আল-কোৰআনুল কাৰীমৰ অৰ্থানুবাদ - মাৰাঠী অনুবাদ * - অনুবাদসমূহৰ সূচীপত্ৰ


অৰ্থানুবাদ আয়াত: (43) ছুৰা: ছুৰা আন-নাহল
وَمَاۤ اَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ اِلَّا رِجَالًا نُّوْحِیْۤ اِلَیْهِمْ فَسْـَٔلُوْۤا اَهْلَ الذِّكْرِ اِنْ كُنْتُمْ لَا تَعْلَمُوْنَ ۟ۙ
४३. आणि तुमच्या पूर्वीही आम्ही पुरुषांनाच (पैगंबर म्हणून) पाठवित राहिलो, ज्यांच्याकडे वहयी (प्रकाशना) अवतरित करीत होतो. जर तुम्ही जाणत नसाल तर ज्ञानी लोकांना विचारा.१
(१) मूळ शब्द ‘अहलज्जिक्री’ यास अभिप्रेत ग्रंथधारक होत जे पूर्वीच्या पैगंबरांना आणि त्यांच्या इतिहासाला जाणून होते अर्थात हे की आम्ही जेवढे पैगंबर पाठविले, ते मानवच होते. यास्तव मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम देखील जर मानव आहेत तर ही नवीन गोष्ट नाही की त्यामुळे तुम्ही त्यांच्या पैगंबर असण्याचा इन्कार करावा. शंका असेल तर ग्रंथधारकांना विचारा की पूर्वीच्या काळातील सर्व पैगंबर मानव होते की फरिश्ते? जर ते फरिश्ते होते तर अवश्य इन्कार करा आणि जर ते सर्व मानव होते तर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांच्या पैगंबरपदाचा इन्कार कोणत्या सबबीवर?
আৰবী তাফছীৰসমূহ:
 
অৰ্থানুবাদ আয়াত: (43) ছুৰা: ছুৰা আন-নাহল
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আল-কোৰআনুল কাৰীমৰ অৰ্থানুবাদ - মাৰাঠী অনুবাদ - অনুবাদসমূহৰ সূচীপত্ৰ

মাৰাঠী ভাষাত আল-কোৰআনুল কাৰীমৰ অৰ্থানুবাদ। অনুবাদ কৰিছে মুহাম্মদ শ্বফী আনচাৰী চাহাবে। প্ৰকাশ কৰিছে আল-বিৰ ফাউণ্ডেচন মুম্বাই।

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