Translation of the Meanings of the Noble Qur'an - Indian Translation * - Translations’ Index

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Translation of the meanings Surah: An-Naml
Ayah:
 

सूरा अन्-नम्ल

طسٓۚ تِلۡكَ ءَايَٰتُ ٱلۡقُرۡءَانِ وَكِتَابٖ مُّبِينٍ
ता, सीन, मीम। ये क़ुर्आन तथा प्रत्यक्ष पुस्तक की आयतें हैं।
Arabic explanations of the Qur’an:
هُدٗى وَبُشۡرَىٰ لِلۡمُؤۡمِنِينَ
मार्गदर्शन तथा शुभ सूचना है, उन ईमान वालों के लिए।
Arabic explanations of the Qur’an:
ٱلَّذِينَ يُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُؤۡتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَهُم بِٱلۡأٓخِرَةِ هُمۡ يُوقِنُونَ
जो नमाज़ की स्थापना करते तथा ज़कात देते हैं और वही हैं, जो अन्तिम दिन (परलोक) पर विश्वास रखते हैं।
Arabic explanations of the Qur’an:
إِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِ زَيَّنَّا لَهُمۡ أَعۡمَٰلَهُمۡ فَهُمۡ يَعۡمَهُونَ
वास्तव में, जो विश्वास नहीं करते परलोक पर, हमने शोभनीय बना दिया है उनके कर्मों को, इसलिए वे बहके जा रहे हैं।
Arabic explanations of the Qur’an:
أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ لَهُمۡ سُوٓءُ ٱلۡعَذَابِ وَهُمۡ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ هُمُ ٱلۡأَخۡسَرُونَ
यही हैं, जिनके लिए बुरी यातना है तथा परलोक में यही सर्वाधिक क्षतिग्रस्त रहने वाले हैं।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَإِنَّكَ لَتُلَقَّى ٱلۡقُرۡءَانَ مِن لَّدُنۡ حَكِيمٍ عَلِيمٍ
और (हे नबी!) वास्तव में, आपको दिया जा रहा है क़ुर्आन एक तत्वज्ञ, सर्वज्ञ की ओर से।
Arabic explanations of the Qur’an:
إِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِأَهۡلِهِۦٓ إِنِّيٓ ءَانَسۡتُ نَارٗا سَـَٔاتِيكُم مِّنۡهَا بِخَبَرٍ أَوۡ ءَاتِيكُم بِشِهَابٖ قَبَسٖ لَّعَلَّكُمۡ تَصۡطَلُونَ
(याद करो) जब कहा[1] मूसा ने अपने परिजनों सेः मैंने आग देखी है, मैं तुम्हारे पास कोई सूचना लाऊँगा या लाऊँगा आग का कोई अंगार, ताकि तुम तापो।
1. यह उस समय की बात है जब मूसा (अलैहिस्सलाम) मद्यन से आ रहे थे। रात्रि के समय वह मार्ग भूल गये। और शीत से बचाव के लिये आग की आवश्यक्ता थी।
Arabic explanations of the Qur’an:
فَلَمَّا جَآءَهَا نُودِيَ أَنۢ بُورِكَ مَن فِي ٱلنَّارِ وَمَنۡ حَوۡلَهَا وَسُبۡحَٰنَ ٱللَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ
फिर जब आया वहाँ, तो पुकारा गयाः शुभ है वह, जो अग्नि में है और जो उसके आस-पास है और पवित्र है अल्लाह, सर्वलोक का पालनहार।
Arabic explanations of the Qur’an:
يَٰمُوسَىٰٓ إِنَّهُۥٓ أَنَا ٱللَّهُ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ
हे मूसा! ये मैं हूँ, अल्लाह, अति प्रभुत्वशाली, तत्वज्ञ।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَأَلۡقِ عَصَاكَۚ فَلَمَّا رَءَاهَا تَهۡتَزُّ كَأَنَّهَا جَآنّٞ وَلَّىٰ مُدۡبِرٗا وَلَمۡ يُعَقِّبۡۚ يَٰمُوسَىٰ لَا تَخَفۡ إِنِّي لَا يَخَافُ لَدَيَّ ٱلۡمُرۡسَلُونَ
