عَلَيۡكُمۡ لِبَاسٗا يُوَٰرِي سَوۡءَٰتِكُمۡ وَرِيشٗاۖ وَلِبَاسُ ٱلتَّقۡوَىٰ ذَٰلِكَ خَيۡرٞۚ ذَٰلِكَ مِنۡ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ لَعَلَّهُمۡ يَذَّكَّرُونَ
हे आदम के पुत्रो! हमने तुमपर ऐसा वस्त्र उतार दिया है, जो तुम्हारे गुप्तांगों को छुपाता तथा शोभा है और अल्लाह की आज्ञाकारिता का वस्त्र ही सर्वोत्तम है। ये अल्लाह की आयतों में से एक है, ताकि वे शिक्षा लें[1]।
1. तथा उस के आज्ञाकारी एवं कृतज्ञ बनें।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
يَٰبَنِيٓ ءَادَمَ لَا يَفۡتِنَنَّكُمُ ٱلشَّيۡطَٰنُ كَمَآ أَخۡرَجَ أَبَوَيۡكُم مِّنَ ٱلۡجَنَّةِ يَنزِعُ عَنۡهُمَا لِبَاسَهُمَا لِيُرِيَهُمَا سَوۡءَٰتِهِمَآۚ إِنَّهُۥ يَرَىٰكُمۡ هُوَ وَقَبِيلُهُۥ مِنۡ حَيۡثُ لَا تَرَوۡنَهُمۡۗ إِنَّا جَعَلۡنَا ٱلشَّيَٰطِينَ أَوۡلِيَآءَ لِلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ
हे आदम के पुत्रो! ऐसा न हो कि शैतान तुम्हें बहका दे, जैसे तुम्हारे माता-पिता को स्वर्ग से निकाल दिया, उनके वस्त्र उतरवा दिये, ताकि उन्हें उनके गुप्तांग दिखा दे। वास्तव में, वह तथा उसकी जाति, तुम्हें ऐसे स्थान से देखती है, जहाँ से तुम उन्हें नहीं देख सकते। वास्तव में, हमने शैतानों को उनका सहायक बना दिया है, जो ईमान नहीं रखते।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَإِذَا فَعَلُواْ فَٰحِشَةٗ قَالُواْ وَجَدۡنَا عَلَيۡهَآ ءَابَآءَنَا وَٱللَّهُ أَمَرَنَا بِهَاۗ قُلۡ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَأۡمُرُ بِٱلۡفَحۡشَآءِۖ أَتَقُولُونَ عَلَى ٱللَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ
तथा जब वे (मुश्रिक) कोई निर्लज्जा का काम करते हैं, तो कहते हैं कि इसी (रीति) पर हमने अपने पूर्वजों को पाया है तथा अल्लाह ने हमें इसका आदेश दिया है। (हे नबी!) आप उनसे कह दें कि अल्लाह कभी निर्लज्जा का आदेश नहीं देता। क्या तुम अल्लाह पर ऐसी बात का आरोप धरते हो, जिसे तुम नहीं जानते?
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قُلۡ أَمَرَ رَبِّي بِٱلۡقِسۡطِۖ وَأَقِيمُواْ وُجُوهَكُمۡ عِندَ كُلِّ مَسۡجِدٖ وَٱدۡعُوهُ مُخۡلِصِينَ لَهُ ٱلدِّينَۚ كَمَا بَدَأَكُمۡ تَعُودُونَ
आप उनसे कह दें कि मेरे पालनहार ने न्याय का आदेश दिया है। (और वो ये है कि) प्रत्येक मस्जिद में नमाज़ के समय अपना ध्यान सीधे उसी की ओर करो[1] और उसके लिए धर्म को विशुध्द करके उसी को पुकारो। जिस प्रकार, उसने तुम्हें पहले पैदा किया है, उसी प्रकार, (प्रलय में) फिर जीवित कर दिये जाओगे।
1. इस आयत में सत्य धर्म के निम्नलिखित तीन मूल नियम बताये गये हैः कर्म में संतुलन, वंदना में अल्लाह की ओर ध्यान तथा धर्म में विशुध्दता तथा एक अल्लाह की वंदना करना।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَرِيقًا هَدَىٰ وَفَرِيقًا حَقَّ عَلَيۡهِمُ ٱلضَّلَٰلَةُۚ إِنَّهُمُ ٱتَّخَذُواْ ٱلشَّيَٰطِينَ أَوۡلِيَآءَ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَيَحۡسَبُونَ أَنَّهُم مُّهۡتَدُونَ
एक समुदाय को उसने सुपथ दिखा दिया और दूसरा समुदाय कुपथ पर स्थित रह गया। वास्तव में, इन लोगों ने अल्लाह के सिवा शैतानों को सहायक बना लिया, फिर भी वे समझते हैं कि वास्तव में वही सुपथ पर हैं।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

۞يَٰبَنِيٓ ءَادَمَ خُذُواْ زِينَتَكُمۡ عِندَ كُلِّ مَسۡجِدٖ وَكُلُواْ وَٱشۡرَبُواْ وَلَا تُسۡرِفُوٓاْۚ إِنَّهُۥ لَا يُحِبُّ ٱلۡمُسۡرِفِينَ
हे आदम के पुत्रो! प्रत्येक मस्जिद के पास (नमाज़ के समय) अपनी शोभा धारण करो,[1] खाओ-पिओ और बेजा ख़र्च न करो। वस्तुतः, वह बेजा ख़र्च करने वालों से प्रेम नहीं करता।
1. कुरैश नग्न होकर काबा की परिकर्मा करते थे। इसी पर यह आयत उतरी।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قُلۡ مَنۡ حَرَّمَ زِينَةَ ٱللَّهِ ٱلَّتِيٓ أَخۡرَجَ لِعِبَادِهِۦ وَٱلطَّيِّبَٰتِ مِنَ ٱلرِّزۡقِۚ قُلۡ هِيَ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا خَالِصَةٗ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۗ كَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ ٱلۡأٓيَٰتِ لِقَوۡمٖ يَعۡلَمُونَ
(हे नबी!) इन (मिश्रणवादियों) से कहिए कि किसने अल्लाह की उस शोभा को ह़राम (वर्जित) किया है,[1] जिसे उसने अपने सेवकों के लिए निकाला है? तथा स्वच्छ जीविकाओं को? आप कह दें: ये सांसारिक जीवन में उनके लिए (उचित) है, जो ईमान लाये तथा प्रलय के दिन उन्हीं के लिए विशेष[2] है। इसी प्रकार, हम अपनी आयतों का सविस्तार वर्णन उनके लिए करते हैं, जो ज्ञान रखते हों।
1. इस आयत में सन्यास का खण्डन किया गया है कि जीवन के सुखों तथा शोभाओं से लभान्वित होना धर्म के विरुध्द नहीं है। इन सब से लाभान्वित होने ही में अल्लाह की प्रसन्नता है। नग्न रहना तथा संसारिक सुखों से वंचित हो जाना सत्धर्म नहीं है। धर्म की यह शिक्षा है कि अपनी शोभाओं से सुसज्जित हो कर अल्लाह की वंदना और उपासना करो। 2. एक बार नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) से कहाः क्या तुम प्रसन्न नहीं हो कि संसार का काफ़िरों के लिये है और परलोक हमारे लिये। (बुख़ारीः 2468, मुस्लिमः 1479)
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قُلۡ إِنَّمَا حَرَّمَ رَبِّيَ ٱلۡفَوَٰحِشَ مَا ظَهَرَ مِنۡهَا وَمَا بَطَنَ وَٱلۡإِثۡمَ وَٱلۡبَغۡيَ بِغَيۡرِ ٱلۡحَقِّ وَأَن تُشۡرِكُواْ بِٱللَّهِ مَا لَمۡ يُنَزِّلۡ بِهِۦ سُلۡطَٰنٗا وَأَن تَقُولُواْ عَلَى ٱللَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ
(हे नबी!) आप कह दें कि मेरे पालनहार ने तो केवल खुले तथा छुपे कुकर्मों, पाप तथा अवैध विद्रोह को ही ह़राम (वर्जित) किया है तथा इस बात को कि तुम उसे अल्लाह का साझी बनाओ, जिसका कोई तर्क उसने नहीं उतारा है तथा अल्लाह पर ऐसी बात बोलो, जिसे तुम नहीं जानते।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَلِكُلِّ أُمَّةٍ أَجَلٞۖ فَإِذَا جَآءَ أَجَلُهُمۡ لَا يَسۡتَأۡخِرُونَ سَاعَةٗ وَلَا يَسۡتَقۡدِمُونَ
प्रत्येक समुदाय का[1] एक निर्धारित समय है, फिर जब वह समय आ जायेगा, तो क्षण भर देर या सवेर नहीं होगी।
1. अर्थात काफ़िर समुदाय की यातना के लिये।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
يَٰبَنِيٓ ءَادَمَ إِمَّا يَأۡتِيَنَّكُمۡ رُسُلٞ مِّنكُمۡ يَقُصُّونَ عَلَيۡكُمۡ ءَايَٰتِي فَمَنِ ٱتَّقَىٰ وَأَصۡلَحَ فَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمۡ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ
हे आदम के पुत्रो! जब तुम्हारे पास तुम्हीं में से रसूल आ जायें जो तुम्हें मेरी आयतें सुना रहे हों, तो जो डरेगा और अपना सुधार कर लेगा, उसके लिए कोई डर नहीं होगा और न वे[1] उदासीन होंगे।
1. इस आयत में मानव जाति के मार्गदर्शन के लिये समय समय पर रसूलों के आने के बारे में सूचित किया गया है और बताय जा रहा है कि अब इसी नियमानुसार अंतिम रसूल मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आ गये हैं। अतः उन की बात मान लो, अन्यथा इस का परिणाम स्वयं तुम्हारे सामने आ जायेगा।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَٱسۡتَكۡبَرُواْ عَنۡهَآ أُوْلَـٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ
और जो हमारी आयतें झुठलायेंगे और उनसे घमण्ड करेंगे वही नारकी होंगे और वही उसमें सदावासी होंगे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّنِ ٱفۡتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا أَوۡ كَذَّبَ بِـَٔايَٰتِهِۦٓۚ أُوْلَـٰٓئِكَ يَنَالُهُمۡ نَصِيبُهُم مِّنَ ٱلۡكِتَٰبِۖ حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءَتۡهُمۡ رُسُلُنَا يَتَوَفَّوۡنَهُمۡ قَالُوٓاْ أَيۡنَ مَا كُنتُمۡ تَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِۖ قَالُواْ ضَلُّواْ عَنَّا وَشَهِدُواْ عَلَىٰٓ أَنفُسِهِمۡ أَنَّهُمۡ كَانُواْ كَٰفِرِينَ
फिर उससे बड़ा अत्याचारी कौन है, जो अल्लाह पर मिथ्या बातें बनाये अथवा उसकी आयतों को मिथ्या कहे? उन्हें उनके भाग्य में लिखा भाग मिल जायेगा। यहाँ तक कि जिस समय हमारे फ़रिश्ते उनका प्राण निकालने के लिए आयेंगे, तो उनसे कहेंगे कि वे कहाँ हैं, जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते थे? वे कहेंगे कि वे तो हमसे खो गये तथा अपने ही विरूध्द साक्षी (गवाह) बन जायेंगे कि वस्तुतः वे काफ़िर थे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