और फेंक दे अपनी लाठी, फिर जब उसे देखा कि रेंग रही है, जैसे वह कोई सर्प हो, तो पीठ फेरकर भागा और पीछे फिरकर देखा भी नहीं। (हमने कहाः) हे मूसा! भय न कर, वास्तव में, नहीं भय करते मेरे पास रसूल।
Arabic explanations of the Qur’an:
إِلَّا مَن ظَلَمَ ثُمَّ بَدَّلَ حُسۡنَۢا بَعۡدَ سُوٓءٖ فَإِنِّي غَفُورٞ رَّحِيمٞ
उसके सिवा, जिसने अत्याचार किया हो, फिर जिसने बदल लिया अपना कर्म भलाई से बुराई के पश्चात्, तो निश्चय, मैं अति क्षमि, दयावान् हूँ।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَأَدۡخِلۡ يَدَكَ فِي جَيۡبِكَ تَخۡرُجۡ بَيۡضَآءَ مِنۡ غَيۡرِ سُوٓءٖۖ فِي تِسۡعِ ءَايَٰتٍ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ وَقَوۡمِهِۦٓۚ إِنَّهُمۡ كَانُواْ قَوۡمٗا فَٰسِقِينَ
और डाल दे अपना हाथ अपनी जेब में, वह निकलेगा उज्ज्वल होकर बिना किसी रोग के; नौ निशानियों में से है, फ़िरऔन तथा उसकी जाति की ओर (ले जाने के लिए) वास्तव में, वे उल्लंघनकारियों में हैं।
Arabic explanations of the Qur’an:
فَلَمَّا جَآءَتۡهُمۡ ءَايَٰتُنَا مُبۡصِرَةٗ قَالُواْ هَٰذَا سِحۡرٞ مُّبِينٞ
फिर जब आयीं उनके पास हमारी निशानियाँ, आँख खोलने वाली, तो कह दिया कि ये तो खुला जादू है।
Arabic explanations of the Qur’an:

وَجَحَدُواْ بِهَا وَٱسۡتَيۡقَنَتۡهَآ أَنفُسُهُمۡ ظُلۡمٗا وَعُلُوّٗاۚ فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُفۡسِدِينَ
तथा उन्होंने नकार दिया उन्हें, अत्याचार तथा अभिमान के कारण, जबकि उनके दिलों ने उनका विश्वास कर लिया, तो देखो कि कैसा रहा उपद्रवियों का परिणाम?
Arabic explanations of the Qur’an:
وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا دَاوُۥدَ وَسُلَيۡمَٰنَ عِلۡمٗاۖ وَقَالَا ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي فَضَّلَنَا عَلَىٰ كَثِيرٖ مِّنۡ عِبَادِهِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ
और हमने प्रदान किया दावूद तथा सुलैमान को ज्ञान[1] और दोनों ने कहाः प्रशंसा है, उस अल्लाह के लिए, जिसने हमें प्रधानता दी अपने बहुत-से ईमान वाले भक्तों पर।
1. अर्थात विशेष ज्ञान जो नबूवत का ज्ञान है जैसे मूसा अलैहिस्सलाम को प्रदान किया और इसी प्रकार अन्तिम रसूल मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को इस क़ुर्आन द्वारा प्रदान किया है।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَوَرِثَ سُلَيۡمَٰنُ دَاوُۥدَۖ وَقَالَ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ عُلِّمۡنَا مَنطِقَ ٱلطَّيۡرِ وَأُوتِينَا مِن كُلِّ شَيۡءٍۖ إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلۡفَضۡلُ ٱلۡمُبِينُ
और उत्तराधिकारी हुआ सुलैमान दावूद का तथा उसने कहाः हे लोगो! हमें सिखाई गयी है पक्षियों की बोली तथा हमें प्रदान की गयी है, सब चीज़ से कुछ। वास्तव में, ये प्रत्यक्ष अनुग्रह है।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَحُشِرَ لِسُلَيۡمَٰنَ جُنُودُهُۥ مِنَ ٱلۡجِنِّ وَٱلۡإِنسِ وَٱلطَّيۡرِ فَهُمۡ يُوزَعُونَ
तथा एकत्र कर दी गयी सुलैमान के लिए उसकी सेनायें; जिन्नों तथा मानवों और पक्षी की और वे व्यवस्थित रखे जाते थे।
Arabic explanations of the Qur’an:
حَتَّىٰٓ إِذَآ أَتَوۡاْ عَلَىٰ وَادِ ٱلنَّمۡلِ قَالَتۡ نَمۡلَةٞ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّمۡلُ ٱدۡخُلُواْ مَسَٰكِنَكُمۡ لَا يَحۡطِمَنَّكُمۡ سُلَيۡمَٰنُ وَجُنُودُهُۥ وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ
यहाँ तक कि वे (एक बार) जब पहुँचे च्युंटियों की घाटी पर, तो एक च्युंटी ने कहाः हे च्युटियो! प्रवेश कर जाओ अपने घरों में, ऐसा न हो कि तुम्हें कुचल दे सुलैमान तथा उसकी सेनायें और उन्हें ज्ञान न हो।
Arabic explanations of the Qur’an:
فَتَبَسَّمَ ضَاحِكٗا مِّن قَوۡلِهَا وَقَالَ رَبِّ أَوۡزِعۡنِيٓ أَنۡ أَشۡكُرَ نِعۡمَتَكَ ٱلَّتِيٓ أَنۡعَمۡتَ عَلَيَّ وَعَلَىٰ وَٰلِدَيَّ وَأَنۡ أَعۡمَلَ صَٰلِحٗا تَرۡضَىٰهُ وَأَدۡخِلۡنِي بِرَحۡمَتِكَ فِي عِبَادِكَ ٱلصَّـٰلِحِينَ
तो वह (सुलैमान) मुस्कुराकर हँस पड़ा उसकी बात पर और कहाः हे मेरे पालनहार! मुझे क्षमता प्रदानकर कि मैं कृतज्ञ रहूँ तेरे उस पुरस्कार का, जो पुरस्कार तूने मुझपर तथा मेरे माता-पिता पर किया है तथा ये कि मैं सदाचार करता रहूँ, जिससे तू प्रसन्न रहे और मुझे प्रवेश दे अपनी दया से, अपने सदाचारी भक्तों में।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَتَفَقَّدَ ٱلطَّيۡرَ فَقَالَ مَالِيَ لَآ أَرَى ٱلۡهُدۡهُدَ أَمۡ كَانَ مِنَ ٱلۡغَآئِبِينَ
और उसने निरीक्षण किया पक्षियों का, तो कहाः क्या बात है कि मैं नहीं देख रहा हूँ हुदहुद को या वह अनुपस्थितों में है?
Arabic explanations of the Qur’an:
لَأُعَذِّبَنَّهُۥ عَذَابٗا شَدِيدًا أَوۡ لَأَاْذۡبَحَنَّهُۥٓ أَوۡ لَيَأۡتِيَنِّي بِسُلۡطَٰنٖ مُّبِينٖ
मैं उसे कड़ी यातना दूँगा या उसे वध कर दूँगा या मेरे पास कोई खुला प्रमाण लाये।
Arabic explanations of the Qur’an:
فَمَكَثَ غَيۡرَ بَعِيدٖ فَقَالَ أَحَطتُ بِمَا لَمۡ تُحِطۡ بِهِۦ وَجِئۡتُكَ مِن سَبَإِۭ بِنَبَإٖ يَقِينٍ
तो कुछ अधिक समय नहीं बीता कि उसने (आकर) कहाः मैंने ऐसी बात का ज्ञान प्राप्त किया है, जो आपके ज्ञान में नहीं आयी है और मैं लाया हूँ, आपके पास "सबा"[1] से एक विश्वसनीय सूचना।
1. सबा यमन का एक नगर है।
Arabic explanations of the Qur’an:

إِنِّي وَجَدتُّ ٱمۡرَأَةٗ تَمۡلِكُهُمۡ وَأُوتِيَتۡ مِن كُلِّ شَيۡءٖ وَلَهَا عَرۡشٌ عَظِيمٞ
मैंने एक स्त्री को पाया, जो उनपर राज्य कर रही है और उसे प्रदान किया गया है कुछ न कुछ प्रत्येक वस्तु से तथा उसके पास एक बड़ा भव्य सिंहासन है।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَجَدتُّهَا وَقَوۡمَهَا يَسۡجُدُونَ لِلشَّمۡسِ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَزَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيۡطَٰنُ أَعۡمَٰلَهُمۡ فَصَدَّهُمۡ عَنِ ٱلسَّبِيلِ فَهُمۡ لَا يَهۡتَدُونَ
मैंने उसे तथा उसकी जाति को पाया कि सज्दा करते हैं सूर्य को अल्लाह के सिवा और शोभनीय बना दिया है, उनके लिए शैतान ने उनके कर्मों को और उन्हें रोक दिया है सुपथ से, अतः, वे सुपथ पर नहीं आते।