قَالَ ٱدۡخُلُواْ فِيٓ أُمَمٖ قَدۡ خَلَتۡ مِن قَبۡلِكُم مِّنَ ٱلۡجِنِّ وَٱلۡإِنسِ فِي ٱلنَّارِۖ كُلَّمَا دَخَلَتۡ أُمَّةٞ لَّعَنَتۡ أُخۡتَهَاۖ حَتَّىٰٓ إِذَا ٱدَّارَكُواْ فِيهَا جَمِيعٗا قَالَتۡ أُخۡرَىٰهُمۡ لِأُولَىٰهُمۡ رَبَّنَا هَـٰٓؤُلَآءِ أَضَلُّونَا فَـَٔاتِهِمۡ عَذَابٗا ضِعۡفٗا مِّنَ ٱلنَّارِۖ قَالَ لِكُلّٖ ضِعۡفٞ وَلَٰكِن لَّا تَعۡلَمُونَ
अल्लाह का आदेश होगा कि तुम भी प्रवेश कर जाओ, उन समुदायों में, जो तुमसे पहले के जिन्नों और मनुष्यों में से नरक में। जब भी कोई समुदाय नरक में प्रवेश करेगा, तो अपने समान दूसरे समुदाय को धिक्कार करेगा, यहाँ तक कि जब उसमें सब एकत्र हो जायेंगे, तो उनका पिछला अपने पहले के लिए कहेगाः हे हमारे पालनहार! इन्होंने ही हमें कुपथ किया है। अतः इन्हें दुगनी यातना दे। वह (अल्लाह) कहेगाः तुममें से प्रत्येक के लिए दुगनी यातना है, परन्तु तुम्हें ज्ञान नहीं।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَقَالَتۡ أُولَىٰهُمۡ لِأُخۡرَىٰهُمۡ فَمَا كَانَ لَكُمۡ عَلَيۡنَا مِن فَضۡلٖ فَذُوقُواْ ٱلۡعَذَابَ بِمَا كُنتُمۡ تَكۡسِبُونَ
तथा उनका पहला समुदाय अपने दूसरे समुदाय से कहेगाः (यदि हम दोषी थे) तो हमपर तुम्हारी कोई प्रधानता नहीं[1] हुई, तो तुम अपने कुकर्मों की यातना का स्वाद लो।
1. और हम और तुम यातना में बराबर हैं। आयत में इस तथ्य की ओर संकेत है कि कोई समुदाय कुपथ होता है तो वह स्वयं कुपथ नहीं होता, वह दूसरों को भी अपने कुचरित्र से कुपथ करता है। अतः सभी दुगनी यातना के अधिकारी हुये।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَٱسۡتَكۡبَرُواْ عَنۡهَا لَا تُفَتَّحُ لَهُمۡ أَبۡوَٰبُ ٱلسَّمَآءِ وَلَا يَدۡخُلُونَ ٱلۡجَنَّةَ حَتَّىٰ يَلِجَ ٱلۡجَمَلُ فِي سَمِّ ٱلۡخِيَاطِۚ وَكَذَٰلِكَ نَجۡزِي ٱلۡمُجۡرِمِينَ
वास्तव में, जिन्होंने हमारी आयतों को झुठला दिया और उनसे अभिमान किया, उनके लिए आकाश के द्वार नहीं खोले जायेंगे और न वे स्वर्ग में प्रवेश करेंगे, जब तक[1] ऊँट सूई के नाके से पार न हो जाये और हम इसी प्रकार अपराधियों को बदला देते हैं।
1. अर्थात उन का स्वर्ग में प्रवेश असंभव होगा।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
لَهُم مِّن جَهَنَّمَ مِهَادٞ وَمِن فَوۡقِهِمۡ غَوَاشٖۚ وَكَذَٰلِكَ نَجۡزِي ٱلظَّـٰلِمِينَ
उन्हीं के लिए नरक का बिछौना और उनके ऊपर से ओढ़ना होगा और इसी प्रकार हम अत्याचारियों को प्रतिकार (बदला[1]) देते हैं।
1. अर्थात उन के कुकर्मों तथा अत्याचारों का।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ لَا نُكَلِّفُ نَفۡسًا إِلَّا وُسۡعَهَآ أُوْلَـٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَنَّةِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ
और जो ईमान लाये और सत्कर्म किये और हम किसीपर उसकी सकत से (अधिक) भार नहीं रखते। वही स्वर्गी हैं, और वही उसमें सदावासी होंगे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَنَزَعۡنَا مَا فِي صُدُورِهِم مِّنۡ غِلّٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهِمُ ٱلۡأَنۡهَٰرُۖ وَقَالُواْ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي هَدَىٰنَا لِهَٰذَا وَمَا كُنَّا لِنَهۡتَدِيَ لَوۡلَآ أَنۡ هَدَىٰنَا ٱللَّهُۖ لَقَدۡ جَآءَتۡ رُسُلُ رَبِّنَا بِٱلۡحَقِّۖ وَنُودُوٓاْ أَن تِلۡكُمُ ٱلۡجَنَّةُ أُورِثۡتُمُوهَا بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ
तथा उनके दिलों में जो द्वेष होगा, उसे हम निकाल देंगे[1]। उन (स्वर्गों में) बहती नहरें होंगी तथा वे कहेंगे कि उस अल्लाह की प्रशंसा है, जिसने हमें इसकी राह दिखाई और यदि अल्लाह हमें मार्गदर्शन न देता, तो हमें मार्गदर्शन न मिलता। हमारे पालनहार के रसूल सत्य लेकर आये तथा उन्हें पुकारा जायेगा कि इस स्वर्ग के अधिकारी तुम अपने सत्कर्मों के कारण हुए हो।
1. स्वर्गियों को सब प्रकार के सुख-सुविधा के साथ यह भी बड़ी नेमत मिलेगी कि उन के दिलों का बैर निकाल दिया जायेगा, ताकि स्वर्ग में मित्र बन कर रहें। क्यों कि आपस के बैर से सब सुख किरकिरा हो जाता है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

وَنَادَىٰٓ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَنَّةِ أَصۡحَٰبَ ٱلنَّارِ أَن قَدۡ وَجَدۡنَا مَا وَعَدَنَا رَبُّنَا حَقّٗا فَهَلۡ وَجَدتُّم مَّا وَعَدَ رَبُّكُمۡ حَقّٗاۖ قَالُواْ نَعَمۡۚ فَأَذَّنَ مُؤَذِّنُۢ بَيۡنَهُمۡ أَن لَّعۡنَةُ ٱللَّهِ عَلَى ٱلظَّـٰلِمِينَ
तथा स्वर्गवासी नरकवासियों को पुकारेंगे कि हमें, हमारे पालनहार ने जो वचन दिया था, उसे हमने सच पाया, तो क्या तुम्हारे पानलहार ने तुम्हें जो वचन दिया था, उसे तुमने सच पाया? वे कहेंगे कि हाँ! फिर उनके बीच एक पुकारने वाला पुकारेगा कि अल्लाह की धिक्कार है, उन अत्याचारियों पर।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
ٱلَّذِينَ يَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَيَبۡغُونَهَا عِوَجٗا وَهُم بِٱلۡأٓخِرَةِ كَٰفِرُونَ
जो लोगों को अल्लाह की राह (सत्धर्म) से रोकते तथा उसे टेढ़ा करना चाहते थे और वही प्रलोक के प्रति विश्वास नहीं रखते।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَبَيۡنَهُمَا حِجَابٞۚ وَعَلَى ٱلۡأَعۡرَافِ رِجَالٞ يَعۡرِفُونَ كُلَّۢا بِسِيمَىٰهُمۡۚ وَنَادَوۡاْ أَصۡحَٰبَ ٱلۡجَنَّةِ أَن سَلَٰمٌ عَلَيۡكُمۡۚ لَمۡ يَدۡخُلُوهَا وَهُمۡ يَطۡمَعُونَ
और दोनों (नरक तथा स्वर्ग) के बीच एक परदा होगा और कुछ लोग आराफ़[1] (ऊँचाइयों) पर होंगे, जो प्रत्येक को उनके लक्षणों से पहचानेंगे और स्वर्ग वासियों को पुकारकर उन्हें सलाम करेंगे और उन्होंने उसमें प्रवेश नहीं किया होगा, परन्तु उसकी आशा रखते होंगे।
1. आराफ़ नरक तथा स्वर्ग के मध्य एक दीवार है, जिस पर वह लोग रहेंगे जिन के सुकर्म और कुकर्म बराबर होंगे। और वह अल्लाह की दया से स्वर्ग में प्रवेश की आशा रखते होंगे। (इब्ने कसीर)
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
۞وَإِذَا صُرِفَتۡ أَبۡصَٰرُهُمۡ تِلۡقَآءَ أَصۡحَٰبِ ٱلنَّارِ قَالُواْ رَبَّنَا لَا تَجۡعَلۡنَا مَعَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ
और जब उनकी आँखें नरक वासियों की ओर फिरेंगी, तो कहेंगेः हे हमारे पालनहार! हमें अत्याचारियों में सम्मिलित न करना।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَنَادَىٰٓ أَصۡحَٰبُ ٱلۡأَعۡرَافِ رِجَالٗا يَعۡرِفُونَهُم بِسِيمَىٰهُمۡ قَالُواْ مَآ أَغۡنَىٰ عَنكُمۡ جَمۡعُكُمۡ وَمَا كُنتُمۡ تَسۡتَكۡبِرُونَ
फिर आराफ़ (ऊँचाइयों) के लोग कुछ लोगों को उनके लक्षणों से पहचान जायेंगे[1], उनसे कहेंगे कि (देखो!) तुम्हारे जत्थे और तुम्हारा घमंड तुम्हारे किसी काम नहीं आया!
1. जिन को संसार में पहचानते थे और याद दिलायेंगे कि जिस पर तुम्हें घमंड था आज तुम्हारे काम नहीं आया।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
أَهَـٰٓؤُلَآءِ ٱلَّذِينَ أَقۡسَمۡتُمۡ لَا يَنَالُهُمُ ٱللَّهُ بِرَحۡمَةٍۚ ٱدۡخُلُواْ ٱلۡجَنَّةَ لَا خَوۡفٌ عَلَيۡكُمۡ وَلَآ أَنتُمۡ تَحۡزَنُونَ
(और स्वर्गवासियों की ओर संकेत करेंगे कि) क्या यही वे लोग नहीं हैं, जिनके संबंध में तुम शपथ लेकर कह रहे थे कि अल्लाह इन्हें अपनी दया में से कुछ नहीं देगा? (आज उनसे कहा जा रहा है कि) स्वर्ग में प्रवेश कर जाओ, न तुमपर किसी प्रकार का भय है और न तुम उदासीन होगे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَنَادَىٰٓ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِ أَصۡحَٰبَ ٱلۡجَنَّةِ أَنۡ أَفِيضُواْ عَلَيۡنَا مِنَ ٱلۡمَآءِ أَوۡ مِمَّا رَزَقَكُمُ ٱللَّهُۚ قَالُوٓاْ إِنَّ ٱللَّهَ حَرَّمَهُمَا عَلَى ٱلۡكَٰفِرِينَ
तथा नरकवासी स्वर्गवासियों को पुकारेंगे कि हमपर तनिक पानी डाल दो अथवा जो अल्लाह ने तुम्हें प्रदान किया है, उसमें से कुछ दे दो। वे कहेंगे कि अल्लाह ने ये दोनों (आज) काफ़िरों के लिए ह़राम (वर्जित) कर दिया है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
ٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ دِينَهُمۡ لَهۡوٗا وَلَعِبٗا وَغَرَّتۡهُمُ ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَاۚ فَٱلۡيَوۡمَ نَنسَىٰهُمۡ كَمَا نَسُواْ لِقَآءَ يَوۡمِهِمۡ هَٰذَا وَمَا كَانُواْ بِـَٔايَٰتِنَا يَجۡحَدُونَ
(उसका निर्णय है कि) जिन्होंने अपने धर्म को तमाशा और खेल बना लिया था तथा जिन्हें सांसारिक जीवन ने धोखे में डाल रखा था, तो आज हम उन्हें ऐसे ही भुला देंगे, जिस प्रकार उन्होंने आज के दिन के आने को भुला दिया था[1] और इसलिए भी कि वे हमारी आयतों का इन्कार करते रहे।
1. नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहाःप्रलय के दिन अल्लाह ऐसे बंदों से कहेगाः क्या मैं ने तुम्हें बीवी-बच्चे नहीं दिये, आदर-मान नहीं दिया? क्या ऊँट-घोड़े तेरे अधीन नहीं किये, क्या तू मुख्या बन कर चुंगी नहीं लेता था? वह कहेगाः हे अल्लाह, सब सह़ीह़ है। अल्लाह प्रश्न करेगाः क्या मुझ से मिलने की आशा रखता था? वह कहेगाः नहीं। अल्लाह कहेगाः जैसे तू मुझे भूला रहा, आज मैं तुझे भूल जाता हूँ। (सह़ीह़ मुस्लिमः2968)
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