Arabic explanations of the Qur’an:
أَلَّاۤ يَسۡجُدُواْۤ لِلَّهِ ٱلَّذِي يُخۡرِجُ ٱلۡخَبۡءَ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَيَعۡلَمُ مَا تُخۡفُونَ وَمَا تُعۡلِنُونَ
(शैतान ने शोभनीय बना दिया है उनके लिए) कि उस अल्लाह को सज्दा न करें, जो निकालता है गुप्त वस्तु को[1] आकाशों तथा धरती में तथा जानता है वह सब कुछ, जिसे तुम छुपाते हो तथा जिसे व्यक्त करते हो।
1. अर्थात वर्षा तथा पौधों को।
Arabic explanations of the Qur’an:
ٱللَّهُ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ ٱلۡعَرۡشِ ٱلۡعَظِيمِ۩
अल्लाह जिसके अतिरिक्त कोई वंदनीय नहीं, जो महा सिंहासन का स्वामी है।
Arabic explanations of the Qur’an:
۞قَالَ سَنَنظُرُ أَصَدَقۡتَ أَمۡ كُنتَ مِنَ ٱلۡكَٰذِبِينَ
(सुलैमान ने) कहाः हम देखेंगे कि तू सत्यवादी है अथवा मिथ्यावादियों में से है।
Arabic explanations of the Qur’an:
ٱذۡهَب بِّكِتَٰبِي هَٰذَا فَأَلۡقِهۡ إِلَيۡهِمۡ ثُمَّ تَوَلَّ عَنۡهُمۡ فَٱنظُرۡ مَاذَا يَرۡجِعُونَ
जाओ, ये मेरा पत्र लेकर और इसे डाल दो उनकी ओर, फिर वापस आ जाओ उनके पास से, फिर देखो कि वे क्या उत्तर देते हैं?
Arabic explanations of the Qur’an:
قَالَتۡ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلۡمَلَؤُاْ إِنِّيٓ أُلۡقِيَ إِلَيَّ كِتَٰبٞ كَرِيمٌ
उसने कहाः हे प्रमुखो! मेरी ओर एक महत्वपूरण पत्र डाला गया है।
Arabic explanations of the Qur’an:
إِنَّهُۥ مِن سُلَيۡمَٰنَ وَإِنَّهُۥ بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
वह सुलैमान की ओर से है और वह अत्यंत कृपाशील दयावान् के नाम से (आरंभ) है।
Arabic explanations of the Qur’an:
أَلَّا تَعۡلُواْ عَلَيَّ وَأۡتُونِي مُسۡلِمِينَ
(उसमें लिखा है) कि तुम मुझपर अभिमान न करो तथा आ जाओ मेरे पास, आज्ञाकारी होकर।
Arabic explanations of the Qur’an:
قَالَتۡ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلۡمَلَؤُاْ أَفۡتُونِي فِيٓ أَمۡرِي مَا كُنتُ قَاطِعَةً أَمۡرًا حَتَّىٰ تَشۡهَدُونِ
उसने कहाः हे प्रमुखो! मुझे प्रामर्श दो मेरे विषय में, मैं कोई निर्णय करने वाला नहीं हूँ, जब तक तुम उपस्थित न रहो।
Arabic explanations of the Qur’an:
قَالُواْ نَحۡنُ أُوْلُواْ قُوَّةٖ وَأُوْلُواْ بَأۡسٖ شَدِيدٖ وَٱلۡأَمۡرُ إِلَيۡكِ فَٱنظُرِي مَاذَا تَأۡمُرِينَ
सबने उत्तर दिया कि हम शक्तिशाली तथा बड़े याध्दा हैं, आप स्वयं देख लें कि आपको क्या आदेश देना है।
Arabic explanations of the Qur’an:
قَالَتۡ إِنَّ ٱلۡمُلُوكَ إِذَا دَخَلُواْ قَرۡيَةً أَفۡسَدُوهَا وَجَعَلُوٓاْ أَعِزَّةَ أَهۡلِهَآ أَذِلَّةٗۚ وَكَذَٰلِكَ يَفۡعَلُونَ
उसने कहाः राजा जब प्रवेश करते हैं, किसी बस्ती में, तो उसे उजाड़ देते हैं और उसके आदरणीय वासियों को अपमानित बना देते हैं और वे ऐसा ही करेंगे।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَإِنِّي مُرۡسِلَةٌ إِلَيۡهِم بِهَدِيَّةٖ فَنَاظِرَةُۢ بِمَ يَرۡجِعُ ٱلۡمُرۡسَلُونَ
और मैं भेजने वाली हूँ उनकी ओर एक उपहार, फिर देखती हूँ कि क्या लेकर आते हैं दूत?