وَلَقَدۡ جِئۡنَٰهُم بِكِتَٰبٖ فَصَّلۡنَٰهُ عَلَىٰ عِلۡمٍ هُدٗى وَرَحۡمَةٗ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ
जबकि हमने उनके लिए एक ऐसी पुस्तक दी, जिसे हमने ज्ञान के आधार पर सविस्तार वर्णित कर दिया है, जो मार्गदर्शन तथा दया है, उन लोगों के लिए, जो ईमान (विश्वास) रखते हैं।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
هَلۡ يَنظُرُونَ إِلَّا تَأۡوِيلَهُۥۚ يَوۡمَ يَأۡتِي تَأۡوِيلُهُۥ يَقُولُ ٱلَّذِينَ نَسُوهُ مِن قَبۡلُ قَدۡ جَآءَتۡ رُسُلُ رَبِّنَا بِٱلۡحَقِّ فَهَل لَّنَا مِن شُفَعَآءَ فَيَشۡفَعُواْ لَنَآ أَوۡ نُرَدُّ فَنَعۡمَلَ غَيۡرَ ٱلَّذِي كُنَّا نَعۡمَلُۚ قَدۡ خَسِرُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ وَضَلَّ عَنۡهُم مَّا كَانُواْ يَفۡتَرُونَ
(फिर) क्या वे इसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं कि इसका परिणाम सामने आ जाये? जिस दिन इसका परिणाम आ जायेगा, तो वही, जो इससे पहले इसे भूले हुए थे, कहेंगे कि हमारे पालनहार के रसूल सच लेकर आए थे, (परन्तु हमने नहीं माना) तो क्या हमारे लिए कोई अनुशंसक (सिफ़ारिशी) है, जो हमारी अनुशंसा (सिफ़ारिश) करे? अथवा हम संसार में फेर दिए जायेँ, तो जो कर्म हम करते रहे, उनके विपरीत कर्म करेंगे! उनहोंने स्वयं को छति में डाल दिया तथा उनसे जो मिथ्या बातें बना रहे थे खो गईं।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
إِنَّ رَبَّكُمُ ٱللَّهُ ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ فِي سِتَّةِ أَيَّامٖ ثُمَّ ٱسۡتَوَىٰ عَلَى ٱلۡعَرۡشِۖ يُغۡشِي ٱلَّيۡلَ ٱلنَّهَارَ يَطۡلُبُهُۥ حَثِيثٗا وَٱلشَّمۡسَ وَٱلۡقَمَرَ وَٱلنُّجُومَ مُسَخَّرَٰتِۭ بِأَمۡرِهِۦٓۗ أَلَا لَهُ ٱلۡخَلۡقُ وَٱلۡأَمۡرُۗ تَبَارَكَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلۡعَٰلَمِينَ
तुम्हारा पालनहार वही अल्लाह है, जिसने आकाशों तथा धरती को छः दिनों में बनाया[1], फिर अर्श (सिंहासन) पर स्थित हो गया। वह रात्रि से दिन को ढक देता है, दिन उसके पीछे दौड़ता हुआ आ जाता है, सूर्य तथा चाँद और तारे उसकी आज्ञा के अधीन हैं। सुन लो! वही उत्पत्तिकार है और वही शासक[2] है। वही अल्लाह अति शुभ संसार का पालनहार है।
1. यह छः दिन शनिवार, रविवार, सोमवार, मंगलवार, बुधवार और बृहस्पतिवार हैं। पहले दो दिन में धरती को, फिर आकाश को बनाया, फिर आकाश को दो दिन में बराबर किया, फिर धरती को फैलाया और उस में पर्वत, पानी और उपज की व्यवस्था दो दिन में की। इस प्रकार यह कुल छः दिन हुये। (देखियेः सूरह सज्दह, आयतः9-10) 2. अर्थात इस विश्व की व्यवस्था का अधिकार उस के सिवा किसी को नहीं है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
ٱدۡعُواْ رَبَّكُمۡ تَضَرُّعٗا وَخُفۡيَةًۚ إِنَّهُۥ لَا يُحِبُّ ٱلۡمُعۡتَدِينَ
तुम अपने (उसी) पालनहर को रोते हुए तथा धीरे धीरे पुकारो। निःसंदेह वह सीमा पार करने वालों से प्रेम नहीं करता।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَلَا تُفۡسِدُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ بَعۡدَ إِصۡلَٰحِهَا وَٱدۡعُوهُ خَوۡفٗا وَطَمَعًاۚ إِنَّ رَحۡمَتَ ٱللَّهِ قَرِيبٞ مِّنَ ٱلۡمُحۡسِنِينَ
तथा धरती में उसके सुधार के पश्चात्[1] उपद्रव न करो और उसीसे डरते हुए तथा आशा रखते हुए[2] प्रार्थना करो। वास्तव में, अल्लाह की दया सदाचारियों के समीप है।
1. अर्थात सत्धर्म और रसूलों द्वारा सुधार किये जाने के पश्चात। 2. अर्थात पापाचार से डरते और उस की दया की आशा रखते हुये।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَهُوَ ٱلَّذِي يُرۡسِلُ ٱلرِّيَٰحَ بُشۡرَۢا بَيۡنَ يَدَيۡ رَحۡمَتِهِۦۖ حَتَّىٰٓ إِذَآ أَقَلَّتۡ سَحَابٗا ثِقَالٗا سُقۡنَٰهُ لِبَلَدٖ مَّيِّتٖ فَأَنزَلۡنَا بِهِ ٱلۡمَآءَ فَأَخۡرَجۡنَا بِهِۦ مِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِۚ كَذَٰلِكَ نُخۡرِجُ ٱلۡمَوۡتَىٰ لَعَلَّكُمۡ تَذَكَّرُونَ
और वही है, जो अपनी दया (वर्षा) से पहले वायुओं को (वर्षा) की शुभ सूचना देने के लिए भेजता है और जब वे भारी बादलों को लिए उड़ती हैं, तो हम उसे किसी निर्जीव धरती को (जीवित) करने के लिए पहुँचा देते हैं, फिर उससे जल वर्षा कर, उसके द्वारा प्रत्येक प्रकार के फल उपजा देते हैं। इसी प्रकार, हम मुर्दों को जीवित करते हैं, ताकि तुम शिक्षा ग्रहण कर सको।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

وَٱلۡبَلَدُ ٱلطَّيِّبُ يَخۡرُجُ نَبَاتُهُۥ بِإِذۡنِ رَبِّهِۦۖ وَٱلَّذِي خَبُثَ لَا يَخۡرُجُ إِلَّا نَكِدٗاۚ كَذَٰلِكَ نُصَرِّفُ ٱلۡأٓيَٰتِ لِقَوۡمٖ يَشۡكُرُونَ
और स्वच्छ भूमि अपनी उपज अल्लाह की अनुमति से भरपूर देती है तथा खराब भूमि की उपज थोड़ी ही होती है। इसी प्रकार, हम अपनी[1] आयतें (निशानियाँ) उनके लिए दुहराते हैं, जो शुक्र अदा करते हैं।
1. नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहाः मुझे अल्लाह ने जिस मार्गदर्शन और ज्ञान के साथ भेजा है, वह उस वर्षा के समान है, जो किसी भूमि में हुई। तो उस का कुछ भाग अच्छा था जिस ने पानी लिया और उस से बहुत सी घास और चारा उगाया। और कुछ कड़ा था जिस ने पानी रोक लिया तो लोगों को लाभ हुआ और उस से पिया और सींचा। और कुछ चिकना था, जिस ने न पानी रोका न घास उपजाई। तो यही उस की दशा है जिस ने अल्लाह के धर्म को समझा और उसे सीखा तथा सिखाया। और उस की जिस ने उस पर ध्यान ही नहीं दिया और न अल्लाह के मार्गदर्शन को स्वीकार किया, जिस के साथ मुधे भेजा गया है। (सह़ीह़ बुख़ारीः79)
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
لَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوۡمِهِۦ فَقَالَ يَٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنۡ إِلَٰهٍ غَيۡرُهُۥٓ إِنِّيٓ أَخَافُ عَلَيۡكُمۡ عَذَابَ يَوۡمٍ عَظِيمٖ
हमने नूह़[1] को उसकी जाति की ओर (अपना संदेश पहुँचाने के लिए) भेजा था, तो उसने कहाः हे मेरी जाति के लोगो! (केवल) अल्लाह की इबादत (वंदना) करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। मैं तुमपर एक बड़े दिन की यातना से डरता हूँ।
1. बताया जाता है कि नूह़ अलैहिस्सलाम प्रथम मनु आदम (अलैहिस्स्लाम) के दसवें वंश में थे। उन के कुछ पहले तक लोग इस्लाम पर चले आ रहे थे। फिर अपने धर्म से फिर गये अपने पुनीत पूर्वजों की मुर्तियाँ बना कर पूजने लगे। तब अल्लाह ने नूह़ को भेजा। किन्तु कुछ के सिवा किसी ने उन की बात नहीं मानी। अन्ततः सब डुबो दिये गये। फिर नूह़ के तीन पुत्रों से मानव वंश चला। इसी लिये उन को दूसरा आदम भी कहा जाता है। (देखियेः सूरह नूह़, आयतः71)
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ ٱلۡمَلَأُ مِن قَوۡمِهِۦٓ إِنَّا لَنَرَىٰكَ فِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٖ
उसकी जाति के प्रमुखों ने कहाः हमें लगता है कि तुम खुले कुपथ में पड़ गये हो।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ يَٰقَوۡمِ لَيۡسَ بِي ضَلَٰلَةٞ وَلَٰكِنِّي رَسُولٞ مِّن رَّبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ
उसने कहाः हे मेरी जाति! मैं किसी कुपथ में नहीं हूँ, परन्तु मैं विश्व के पालनहार का रसूल हूँ।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
أُبَلِّغُكُمۡ رِسَٰلَٰتِ رَبِّي وَأَنصَحُ لَكُمۡ وَأَعۡلَمُ مِنَ ٱللَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ
तुम्हें अपने पालनहार का संदेश पहुँचा रहा हूँ, तुम्हारा भला चाहता हूँ और अल्लाह की ओर से उन चीज़ों का ज्ञान रखता हूँ, जिनका ज्ञान तुम्हें नहीं है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
أَوَعَجِبۡتُمۡ أَن جَآءَكُمۡ ذِكۡرٞ مِّن رَّبِّكُمۡ عَلَىٰ رَجُلٖ مِّنكُمۡ لِيُنذِرَكُمۡ وَلِتَتَّقُواْ وَلَعَلَّكُمۡ تُرۡحَمُونَ
क्या तुम्हें इसपर आश्चर्य हो रहा है कि तुम्हारे पालनहार की शिक्षा तुम्हीं में से एक पुरुष द्वारा तुम्हारे पास आ गयी है, ताकि वह तुम्हें सावधान करे और ताकि तुम आज्ञाकारी बनो और अल्लाह की दया के योग्य हो जाओ?
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَكَذَّبُوهُ فَأَنجَيۡنَٰهُ وَٱلَّذِينَ مَعَهُۥ فِي ٱلۡفُلۡكِ وَأَغۡرَقۡنَا ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَآۚ إِنَّهُمۡ كَانُواْ قَوۡمًا عَمِينَ
फिर भी उन्होंने उसे झुठला दिया। तो हमने उसे और जो नौका में उसके साथ थे, उन्हें बचा लिया और उन्हें डुबो दिया, जो हमारी आयतों को झुठला चुके थे। वास्तव में, वह (समझ-बूझ के) अंधे थे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
۞وَإِلَىٰ عَادٍ أَخَاهُمۡ هُودٗاۚ قَالَ يَٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنۡ إِلَٰهٍ غَيۡرُهُۥٓۚ أَفَلَا تَتَّقُونَ
(और इसी प्रकार) आद[1] की ओर उनके भाई हूद को (भेजा)। उसने कहाः हे मेरी जाति! अल्लाह की इबादत (वंदना) करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तो क्या तुम (उसकी अवज्ञा से) नहीं डरते?
1. नूह़ की जाति के पश्चात अरब में आद जाति का उत्थान हूआ। जिस का निवास स्थान अह़क़ाफ़ का क्षेत्र था। जो ह़िजाज तथा यमामा के बीच स्थित है। उन की आबादियाँ उमान से ह़ज़रमौत और इराक़ तक फैली हुई थीं।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ ٱلۡمَلَأُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن قَوۡمِهِۦٓ إِنَّا لَنَرَىٰكَ فِي سَفَاهَةٖ وَإِنَّا لَنَظُنُّكَ مِنَ ٱلۡكَٰذِبِينَ
(इसपर) उनकी जाति में से उन प्रमुखों ने कहा, जो काफ़िर हो गये कि हमें ऐसा लग रहा है कि तुम नासमझ हो गये हो और वास्तव में हम तुम्हें झूठों में समझ रहे हैं।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ يَٰقَوۡمِ لَيۡسَ بِي سَفَاهَةٞ وَلَٰكِنِّي رَسُولٞ مِّن رَّبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ
उसने कहाः हे मेरी जाति! मुझमें कोई नासमझी की बात नहीं है, परन्तु मैं तो संसार के पालनहार का रसूल (संदेशवाहक) हूँ।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

أُبَلِّغُكُمۡ رِسَٰلَٰتِ رَبِّي وَأَنَا۠ لَكُمۡ نَاصِحٌ أَمِينٌ
मैं तुम्हें अपने पालनहार का संदेश पहुँचा रहा हूँ और वास्तव में मैं तुम्हारा भरोसा करने योग्य शिक्षक हूँ।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
أَوَعَجِبۡتُمۡ أَن جَآءَكُمۡ ذِكۡرٞ مِّن رَّبِّكُمۡ عَلَىٰ رَجُلٖ مِّنكُمۡ لِيُنذِرَكُمۡۚ وَٱذۡكُرُوٓاْ إِذۡ جَعَلَكُمۡ خُلَفَآءَ مِنۢ بَعۡدِ قَوۡمِ نُوحٖ وَزَادَكُمۡ فِي ٱلۡخَلۡقِ بَصۜۡطَةٗۖ فَٱذۡكُرُوٓاْ ءَالَآءَ ٱللَّهِ لَعَلَّكُمۡ تُفۡلِحُونَ
क्या तुम्हें इसपर आश्चर्य हो रहा है कि तुम्हारे पालनहार की शिक्षा, तुम्हीं में से एक पुरुष द्वारा तुम्हारे पास आ गई है, ताकि वह तुम्हें सावधान करे? तथा याद करो कि अल्लाह ने नूह़ की जाति के पश्चात तुम्हें धरती में अधिकार दिया है और तुम्हें अधिक शारीरिक बल दिया है। अतः अल्लाह के पुरस्कारों को याद[1] करो। संभवतः तुम सफल हो जाओगे।
1. अर्थात उस के आज्ञाकारी तथा कृतज्ञ बनो।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالُوٓاْ أَجِئۡتَنَا لِنَعۡبُدَ ٱللَّهَ وَحۡدَهُۥ وَنَذَرَ مَا كَانَ يَعۡبُدُ ءَابَآؤُنَا فَأۡتِنَا بِمَا تَعِدُنَآ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ
उन्होंने कहाः क्या तुम हमारे पास इसलिए आये हो कि हम केवल एक ही अल्लाह की इबादत (वंदना) करें और उन्हें छोड़ दें, जिनकी पूजा हमारे पूर्वज करते आ रहे हैं? तो वो बात हमारे पास ला दो, जिससे हमें डरा रहे हो, यदि तुम सच्चे हो?
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ قَدۡ وَقَعَ عَلَيۡكُم مِّن رَّبِّكُمۡ رِجۡسٞ وَغَضَبٌۖ أَتُجَٰدِلُونَنِي فِيٓ أَسۡمَآءٖ سَمَّيۡتُمُوهَآ أَنتُمۡ وَءَابَآؤُكُم مَّا نَزَّلَ ٱللَّهُ بِهَا مِن سُلۡطَٰنٖۚ فَٱنتَظِرُوٓاْ إِنِّي مَعَكُم مِّنَ ٱلۡمُنتَظِرِينَ
उसने कहाः तुमपर तुम्हारे पालनहार का प्रकोप और क्रोध आ पड़ा है। क्या तुम मुझसे कुछ (मूर्तियों के) नामों के विषय में विवाद कर रहे हो, जिनका तुमने तथा तुम्हारे पूर्वजों ने (पूज्य) नाम रखा है, जिसका कोई तर्क (प्रमाण) अल्लाह ने नहीं उतारा है? तो तुम (प्रकोप की) प्रतीक्षा करो और तुम्हारे साथ मैं भी प्रतीक्षा कर रहा हूँ।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَأَنجَيۡنَٰهُ وَٱلَّذِينَ مَعَهُۥ بِرَحۡمَةٖ مِّنَّا وَقَطَعۡنَا دَابِرَ ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَاۖ وَمَا كَانُواْ مُؤۡمِنِينَ
फिर हमने उसे और उसके साथियों को बचा लिया तथा उनकी जड़ काट दी, जिन्होंने हमारी आयतों (आदेशों) को झुठला दिया था और वे ईमान लाने वाले नहीं थे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَإِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمۡ صَٰلِحٗاۚ قَالَ يَٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنۡ إِلَٰهٍ غَيۡرُهُۥۖ قَدۡ جَآءَتۡكُم بَيِّنَةٞ مِّن رَّبِّكُمۡۖ هَٰذِهِۦ نَاقَةُ ٱللَّهِ لَكُمۡ ءَايَةٗۖ فَذَرُوهَا تَأۡكُلۡ فِيٓ أَرۡضِ ٱللَّهِۖ وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوٓءٖ فَيَأۡخُذَكُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ
और (इसी प्रकार) समूद[1] (जाति) के पास उनके भाई सालेह़ को भेजा। उसने कहाः हे मेरी जाति! अल्लाह की (वंदना) करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से खुला प्रमाण (चमत्कार) आ गया है। ये अल्लाह की ऊँटनी तुम्हारे लिए एक चमत्कार[2] है। अतः इसे अल्लाह की धरती में चरने के लिए छोड़ दो और इसे बुरे विचार से हाथ न लगाना, अन्यथा तुम्हें दुःखदायी यातना घेर लेगी।
1. समूद जाति अरब के उस क्षेत्र में रहती थी, जो ह़िजाज़ तथा शाम के बीच "वादिये क़ुर" तक चला गया है। जिस को आज "अल उला" कहते हैं। इसी को दूसरे स्थान पर "अलहिज्र" भी कहा गया है। 2. समूद जाति ने अपने नबी सालेह़ अलैहिस्सलाम से यह माँग की थी कि पर्वत से एक ऊँटनी निकाल दें। और सालेह़ अलैहिस्सलाम की प्रार्थना से अल्लाह ने उन की यह माँग पूरी कर दी। (इब्ने कसीर)
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

وَٱذۡكُرُوٓاْ إِذۡ جَعَلَكُمۡ خُلَفَآءَ مِنۢ بَعۡدِ عَادٖ وَبَوَّأَكُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ تَتَّخِذُونَ مِن سُهُولِهَا قُصُورٗا وَتَنۡحِتُونَ ٱلۡجِبَالَ بُيُوتٗاۖ فَٱذۡكُرُوٓاْ ءَالَآءَ ٱللَّهِ وَلَا تَعۡثَوۡاْ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُفۡسِدِينَ
तथा याद करो कि अल्लाह ने आद जाति के ध्वस्त किए जाने के पश्चात् तुम्हें धरती में अधिकार दिया है और तुम्हें धरती में बसाया है, तुम उसके मैदानों में भवन बनाते हो और पर्वतों को तराशकर घर बनाते हो। अतः अल्लाह के उपकारों को याद करो और धरती में उपद्रव करते न फिरो।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ ٱلۡمَلَأُ ٱلَّذِينَ ٱسۡتَكۡبَرُواْ مِن قَوۡمِهِۦ لِلَّذِينَ ٱسۡتُضۡعِفُواْ لِمَنۡ ءَامَنَ مِنۡهُمۡ أَتَعۡلَمُونَ أَنَّ صَٰلِحٗا مُّرۡسَلٞ مِّن رَّبِّهِۦۚ قَالُوٓاْ إِنَّا بِمَآ أُرۡسِلَ بِهِۦ مُؤۡمِنُونَ
उसकी जाति के घमंडी प्रमुखों ने उन निर्बलों से कहा, जो उनमें से ईमान लाये थेः क्या तुम विश्वास रखते हो कि सालेह़ अपने पालनहार का भेजा हुआ है? उन्होंने कहाः निश्चय जिस (संदेश) के साथ वह भेजा गया है, हम उसपर ईमान (विश्वास) रखते हैं।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ ٱلَّذِينَ ٱسۡتَكۡبَرُوٓاْ إِنَّا بِٱلَّذِيٓ ءَامَنتُم بِهِۦ كَٰفِرُونَ
(तो इसपर) घमंडियों[1] ने कहाः हमतो जिसका तुमने विश्वास किया है उसे नहीं मानते।
1. अर्तथात अपने संसारिक सुखों के कारण अपने बड़े होने का गर्व था।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَعَقَرُواْ ٱلنَّاقَةَ وَعَتَوۡاْ عَنۡ أَمۡرِ رَبِّهِمۡ وَقَالُواْ يَٰصَٰلِحُ ٱئۡتِنَا بِمَا تَعِدُنَآ إِن كُنتَ مِنَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ
फिर उन्होंने ऊँटनी को वध कर दिया और अपने पालनहार के आदेश का उल्लंघन किया और कहाः हे सालेह़! तू हमें जिस (यातना) की धमकी दे रहा था, उसे ले आ, यदि तू वास्तव में रसूलों में है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَأَخَذَتۡهُمُ ٱلرَّجۡفَةُ فَأَصۡبَحُواْ فِي دَارِهِمۡ جَٰثِمِينَ
तो उन्हें भूकंप ने पकड़ लिया। फिर जब भोर हुई, तो वे अपने घरों में औंधे पड़े हुए थे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَتَوَلَّىٰ عَنۡهُمۡ وَقَالَ يَٰقَوۡمِ لَقَدۡ أَبۡلَغۡتُكُمۡ رِسَالَةَ رَبِّي وَنَصَحۡتُ لَكُمۡ وَلَٰكِن لَّا تُحِبُّونَ ٱلنَّـٰصِحِينَ
तो सालेह़ ने उनसे मुँह फेर लिया और कहाः हे मेरी जाति! मैंने तुम्हें अपने पालनहार के उपदेश पहुँचा दिये थे और मैंने तुम्हारा भला चाहा। परन्तु तुम उपकारियों से प्रेम नहीं करते।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَلُوطًا إِذۡ قَالَ لِقَوۡمِهِۦٓ أَتَأۡتُونَ ٱلۡفَٰحِشَةَ مَا سَبَقَكُم بِهَا مِنۡ أَحَدٖ مِّنَ ٱلۡعَٰلَمِينَ
और हमने लूत[1] को भेजा। जब उसने अपनी जाति से कहाः क्या तुम ऐसी निर्लज्जा का काम कर रहे हो, जो तुमसे पहले संसारवासियों में से किसी ने नहीं किया है?
1. लूत अलैहिस्सलाम इब्राहीम अलैहिस्सलाम के भतीजे थे। और वह जिस जाति के मार्गदर्शन के लिये भेजे गये थे, वह उस क्षेत्र में रहती थी जहाँ अब "मृत सागर" स्थित है। उस का नाम भाष्यकारों ने सदूम बताया है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
إِنَّكُمۡ لَتَأۡتُونَ ٱلرِّجَالَ شَهۡوَةٗ مِّن دُونِ ٱلنِّسَآءِۚ بَلۡ أَنتُمۡ قَوۡمٞ مُّسۡرِفُونَ
तुम स्त्रियों को छोड़कर कामवासना की पूर्ति के लिए पुरुषों के पास जाते हो? बल्कि तुम सीमा लांघने वाली जाति[1] हो।
1. लूत अलैहिस्सलाम की जाति ने निर्लज्जा और बालमैथुन की कुरीति बनाई थी जो मनुष्य के स्वभाव के विरुध्द था। आज रिसर्च से पता चला कि यह विभिन्न प्रकार के रोगों का कारण है, जिस में विशेष कर "एड्स" के रोगों का वर्णन करते हैं। परन्तु आज पश्चिमि देश दुबारा उस अंधकार युग की ओर जा रहे हैं और इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का नाम दे रखा है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

وَمَا كَانَ جَوَابَ قَوۡمِهِۦٓ إِلَّآ أَن قَالُوٓاْ أَخۡرِجُوهُم مِّن قَرۡيَتِكُمۡۖ إِنَّهُمۡ أُنَاسٞ يَتَطَهَّرُونَ
और उसकी जाति का उत्तर बस ये था कि इनको अपनी बस्ती से निकाल दो। ये लोग अपने में बड़े पवित्र बन रहे हैं।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَأَنجَيۡنَٰهُ وَأَهۡلَهُۥٓ إِلَّا ٱمۡرَأَتَهُۥ كَانَتۡ مِنَ ٱلۡغَٰبِرِينَ
हमने उसे और उसके परिवार को, उसकी पत्नी के सिवा, बचा लिया, वह पीछे रह जाने वाली थी।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَأَمۡطَرۡنَا عَلَيۡهِم مَّطَرٗاۖ فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُجۡرِمِينَ
और हमने उनपर (पत्थरों) की वर्षा कर दी। तो देखो कि अपराधियों का परिणाम कैसा रहा?
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَإِلَىٰ مَدۡيَنَ أَخَاهُمۡ شُعَيۡبٗاۚ قَالَ يَٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنۡ إِلَٰهٍ غَيۡرُهُۥۖ قَدۡ جَآءَتۡكُم بَيِّنَةٞ مِّن رَّبِّكُمۡۖ فَأَوۡفُواْ ٱلۡكَيۡلَ وَٱلۡمِيزَانَ وَلَا تَبۡخَسُواْ ٱلنَّاسَ أَشۡيَآءَهُمۡ وَلَا تُفۡسِدُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ بَعۡدَ إِصۡلَٰحِهَاۚ ذَٰلِكُمۡ خَيۡرٞ لَّكُمۡ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ
तथा मद्यन[1] की ओर हमने उसके भाई शोऐब को रसूल बनाकर भेजा। उसने कहः हे मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत (वंदना) करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं है। तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार का खुला तर्क (प्रमाण) आ गया है। अतः नाप और तोल पूरी करो और लोगों की चीज़ों में कमी न करो तथा धरती में उसके सुधार के पश्चात उपद्रव न करो। यही तुम्हारे लिए उत्त्म है, यदि तुम ईमान वाले हो।
1. मद्यन एक क़बीले का नाम था। और उसी के नाम पर एक नगर बस गया, जो ह़िजाज़ के उत्तर-पश्चिम तथा फ़लस्तीन के दक्षिण में लाल सागर और अक़्बा खाड़ी के किनारे पर रहता था। यह लोग व्यपार करते थे। प्राचीन व्यपार राजपथ, लाल सागर के किनारे यमन से मक्का तथा यंबुआ होते हुये सीरिया तक जाता था।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَلَا تَقۡعُدُواْ بِكُلِّ صِرَٰطٖ تُوعِدُونَ وَتَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ مَنۡ ءَامَنَ بِهِۦ وَتَبۡغُونَهَا عِوَجٗاۚ وَٱذۡكُرُوٓاْ إِذۡ كُنتُمۡ قَلِيلٗا فَكَثَّرَكُمۡۖ وَٱنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُفۡسِدِينَ
तथा प्रत्येक मार्ग पर लोगों को धमकाने के लिए न बैठो और उन्हें अल्लाह की राह से न रोको, जो उसपर ईमान लाये[1] हैं और उसे टेढ़ा न बनाओ तथा उस समय को याद करो, जब तुम थोड़े थे, तो तुम्हें अल्लाह ने अधिक कर दिया तथा देखो कि उपद्रवियों का परिणाम क्या हुआ?
1. जैसे मक्का वाले मक्का के बाहर से आने वालों को क़ुर्आन सुनने से रोका करते थे। और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को जादूगर कह कर आप के पास जाने से रोकते थे। परन्तु उन की एक न चली और क़ुर्आन लोगों के दिलों में उतरता और इस्लाम फैलता चला गया। इस से पता चलता है कि नबियों की शिक्षाओं के साथ उन की जातियों ने एक जैसा व्यवहार किया।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَإِن كَانَ طَآئِفَةٞ مِّنكُمۡ ءَامَنُواْ بِٱلَّذِيٓ أُرۡسِلۡتُ بِهِۦ وَطَآئِفَةٞ لَّمۡ يُؤۡمِنُواْ فَٱصۡبِرُواْ حَتَّىٰ يَحۡكُمَ ٱللَّهُ بَيۡنَنَاۚ وَهُوَ خَيۡرُ ٱلۡحَٰكِمِينَ
और यदि तुम्हारा एक समुदाय उसपर ईमान लाया है, जिसके साथ मैं भेजा गया हूँ और दूसरा ईमान नहीं लाया है, तो तुम धैर्य रखो, यहाँ तक कि अल्लाह हमारे बीच निर्णय कर दे और वह उत्तम न्याय करने वाला है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

۞قَالَ ٱلۡمَلَأُ ٱلَّذِينَ ٱسۡتَكۡبَرُواْ مِن قَوۡمِهِۦ لَنُخۡرِجَنَّكَ يَٰشُعَيۡبُ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مَعَكَ مِن قَرۡيَتِنَآ أَوۡ لَتَعُودُنَّ فِي مِلَّتِنَاۚ قَالَ أَوَلَوۡ كُنَّا كَٰرِهِينَ
उसकी जाति के प्रमुखों ने, जिन्हें घमंड था, कहा कि हे शोऐब! हम तुम्हें तथा जो तुम्हारे साथ ईमान लाये हैं, अपने नगर से अवश्य निकाल देंगे अथवा तुम सबको हमारे धर्म में अवश्य वापस आना होगा। (शोऐब) ने कहाः क्या यदि हम उसे दिल से न मानें तो?
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَدِ ٱفۡتَرَيۡنَا عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا إِنۡ عُدۡنَا فِي مِلَّتِكُم بَعۡدَ إِذۡ نَجَّىٰنَا ٱللَّهُ مِنۡهَاۚ وَمَا يَكُونُ لَنَآ أَن نَّعُودَ فِيهَآ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ رَبُّنَاۚ وَسِعَ رَبُّنَا كُلَّ شَيۡءٍ عِلۡمًاۚ عَلَى ٱللَّهِ تَوَكَّلۡنَاۚ رَبَّنَا ٱفۡتَحۡ بَيۡنَنَا وَبَيۡنَ قَوۡمِنَا بِٱلۡحَقِّ وَأَنتَ خَيۡرُ ٱلۡفَٰتِحِينَ
हमने अल्लाह पर मिथ्या आरोप लगाया है, यदि तुम्हारे धर्म में इसके पश्चात वापस आ गये, जबकि हमें अल्लाह ने उससे मुक्त कर दिया है और हमारे लिए संभव नहीं कि उसमें फिर आ जायें, परन्तु ये कि हमारा पालनहार चाहता हो। हमारा पालनहार प्रत्येक वस्तु को अपने ज्ञान में समोये हुए है, अल्लाह ही पर हमारा भरोसा है। हे हमारे पालनहार! हमारे और हमारी जाति के बीच न्याय के साथ निर्णय कर दे और तू ही उत्तम निर्णयकारी है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَقَالَ ٱلۡمَلَأُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن قَوۡمِهِۦ لَئِنِ ٱتَّبَعۡتُمۡ شُعَيۡبًا إِنَّكُمۡ إِذٗا لَّخَٰسِرُونَ
तथा उसकी जाति के काफ़िर प्रमुखों ने कहा कि यदि तुम लोग शोऐब का अनुसरण करोगे, तो वस्तुतः तुम लोगों का उस समय नाश हो जायेगा।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَأَخَذَتۡهُمُ ٱلرَّجۡفَةُ فَأَصۡبَحُواْ فِي دَارِهِمۡ جَٰثِمِينَ
तो उन्हें भुकम्प ने पकड़ लिया, फिर भोर हुई, तो वे अपने घरों में औंधे पड़े हुए थे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ شُعَيۡبٗا كَأَن لَّمۡ يَغۡنَوۡاْ فِيهَاۚ ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ شُعَيۡبٗا كَانُواْ هُمُ ٱلۡخَٰسِرِينَ
जिन्होंने शोऐब को झुठलाया (उनकी ये दशा हुई कि) मानो कभी उस नगर में बसे ही नहीं थे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَتَوَلَّىٰ عَنۡهُمۡ وَقَالَ يَٰقَوۡمِ لَقَدۡ أَبۡلَغۡتُكُمۡ رِسَٰلَٰتِ رَبِّي وَنَصَحۡتُ لَكُمۡۖ فَكَيۡفَ ءَاسَىٰ عَلَىٰ قَوۡمٖ كَٰفِرِينَ
तो शोऐब उनसे विमुख हो गया तथा कहाः हे मेरी जाति! मैंने तुम्हें अपने पालनहार के संदेश पहुँचा दिये, तथा तुम्हारा हितकारी रहा। तो काफ़िर जाति (के विनाश) पर कैसे शोक करूँ?
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَمَآ أَرۡسَلۡنَا فِي قَرۡيَةٖ مِّن نَّبِيٍّ إِلَّآ أَخَذۡنَآ أَهۡلَهَا بِٱلۡبَأۡسَآءِ وَٱلضَّرَّآءِ لَعَلَّهُمۡ يَضَّرَّعُونَ
तथा हमने जब किसी नगरी में कोई नबी भेजा, तो उसके निवासियों को आपदा तथा दुःख में ग्रस्त कर दिया कि संभवतः वह विनती करें[1]।
1. आयत का भावार्त यह है कि सभी नबी अपनी जाति में पैदा हुये। सब अकेले धर्म का प्रचार करने के लिये आये। और सब का उपदेश एक था कि अल्लाह की वंदना करो, उस के सिवा कोई पूज्य नहीं। सब ने सत्कर्म की प्रेर्णा दी, और कुकर्म के दुष्परिणाम से सावधान किया। सब का साथ निर्धनों तथा निर्बलों ने दिया। प्रमुखों और बड़ों ने उन का विरोध किया। नबियों का विरोध भी उन्हें धमकी तथा दुःख दे कर किया गया। और सब का परिणाम भी एक प्रकार हुआ, अर्थात उन को अल्लाह की यातना ने घेर लिया। और यही सदा इस संसार में अल्लाह का नियम रहा है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
ثُمَّ بَدَّلۡنَا مَكَانَ ٱلسَّيِّئَةِ ٱلۡحَسَنَةَ حَتَّىٰ عَفَواْ وَّقَالُواْ قَدۡ مَسَّ ءَابَآءَنَا ٱلضَّرَّآءُ وَٱلسَّرَّآءُ فَأَخَذۡنَٰهُم بَغۡتَةٗ وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ
फिर हमने आपदा को सुःख सुविधा से बदल दिया, यहाँ तक कि जब वे सुःखी हो गये और उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों को भी दुःख तथा सुख पहुँचता रहा है, तो अकस्मात् हमने उन्हें पकड़ लिया और वे समझ नहीं सके।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

وَلَوۡ أَنَّ أَهۡلَ ٱلۡقُرَىٰٓ ءَامَنُواْ وَٱتَّقَوۡاْ لَفَتَحۡنَا عَلَيۡهِم بَرَكَٰتٖ مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِ وَلَٰكِن كَذَّبُواْ فَأَخَذۡنَٰهُم بِمَا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ
और यदि इन नगरों के वासी ईमान लाते और कुकर्मों से बचे रहते, तो हम उनपर आकाशों तथा धरती की सम्पन्नता के द्वार खोल देते। परन्तु उन्होंने झुठला दिया। अतः, हमने उनके करतूतों के कारण उन्हें (यातना में) घेर लिया।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
أَفَأَمِنَ أَهۡلُ ٱلۡقُرَىٰٓ أَن يَأۡتِيَهُم بَأۡسُنَا بَيَٰتٗا وَهُمۡ نَآئِمُونَ
तो क्या नगर वासी इस बात से निश्चिन्त हो गये हैं कि उनपर हमारी यातना रातों-रात आ जाये और वे पड़े सो रहे हों?
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
أَوَأَمِنَ أَهۡلُ ٱلۡقُرَىٰٓ أَن يَأۡتِيَهُم بَأۡسُنَا ضُحٗى وَهُمۡ يَلۡعَبُونَ
अथवा नगर वासी निश्चिन्त हो गये कि हमारी यातना उनपर दिन के समय आ पड़े और वे खेल रहे हों?
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
أَفَأَمِنُواْ مَكۡرَ ٱللَّهِۚ فَلَا يَأۡمَنُ مَكۡرَ ٱللَّهِ إِلَّا ٱلۡقَوۡمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ
तो क्या वे अल्लाह के गुप्त उपाय से निश्चिन्त हो गये हैं? तो (याद रखो!) अल्लाह के गुप्त उपाय से नाश होने वाली जाति ही निश्चिन्त होती है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
أَوَلَمۡ يَهۡدِ لِلَّذِينَ يَرِثُونَ ٱلۡأَرۡضَ مِنۢ بَعۡدِ أَهۡلِهَآ أَن لَّوۡ نَشَآءُ أَصَبۡنَٰهُم بِذُنُوبِهِمۡۚ وَنَطۡبَعُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمۡ فَهُمۡ لَا يَسۡمَعُونَ
तो क्या उनको शिक्षा नहीं मिली, जो धरती के वारिस होते हैं, उसके अगले वासियों के पश्चात् कि यदि हम चाहें, तो उनके पापों के बदले उन्हें आपदा में ग्रस्त कर दें और उनके दिलों पर मुहर लगा दें, फिर वे कोई बात ही न सुन सकें?
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
تِلۡكَ ٱلۡقُرَىٰ نَقُصُّ عَلَيۡكَ مِنۡ أَنۢبَآئِهَاۚ وَلَقَدۡ جَآءَتۡهُمۡ رُسُلُهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَمَا كَانُواْ لِيُؤۡمِنُواْ بِمَا كَذَّبُواْ مِن قَبۡلُۚ كَذَٰلِكَ يَطۡبَعُ ٱللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِ ٱلۡكَٰفِرِينَ
(हे नबी!) ये वे नगर हैं, जिनकी कथा हम आपको सुना रहे हैं। इन सबके पास उनके रसूल खुले तर्क (प्रमाण) लाये, तो वे ऐसे न थे कि उस सत्य पर विश्वास कर लें, जिसे वे इससे पूर्व झुठला[1] चुके थे। इसी प्रकार, अल्लाह काफ़िरों के दिलों पर मुहर लगाता है।
1. अर्थात सत्य का प्रमाण आने से पहले झुठला दिया था, उस के पश्चात् भी अपनी हठधर्मी से उसी पर अड़े रहे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَمَا وَجَدۡنَا لِأَكۡثَرِهِم مِّنۡ عَهۡدٖۖ وَإِن وَجَدۡنَآ أَكۡثَرَهُمۡ لَفَٰسِقِينَ
और हमने उनमें अधिक्तर को वचन पर स्थित नहीं पाया[1] तथा हमने उनमें अधिक्तर को अवज्ञाकारी पाया।
1. इस से उस प्रण (वचन) की ओर संकेत है, जो अल्लाह ने सब से "आदि काल" में लिया था कि क्या मैं तुम्हारा पालनहार (पूज्य) नहीं हूँ? तो सब ने इसे स्वीकार किया था। (देखियेः सूरह आराफ, आयतः172)
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
ثُمَّ بَعَثۡنَا مِنۢ بَعۡدِهِم مُّوسَىٰ بِـَٔايَٰتِنَآ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ وَمَلَإِيْهِۦ فَظَلَمُواْ بِهَاۖ فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُفۡسِدِينَ
फिर हमने इन रसूलों के पश्चात् मूसा को अपनी आयतों (चमत्कारों) के साथ फ़िरऔन[1] और उसके प्रमुखों के पास भेजा, तो उन्होंने भी हमारी आयतों के साथ अन्याय किया, तो देखो कि उपद्रवियों का क्या परिणाम हुआ?
1. मिस्र के शासकों की उपाधि फ़िरऔन होती थी। यह ईसा पूर्व डेढ़ हज़ार वर्ष की बात है। उन का राज्य शाम से लीबिया तथा ह़बशा तक था। फ़िरऔन अपने को सब से बड़ा पूज्य मानता था और लोग भी उस की पूजा करते थे। उस की ओर अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को एक अल्लाह की इबादत का संदेश दे कर भेजा कि पूज्य तो केवल अल्लाह है उस के अतिरिक्त कोई पूज्य नहीं।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَقَالَ مُوسَىٰ يَٰفِرۡعَوۡنُ إِنِّي رَسُولٞ مِّن رَّبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ
तथा मूसा ने कहाः हे फ़िरऔन! मैं वास्तव, में विश्व के पालनहार का रसूल (संदेश वाहक) हूँ।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

حَقِيقٌ عَلَىٰٓ أَن لَّآ أَقُولَ عَلَى ٱللَّهِ إِلَّا ٱلۡحَقَّۚ قَدۡ جِئۡتُكُم بِبَيِّنَةٖ مِّن رَّبِّكُمۡ فَأَرۡسِلۡ مَعِيَ بَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ
मेरे लिए यही योग्य है कि अल्लाह के विषय में सत्य के अतिरिक्त कोई बात न करूँ। मैं तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से खुला प्रमाण लाया हूँ। इसलिए मेरे साथ बनी इस्राईल[1] को जाने दो।
1. बनी इस्राईल यूसुफ अलैहिस्सलाम के युग में मिस्र आये थे। तथा चार सौ वर्ष का युग बड़े आदर के साथ व्यतीत किया। फिर उन के कुकर्मों के कारण फ़िरऔन और उस की जाति ने उन को अपना दास बना लिया। जिस के कारण मूसा (अलैहिस्सलाम) ने बनी इस्राईल को मुक्त करने की माँग की। (इब्ने कसीर)
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ إِن كُنتَ جِئۡتَ بِـَٔايَةٖ فَأۡتِ بِهَآ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ
उसने कहाः यदि तुमकोई प्रमाण (चमत्कार) लाये हो, तो प्रस्तुत करो, यदि तुम सच्चे हो।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَأَلۡقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ ثُعۡبَانٞ مُّبِينٞ
फिर मूसा ने अपनी लाठी फेंकी, तो अकस्मात् वह एक अजगर बन गई।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَنَزَعَ يَدَهُۥ فَإِذَا هِيَ بَيۡضَآءُ لِلنَّـٰظِرِينَ
और अपना हाथ (जैब से) निकाला, तो वह देखने वालों के लिए चमक रहा था।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ ٱلۡمَلَأُ مِن قَوۡمِ فِرۡعَوۡنَ إِنَّ هَٰذَا لَسَٰحِرٌ عَلِيمٞ
फ़िर्औन की जाति के प्रमुखों ने कहाः वास्तव में, ये बड़ा दक्ष जादूगर है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
يُرِيدُ أَن يُخۡرِجَكُم مِّنۡ أَرۡضِكُمۡۖ فَمَاذَا تَأۡمُرُونَ
वह तुम्हें, तुम्हारे देश से निकालना चाहता है। तो अब क्या आदेश देते हो?
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالُوٓاْ أَرۡجِهۡ وَأَخَاهُ وَأَرۡسِلۡ فِي ٱلۡمَدَآئِنِ حَٰشِرِينَ
सबने कहाः उसे और उसके भाई (हारून) को अभी छोड़ दो और नगरों में एकत्र करने के लिए हरकारे भेजो।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
يَأۡتُوكَ بِكُلِّ سَٰحِرٍ عَلِيمٖ
जो प्रत्येक दक्ष जादूगर को तुम्हारे पास लायें।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَجَآءَ ٱلسَّحَرَةُ فِرۡعَوۡنَ قَالُوٓاْ إِنَّ لَنَا لَأَجۡرًا إِن كُنَّا نَحۡنُ ٱلۡغَٰلِبِينَ
और जादूगर फ़िरऔन के पास आ गये। उन्होंने कहाः हमें निश्चय पुरस्कार मिलेगा, यदि हम ही विजय हो गये तो?
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ نَعَمۡ وَإِنَّكُمۡ لَمِنَ ٱلۡمُقَرَّبِينَ
फ़िर्औन ने कहाः हाँ! और तुम मेरे समीपवर्तियों में से भी हो जाओगे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالُواْ يَٰمُوسَىٰٓ إِمَّآ أَن تُلۡقِيَ وَإِمَّآ أَن نَّكُونَ نَحۡنُ ٱلۡمُلۡقِينَ
जादूगरों ने कहाः हे मूसा! तुम (पहले) फेंकोगे या हमें फेंकना होगा?
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ أَلۡقُواْۖ فَلَمَّآ أَلۡقَوۡاْ سَحَرُوٓاْ أَعۡيُنَ ٱلنَّاسِ وَٱسۡتَرۡهَبُوهُمۡ وَجَآءُو بِسِحۡرٍ عَظِيمٖ
मूसा ने कहाः तुम्हीं फेंको। तो उन्होंने जब (रस्सियाँ) फेंकीं, तो लोंगों की आँखों पर जादू कर दिया और उन्हें भयभीत कर दिया और बहुत बड़ा जादू कर दिखाया।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
۞وَأَوۡحَيۡنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰٓ أَنۡ أَلۡقِ عَصَاكَۖ فَإِذَا هِيَ تَلۡقَفُ مَا يَأۡفِكُونَ
तो हमने मूसा को वह़्यी की कि अपनी लाठी फेंको और वह अकस्मात् झूठे इन्द्रजाल को निगलने लगी।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَوَقَعَ ٱلۡحَقُّ وَبَطَلَ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ
अतः सत्य सिध्द हो गया और उनका बनाया मंत्र-तंत्र व्यर्थ होकर[1] रह गया।
1. क़ुर्आन ने अब से तेरह सौ वर्ष पहले यह घोषणा कर दी थी कि जादू तथा मंत्र-तंत्र निर्मूल हैं।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَغُلِبُواْ هُنَالِكَ وَٱنقَلَبُواْ صَٰغِرِينَ
अंततः वे प्राजित कर दिये गये और तुच्छ तथा अपमानित होकर रह गये।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَأُلۡقِيَ ٱلسَّحَرَةُ سَٰجِدِينَ
तथा सभी जादूगर (मूसा का सत्य) देखकर सज्दे में गिर गये।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

قَالُوٓاْ ءَامَنَّا بِرَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ
उन्होंने कहाः हम विश्व के पालनहार पर ईमान लाये।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
رَبِّ مُوسَىٰ وَهَٰرُونَ
जो मूसा तथा हारून का पालनहार है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ فِرۡعَوۡنُ ءَامَنتُم بِهِۦ قَبۡلَ أَنۡ ءَاذَنَ لَكُمۡۖ إِنَّ هَٰذَا لَمَكۡرٞ مَّكَرۡتُمُوهُ فِي ٱلۡمَدِينَةِ لِتُخۡرِجُواْ مِنۡهَآ أَهۡلَهَاۖ فَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَ
फ़िरऔन ने कहाः इससे पहले कि मैं तुम्हें अनुमति दूँ, तुम उसपर ईमान ले आये? वास्तव में, ये षड्यंत्र है, जिसे तुमने नगर में रचा है, ताकि उसके निवासियों को उससे निकाल दो! तो शीघ्र ही तुम्हें इस (के परिणाम) का ज्ञान हो जायेगा।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
لَأُقَطِّعَنَّ أَيۡدِيَكُمۡ وَأَرۡجُلَكُم مِّنۡ خِلَٰفٖ ثُمَّ لَأُصَلِّبَنَّكُمۡ أَجۡمَعِينَ
मैं अवश्य तुम्हारे हाथ तथा पाँव विपरीत दिशाओं में काट दूँगा, फिर तुम सभी को फाँसी पर लटका दूँगा।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالُوٓاْ إِنَّآ إِلَىٰ رَبِّنَا مُنقَلِبُونَ
उन्होंने कहाः हमें अपने पालनहार ही की ओर प्रत्येक दशा में जाना है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَمَا تَنقِمُ مِنَّآ إِلَّآ أَنۡ ءَامَنَّا بِـَٔايَٰتِ رَبِّنَا لَمَّا جَآءَتۡنَاۚ رَبَّنَآ أَفۡرِغۡ عَلَيۡنَا صَبۡرٗا وَتَوَفَّنَا مُسۡلِمِينَ
तू हमसे इसी बात का तो बदला ले रहा है कि हमारे पास हमारे पालनहार की आयतें (निशानियाँ) आ गयीं? तो हम उनपर ईमान ला चुके हैं। हे हमारे पालनहार! हमपर धैर्य (की धारा) उंडेल दे! और हमें इस दशा में (संसार से) उठा कि तेरे आज्ञाकारी रहें।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَقَالَ ٱلۡمَلَأُ مِن قَوۡمِ فِرۡعَوۡنَ أَتَذَرُ مُوسَىٰ وَقَوۡمَهُۥ لِيُفۡسِدُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَيَذَرَكَ وَءَالِهَتَكَۚ قَالَ سَنُقَتِّلُ أَبۡنَآءَهُمۡ وَنَسۡتَحۡيِۦ نِسَآءَهُمۡ وَإِنَّا فَوۡقَهُمۡ قَٰهِرُونَ
और फ़िरऔन की जाति के प्रमुखों ने (उससे) कहाः क्या तुम मूसा और उसकी जाति को छोड़ दोगे कि देश में विद्रोह करें तथा तुम्हें और तुम्हारे पूज्यों[1] को छोड़ दें? उसने कहाः हम उनके पुत्रों को वध कर देंगे और उनकी स्त्रियों को जीवित रहने देंगे, हम उनपर दबाव रखते हैं।
1. कुछ भाष्यकारों ने लिखा है कि मिस्री अनेक देवताओं की पूजा करते थे, जिन में सब से बड़ा देवता सूर्य था, जिसे "रूअ" कहते थे। और राजा को उसी का अवतार मानते थे, और उस की पूजा और उस के लिये सज्दा करते थे, जिस प्रकार अल्लाह के लिये सज्दा किया जाता है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِ ٱسۡتَعِينُواْ بِٱللَّهِ وَٱصۡبِرُوٓاْۖ إِنَّ ٱلۡأَرۡضَ لِلَّهِ يُورِثُهَا مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦۖ وَٱلۡعَٰقِبَةُ لِلۡمُتَّقِينَ
मूसा ने अपनी जाति से कहाः अल्लाह से सहायता माँगो और सहन करो, वास्तव में, धरती अल्लाह की है, वह अपने भक्तों में जिसे चाहे, उसका वारिस (उत्तराधिकारी) बना देता है और अन्त उन्हीं के लिए है, जो आज्ञाकारी हों।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالُوٓاْ أُوذِينَا مِن قَبۡلِ أَن تَأۡتِيَنَا وَمِنۢ بَعۡدِ مَا جِئۡتَنَاۚ قَالَ عَسَىٰ رَبُّكُمۡ أَن يُهۡلِكَ عَدُوَّكُمۡ وَيَسۡتَخۡلِفَكُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَيَنظُرَ كَيۡفَ تَعۡمَلُونَ
उन्होंने कहाः हम तुम्हारे आने से पहले भी सताये गये और तुम्हारे आने के पश्चात् भी (सताये जा रहे हैं)! मूसा ने कहाः समीप है कि तुम्हारा पालनहार तुम्हारे शत्रु का विनाश कर दे और तुम्हें देश में अधिकारी बना दे। फिर देखे कि तुम्हारे कर्म कैसे होते हैं?
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَلَقَدۡ أَخَذۡنَآ ءَالَ فِرۡعَوۡنَ بِٱلسِّنِينَ وَنَقۡصٖ مِّنَ ٱلثَّمَرَٰتِ لَعَلَّهُمۡ يَذَّكَّرُونَ
और हमने फ़िरऔन की जाति को अकालों तथा उपज की कमी में ग्रस्त कर दिया, ताकि वे सावधान हो जायेँ।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

فَإِذَا جَآءَتۡهُمُ ٱلۡحَسَنَةُ قَالُواْ لَنَا هَٰذِهِۦۖ وَإِن تُصِبۡهُمۡ سَيِّئَةٞ يَطَّيَّرُواْ بِمُوسَىٰ وَمَن مَّعَهُۥٓۗ أَلَآ إِنَّمَا طَـٰٓئِرُهُمۡ عِندَ ٱللَّهِ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ
तो जब उनपर सम्पन्नता आती, तो कहते कि हम इसके योग्य हैं और जब अकाल पड़ता, तो मूसा और उसके साथियों से बुरा सगुन लेते। सुन लो! उनका बुरा सगुम तो अल्लाह के पास[1] था, परन्तु अधिक्तर लोग इसका ज्ञान नहीं रखते।
1. अर्थात अल्लाह ने प्रत्येक दशा के लिये एक नियम बना दिया है, जिस के अनुसार कर्मों के परिणाम सामने आते हैं, चाहे वह अशुभ हों या न हों, सब अल्लाह के निर्धारित नियमानुसार होते हैं।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَقَالُواْ مَهۡمَا تَأۡتِنَا بِهِۦ مِنۡ ءَايَةٖ لِّتَسۡحَرَنَا بِهَا فَمَا نَحۡنُ لَكَ بِمُؤۡمِنِينَ
और उन्होंने कहाः तू हमपर जादू करने के लिए कोई भी आयत (चमत्कार) ले आये, हम तेरा विश्वास करने वाले नहीं हैं।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَأَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمُ ٱلطُّوفَانَ وَٱلۡجَرَادَ وَٱلۡقُمَّلَ وَٱلضَّفَادِعَ وَٱلدَّمَ ءَايَٰتٖ مُّفَصَّلَٰتٖ فَٱسۡتَكۡبَرُواْ وَكَانُواْ قَوۡمٗا مُّجۡرِمِينَ
अन्ततः, हमने उनपर तूफ़ान (उग्र वर्षा), टिड्डी दल, जुयें, मेढक और रक्त की वर्षा भेजी। अलग-अलग निशानियाँ; फिर भी उन्होंने अभिमान किया और वे थी ही अपराधी जाति।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَلَمَّا وَقَعَ عَلَيۡهِمُ ٱلرِّجۡزُ قَالُواْ يَٰمُوسَى ٱدۡعُ لَنَا رَبَّكَ بِمَا عَهِدَ عِندَكَۖ لَئِن كَشَفۡتَ عَنَّا ٱلرِّجۡزَ لَنُؤۡمِنَنَّ لَكَ وَلَنُرۡسِلَنَّ مَعَكَ بَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ
और जब उनपर यातना आ पड़ी, तो उन्होंने कहाः हे मूसा! तू अपने पालनहार से उस वचन के कारण, जो उसने तुझे दिया है, हमारे लिए प्रार्थना कर। यदि तूने (अपनी प्रार्थना से) हमसे यातना दूर कर दी, तो हम अवश्य तेरा विश्वास कर लेंगे और बनी इस्राईल को तेरे साथ जाने की अनुमति देंगे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَلَمَّا كَشَفۡنَا عَنۡهُمُ ٱلرِّجۡزَ إِلَىٰٓ أَجَلٍ هُم بَٰلِغُوهُ إِذَا هُمۡ يَنكُثُونَ
फिर जब हमने एक विशेष समय तक के लिए उनसे यातना दूर कर दी, जिस तक उन्हें पहुँचना था, तो अकस्मात् वे वचन भंग करने लगे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
فَٱنتَقَمۡنَا مِنۡهُمۡ فَأَغۡرَقۡنَٰهُمۡ فِي ٱلۡيَمِّ بِأَنَّهُمۡ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَكَانُواْ عَنۡهَا غَٰفِلِينَ
अन्ततः, हमने उनसे बदला लिया और उन्हें सागर में डुबो दिया, इस कारण कि उन्होंने हमारी आयतों (निशानियों) को झुठला दिया और उनसे निश्चेत हो गये। उनके धैर्य रखने के कारण तथा हमने उसे ध्वस्त कर दिया, जो फ़िरऔन और उसकी जाति कलाकारी कर रही थी और जो बेलें छप्परों पर चढ़ रही थीं।[1]
1. अर्थात उन के ऊँचे-ऊँचे भवन तथा सुन्दर बाग़-बग़ीचे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَأَوۡرَثۡنَا ٱلۡقَوۡمَ ٱلَّذِينَ كَانُواْ يُسۡتَضۡعَفُونَ مَشَٰرِقَ ٱلۡأَرۡضِ وَمَغَٰرِبَهَا ٱلَّتِي بَٰرَكۡنَا فِيهَاۖ وَتَمَّتۡ كَلِمَتُ رَبِّكَ ٱلۡحُسۡنَىٰ عَلَىٰ بَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ بِمَا صَبَرُواْۖ وَدَمَّرۡنَا مَا كَانَ يَصۡنَعُ فِرۡعَوۡنُ وَقَوۡمُهُۥ وَمَا كَانُواْ يَعۡرِشُونَ
और हमने उस जाति (बनी इस्राईल) को, जो निर्बल समझे जा रहे थे, धरती (शाम देश) के पश्चिमों तथा पूर्वों का, जिसमें हमने बरकत दी थी, अधिकारी बना दिया और (इस प्रकार हे नबी!) आपके पालनहार का शुभ वचन बनी इस्राईल के लिए पूरा हो गया, उनके धैर्य रखने के कारण तथा हमने उसे धवस्त कर दिया, जो फ़िरऔन और उसकी जाति कलाकारी कर रही थी और जो बेलें छप्परों पर चढ़ा रहे थे[1]।
1. अर्थात उन के ऊँचे-ऊँचे भवन तथा सुन्दर बाग़-बग़ीचे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

وَجَٰوَزۡنَا بِبَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ ٱلۡبَحۡرَ فَأَتَوۡاْ عَلَىٰ قَوۡمٖ يَعۡكُفُونَ عَلَىٰٓ أَصۡنَامٖ لَّهُمۡۚ قَالُواْ يَٰمُوسَى ٱجۡعَل لَّنَآ إِلَٰهٗا كَمَا لَهُمۡ ءَالِهَةٞۚ قَالَ إِنَّكُمۡ قَوۡمٞ تَجۡهَلُونَ
और बनी इस्राईल को हमने सागर पार करा दिया, तो वे एक जाति के पास से होकर गये, जो अपनी मूर्तियों की पूजा कर रही थी, उन्होंने कहाः हे मूसा! हमारे लिए वैसा ही एक पूज्य बना दीजिये, जैसे इनके पूज्य हैं। मूसा ने कहाः वास्तव में, तुम अज्ञान जाति हो।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ مُتَبَّرٞ مَّا هُمۡ فِيهِ وَبَٰطِلٞ مَّا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ
ये लोग जिस रीति में हैं, उसे नाश हो जाना है और वे जो कुछ कर रहे हैं, सर्वथा असत्य है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ أَغَيۡرَ ٱللَّهِ أَبۡغِيكُمۡ إِلَٰهٗا وَهُوَ فَضَّلَكُمۡ عَلَى ٱلۡعَٰلَمِينَ
मूसा ने कहाः क्या मैं अल्लाह के सिवा तुम्हारे लिए कोई दूसरा पूज्य निर्धारित करूँ, जबकि उसने तुम्हें सारे संसारों के वासियों पर प्रधानता दी है?
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَإِذۡ أَنجَيۡنَٰكُم مِّنۡ ءَالِ فِرۡعَوۡنَ يَسُومُونَكُمۡ سُوٓءَ ٱلۡعَذَابِ يُقَتِّلُونَ أَبۡنَآءَكُمۡ وَيَسۡتَحۡيُونَ نِسَآءَكُمۡۚ وَفِي ذَٰلِكُم بَلَآءٞ مِّن رَّبِّكُمۡ عَظِيمٞ
तथा उस समय को याद करो, जब हमने तुम्हें फ़िरऔन की जाति से बचाया। वह तुम्हें घोर यातना दे रहे थे; तुम्हारे पुत्रों को वध कर रहे थे और तुम्हारी स्त्रियों को जीवित रख रहे थे और इसमें तुम्हारे पालनहार की ओर से भारी परीक्षा थी।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
۞وَوَٰعَدۡنَا مُوسَىٰ ثَلَٰثِينَ لَيۡلَةٗ وَأَتۡمَمۡنَٰهَا بِعَشۡرٖ فَتَمَّ مِيقَٰتُ رَبِّهِۦٓ أَرۡبَعِينَ لَيۡلَةٗۚ وَقَالَ مُوسَىٰ لِأَخِيهِ هَٰرُونَ ٱخۡلُفۡنِي فِي قَوۡمِي وَأَصۡلِحۡ وَلَا تَتَّبِعۡ سَبِيلَ ٱلۡمُفۡسِدِينَ
और हमने मूसा को तीस रातों का वचन[1] दिया और उसकी पूर्ती दस रातों से कर दी, तो तेरे पालनहार की निर्धारित अवधि चालीस रात पूरी हो गयी तथा मूसा ने अपने भाई हारून से कहाः तुम मेरी जाति में मेरा प्रतिनिधि रहना, सुधार करते रहना और उपद्रवकारियों की नीति न अपनाना।
1. अर्थात तूर पर्वत पर आ कर अल्लाह की इबादत करने और धर्म विधान प्रदान करने के लिये।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَلَمَّا جَآءَ مُوسَىٰ لِمِيقَٰتِنَا وَكَلَّمَهُۥ رَبُّهُۥ قَالَ رَبِّ أَرِنِيٓ أَنظُرۡ إِلَيۡكَۚ قَالَ لَن تَرَىٰنِي وَلَٰكِنِ ٱنظُرۡ إِلَى ٱلۡجَبَلِ فَإِنِ ٱسۡتَقَرَّ مَكَانَهُۥ فَسَوۡفَ تَرَىٰنِيۚ فَلَمَّا تَجَلَّىٰ رَبُّهُۥ لِلۡجَبَلِ جَعَلَهُۥ دَكّٗا وَخَرَّ مُوسَىٰ صَعِقٗاۚ فَلَمَّآ أَفَاقَ قَالَ سُبۡحَٰنَكَ تُبۡتُ إِلَيۡكَ وَأَنَا۠ أَوَّلُ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ
और जब मूसा हमारे निर्धारित समय पर आ गया और उसके पालनहार ने उससे बात की, तो उसने कहाः हे मेरे पालनहार! मेरे लिए अपने आपको दिखा दे, ताकि मैं तेरा दर्शन कर लूँ। अल्लाहने कहाः तू मेरा दर्शन नहीं कर सकेगा। परन्तु इस पर्वत की ओर देख! यदि ये अपने स्थान पर स्थिर रह गया, तो तू मेरा दर्शन कर सकेगा। फिर जब उसका पालनहार पर्वत की ओर प्रकाशित हुआ, तो उसे चूर-चूर कर दिया और मूसा निश्चेत होकर गिर गया। फिर जब चेतना आयी, तो उसने कहाः तू पवित्र है! मैं तुझसे क्षमा माँगता हूँ। तथा मैं सर्व प्रथम[1] ईमान लाने वालों में से हूँ।
1. इस से प्रत्यक्ष हुआ कि कोई व्यक्ति इस संसार में रहते हुये अल्लाह को नहीं देख सकता और जो ऐसा कहते हैं वह शैतान के बहकावे में हैं। परन्तु सह़ीह़ ह़दीस से सिध्द होता है कि आख़िरत में ईमान वाले अल्लाह का दर्शन करेंगे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

قَالَ يَٰمُوسَىٰٓ إِنِّي ٱصۡطَفَيۡتُكَ عَلَى ٱلنَّاسِ بِرِسَٰلَٰتِي وَبِكَلَٰمِي فَخُذۡ مَآ ءَاتَيۡتُكَ وَكُن مِّنَ ٱلشَّـٰكِرِينَ
अल्लाह ने कहाः हे मूसा! मैंने तुझे लोगों पर प्रधानता देकर अपने संदेशों तथा अपने वार्तालाप द्वारा निर्वाचित कर लिया है। अतः जो कुछ तुझे प्रदान किया है, उसे ग्रहण कर ले और कृतज्ञों में हो जा।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَكَتَبۡنَا لَهُۥ فِي ٱلۡأَلۡوَاحِ مِن كُلِّ شَيۡءٖ مَّوۡعِظَةٗ وَتَفۡصِيلٗا لِّكُلِّ شَيۡءٖ فَخُذۡهَا بِقُوَّةٖ وَأۡمُرۡ قَوۡمَكَ يَأۡخُذُواْ بِأَحۡسَنِهَاۚ سَأُوْرِيكُمۡ دَارَ ٱلۡفَٰسِقِينَ
और हमने उसके लिए तख़्तियों पर (धर्म के) प्रत्येक विषय के लिए निर्देश और प्रत्येक बात का विवरण लिख दिया। (तथा कहा कि) इसे दृढ़ता से पकड़ लो और अपनी जाति को आदेश दो कि उसके उत्तम निर्देशों का पालन करे और मैं तुम्हें अवैज्ञाकरियों का घर दिखा दूँगा।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
سَأَصۡرِفُ عَنۡ ءَايَٰتِيَ ٱلَّذِينَ يَتَكَبَّرُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِ بِغَيۡرِ ٱلۡحَقِّ وَإِن يَرَوۡاْ كُلَّ ءَايَةٖ لَّا يُؤۡمِنُواْ بِهَا وَإِن يَرَوۡاْ سَبِيلَ ٱلرُّشۡدِ لَا يَتَّخِذُوهُ سَبِيلٗا وَإِن يَرَوۡاْ سَبِيلَ ٱلۡغَيِّ يَتَّخِذُوهُ سَبِيلٗاۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمۡ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَكَانُواْ عَنۡهَا غَٰفِلِينَ
मैं उन्हें[1] अपनी आयतों (निशानियों) से फेर[2] दूँगा, जो धरती में अवैध अभिमान करते हैं, यदि वे प्रत्येक आयत (निशानी) देख लें, तब भी उसपर ईमान नहीं लायेंगे; यदि वे सुपथ देखेंगे, तो उसे नहीं अपनायेंगे और यदि कुपथ देख लें, तो उसे अपना लेंगे। ये इस कारण कि उन्होंने हमारी आयतों (निशानियों) को झुठला दिया और उनसे निश्चेत रहे।
1. अर्थात तुम्हें उन पर विजय दूँगा जो अवैज्ञाकारी हैं, जैसे उस समय की अमालिक़ा इत्यादि जातियों पर। 2. अर्थात जो जान-बूझ कर अवैज्ञा करेगा, अल्लाह का नियम यही है कि वह तर्कों तथा प्रकाशों से प्रभावित होने की योग्यता खो देगा। इस का यह अर्थ नहीं कि अल्लाह किसी को अकारण कुपथ पर बाध्य कर देता है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَلِقَآءِ ٱلۡأٓخِرَةِ حَبِطَتۡ أَعۡمَٰلُهُمۡۚ هَلۡ يُجۡزَوۡنَ إِلَّا مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों तथा प्रलोक (में हमसे) मिलने को झुठला दिया, उन्हीं के कर्म व्यर्थ हो गये और उन्हें उसी का बदला मिलेगा, जो कुकर्म वे कर रहे थे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَٱتَّخَذَ قَوۡمُ مُوسَىٰ مِنۢ بَعۡدِهِۦ مِنۡ حُلِيِّهِمۡ عِجۡلٗا جَسَدٗا لَّهُۥ خُوَارٌۚ أَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّهُۥ لَا يُكَلِّمُهُمۡ وَلَا يَهۡدِيهِمۡ سَبِيلًاۘ ٱتَّخَذُوهُ وَكَانُواْ ظَٰلِمِينَ
और मूसा की जाति ने उसके (पर्वत पर जाने के) पश्चात् अपने आभूषणों से एक बछड़े की मूर्ति बना ली, जिससे गाय के डकारने के समान ध्वनि निकलती थी। क्या उन्होंने ये नहीं सोचा कि न तो वह उनसे बात[1] करता है और न किसी प्रकार का मार्गदर्शन देता है? उन्होंने उसे बना लिया तथा वे अत्याचारी थे।
1. अर्थात उस से एक ही प्रकार की ध्वनि क्यों निकलती है। बाबिल और मिस्र में भी प्राचीन युग में गाय-बैल की पूजा हो रही थी। और यदि बाबिल की सभ्यता को प्राचीन मान लिया जाये तो यह विचार दूसरे देशों में वहीं से फैला होगा।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَلَمَّا سُقِطَ فِيٓ أَيۡدِيهِمۡ وَرَأَوۡاْ أَنَّهُمۡ قَدۡ ضَلُّواْ قَالُواْ لَئِن لَّمۡ يَرۡحَمۡنَا رَبُّنَا وَيَغۡفِرۡ لَنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡخَٰسِرِينَ
और जब वे (अपने किये पर) लज्जित हुए और समझ गये कि वे कुपथ हो गये हैं, तो कहने लगेः यदि हमारे पालनहार ने हमपर दया नहीं की और हमें क्षमा नहीं किया, तो हम अवश्य विनाशों में हो जायेंगे।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

وَلَمَّا رَجَعَ مُوسَىٰٓ إِلَىٰ قَوۡمِهِۦ غَضۡبَٰنَ أَسِفٗا قَالَ بِئۡسَمَا خَلَفۡتُمُونِي مِنۢ بَعۡدِيٓۖ أَعَجِلۡتُمۡ أَمۡرَ رَبِّكُمۡۖ وَأَلۡقَى ٱلۡأَلۡوَاحَ وَأَخَذَ بِرَأۡسِ أَخِيهِ يَجُرُّهُۥٓ إِلَيۡهِۚ قَالَ ٱبۡنَ أُمَّ إِنَّ ٱلۡقَوۡمَ ٱسۡتَضۡعَفُونِي وَكَادُواْ يَقۡتُلُونَنِي فَلَا تُشۡمِتۡ بِيَ ٱلۡأَعۡدَآءَ وَلَا تَجۡعَلۡنِي مَعَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ
और जब मूसा अपनी जाति की ओर क्रोध तथा दुःख से भरा हुआ वापस आया, तो उसने कहाः तुमने मेरे पश्चात् मेरा बहुत बुरा प्रतिनिधित्व किया। क्या तुम अपने पालनहार की आज्ञा से पहले ही जल्दी कर[1] गये? तथा उसने लेख तख़्तियाँ डाल दीं तथा अपने भाई (हारून) का सिर पकड़ के अपनी ओर खींचने लगा। उसने कहाः हे मेरे माँ जाये भाई! लोगों ने मुझे निर्बल समझ लिया तथा समीप था कि वे मुझे मार डालें। अतः तू शत्रुओं को मुझपर हँसने का अवसर न दे। मुझे अत्याचारियों का साथी न बना।
1. अर्थात मेरे आने की प्रतीक्षा नहीं की।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
قَالَ رَبِّ ٱغۡفِرۡ لِي وَلِأَخِي وَأَدۡخِلۡنَا فِي رَحۡمَتِكَۖ وَأَنتَ أَرۡحَمُ ٱلرَّـٰحِمِينَ
मूसा ने कहाः[1] हे मेरे पालनहार! मुझे तथा मेरे भाई को क्षमा कर दे और हमें अपनी दया में प्रवेश दे और तू ही सब दयाकारियों से अधिक दयाशील है।
1. अर्थात जब यह सिध्द हो गया कि मेरा भाई निर्देष है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
إِنَّ ٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ ٱلۡعِجۡلَ سَيَنَالُهُمۡ غَضَبٞ مِّن رَّبِّهِمۡ وَذِلَّةٞ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَاۚ وَكَذَٰلِكَ نَجۡزِي ٱلۡمُفۡتَرِينَ
जिन लोगों ने बछड़े को पूज्य बनाया, उनपर उनके पालनहार का प्रकोप आयेगा और वे सांसारिक जीवन में अपमानित होंगे और इसी प्रकार हम झूठ घड़ने वालों को दण्ड देते हैं।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَٱلَّذِينَ عَمِلُواْ ٱلسَّيِّـَٔاتِ ثُمَّ تَابُواْ مِنۢ بَعۡدِهَا وَءَامَنُوٓاْ إِنَّ رَبَّكَ مِنۢ بَعۡدِهَا لَغَفُورٞ رَّحِيمٞ
और जिन लोगों ने दुष्कर्म किया, फिर उसके पश्चात् क्षमा माँग ली और ईमान लाये, तो वास्तव में, तेरा पालनहार अति क्षमाशील दयावान् है।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَلَمَّا سَكَتَ عَن مُّوسَى ٱلۡغَضَبُ أَخَذَ ٱلۡأَلۡوَاحَۖ وَفِي نُسۡخَتِهَا هُدٗى وَرَحۡمَةٞ لِّلَّذِينَ هُمۡ لِرَبِّهِمۡ يَرۡهَبُونَ
फिर जब मूसा का क्रोध शान्त हो गया, तो उसने लेख तख़्तियाँ उठा लीं, जिनके लिखे आदेशों में मार्गदर्शन तथा दया थी, उन लोगों के लिए, जो अपने पालनहार से ही डरते हों।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:
وَٱخۡتَارَ مُوسَىٰ قَوۡمَهُۥ سَبۡعِينَ رَجُلٗا لِّمِيقَٰتِنَاۖ فَلَمَّآ أَخَذَتۡهُمُ ٱلرَّجۡفَةُ قَالَ رَبِّ لَوۡ شِئۡتَ أَهۡلَكۡتَهُم مِّن قَبۡلُ وَإِيَّـٰيَۖ أَتُهۡلِكُنَا بِمَا فَعَلَ ٱلسُّفَهَآءُ مِنَّآۖ إِنۡ هِيَ إِلَّا فِتۡنَتُكَ تُضِلُّ بِهَا مَن تَشَآءُ وَتَهۡدِي مَن تَشَآءُۖ أَنتَ وَلِيُّنَا فَٱغۡفِرۡ لَنَا وَٱرۡحَمۡنَاۖ وَأَنتَ خَيۡرُ ٱلۡغَٰفِرِينَ
और मूसा ने हमारे निर्धारित[1] समय के लिए अपनी जाति के सत्तर व्यक्तियों को चुन लिया और जब उन्हें भूकंप ने घेर[2] लिया, तो मूसा ने कहाः हे मेरे पालनहार! यदि तू चाहता तो इन सबका इससे पहले ही विनाश कर देता और मेरा भी। क्या तू हमारा उस कुकर्म के कारण नाश कर देगा, जो हममें से कुछ निर्बोध कर गये? ये[3] तेरी ओर से केवल एक परीक्षा थी। तू जिसे चाहे, उसके द्वारा कुपथ कर दे और जिसे चाहे, सुपथ दर्शा दे। तू ही हमारा संरक्षक है, अतः हमारे पापों को क्षमा कर दे और हमपर दया कर, तू सर्वोत्तम क्षमावान् है।
1. अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम को आदेश दिया था कि वह तूर पर्वत के पास बछड़े की पूजा से क्षमा याचना के लिये कुछ लोगों को लायें। (इब्ने कसीर) 2. जब वह उस स्थान पर पहुँचे तो उन्हों ने यह माँग की कि हम को हमारी आँखों से अल्लाह को दिखा दे। अन्यथा हम तेरा विश्वास नहीं करेंगे। उस समय उन पर भूकम्प आया। (इब्ने कसीर) 3. अर्थात बछड़े की पूजा।
Arabische Interpretationen von dem heiligen Quran:

۞وَٱكۡتُبۡ لَنَا فِي هَٰذِهِ ٱلدُّنۡيَا حَسَنَةٗ وَفِي ٱلۡأٓخِرَةِ إِنَّا هُدۡنَآ إِلَيۡكَۚ قَالَ عَذَابِيٓ أُصِيبُ بِهِۦ مَنۡ أَشَآءُۖ وَرَحۡمَتِي وَسِعَتۡ كُلَّ شَيۡءٖۚ فَسَأَكۡتُبُهَا لِلَّذِينَ يَتَّقُونَ وَيُؤۡتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَٱلَّذِينَ هُم بِـَٔايَٰتِنَا يُؤۡمِنُونَ
और हमारे लिए इस संसार में भलाई लिख दे तथा परलोक में भी, हम तेरी ओर लौट आये। उस (अल्लाह) ने कहाः मैं अपनी यातना जिसे चाहता हूँ, देता हूँ। और मेरी दया प्रत्येक चीज़ को समोये हुए है। मैं उसे उन लोगों के लिए लिख दूँगा, जो अवज्ञा से बचेंगे, ज़कात देंगे और जो हमारी आयतों पर ईमान लायेंगे।