Arabic explanations of the Qur’an:

فَلَمَّا جَآءَ سُلَيۡمَٰنَ قَالَ أَتُمِدُّونَنِ بِمَالٖ فَمَآ ءَاتَىٰنِۦَ ٱللَّهُ خَيۡرٞ مِّمَّآ ءَاتَىٰكُمۚ بَلۡ أَنتُم بِهَدِيَّتِكُمۡ تَفۡرَحُونَ
तो जब वह (दूत) आया सुलैमान के पास, तो कहाः क्या तुम मेरी सहायता धन से करते हो? मुझे अल्लाह ने जो दिया है, उससे उत्तम है, जो तुम्हें दिया है, बल्कि तुम्हीं अपने उपहार से प्रसन्न हो रहे हो।
Arabic explanations of the Qur’an:
ٱرۡجِعۡ إِلَيۡهِمۡ فَلَنَأۡتِيَنَّهُم بِجُنُودٖ لَّا قِبَلَ لَهُم بِهَا وَلَنُخۡرِجَنَّهُم مِّنۡهَآ أَذِلَّةٗ وَهُمۡ صَٰغِرُونَ
वापस हो जाओ उनकी ओर, हम लायेंगे उनके पास ऐसी सेनाएँ, जिनका वे सामना नहीं कर सकेंगे और हम अवश्य उन्हें उस (बस्ती) से निकाल देंगे, अपमानित करके और वे तुच्छ (हीन) होकर रहेंगे।
Arabic explanations of the Qur’an:
قَالَ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلۡمَلَؤُاْ أَيُّكُمۡ يَأۡتِينِي بِعَرۡشِهَا قَبۡلَ أَن يَأۡتُونِي مُسۡلِمِينَ
सुलैमान ने कहाः हे प्रमुखो! तुममें से कौन लायेगा[1] उसका सिंहासन, इससे पहले कि वह आ जाये, आज्ञाकारा होकर।
1. जब सुलैमान ने उपहार वापिस कर दिया और धमकी दी तो रानी ने स्वयं सुलैमान (अलैहिस्सलाम) की सेवा में उपस्थित होना उचित समझा। और उपने सेवकों के साथ फ़लस्तीन के लिये प्रस्थान किया, उस समय उन्हों ने राज्यसदस्यों से यह बात कही।
Arabic explanations of the Qur’an:
قَالَ عِفۡرِيتٞ مِّنَ ٱلۡجِنِّ أَنَا۠ ءَاتِيكَ بِهِۦ قَبۡلَ أَن تَقُومَ مِن مَّقَامِكَۖ وَإِنِّي عَلَيۡهِ لَقَوِيٌّ أَمِينٞ
कहा एक अतिकाय ने, जिन्नों में सेः मैं ला दूँगा, आपके पास उसे, इससे पूर्व कि आप खड़े हों अपने स्थान से और इसपर मुझे शक्ति है, मैं विश्वसनीय हूँ।
Arabic explanations of the Qur’an:
قَالَ ٱلَّذِي عِندَهُۥ عِلۡمٞ مِّنَ ٱلۡكِتَٰبِ أَنَا۠ ءَاتِيكَ بِهِۦ قَبۡلَ أَن يَرۡتَدَّ إِلَيۡكَ طَرۡفُكَۚ فَلَمَّا رَءَاهُ مُسۡتَقِرًّا عِندَهُۥ قَالَ هَٰذَا مِن فَضۡلِ رَبِّي لِيَبۡلُوَنِيٓ ءَأَشۡكُرُ أَمۡ أَكۡفُرُۖ وَمَن شَكَرَ فَإِنَّمَا يَشۡكُرُ لِنَفۡسِهِۦۖ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ رَبِّي غَنِيّٞ كَرِيمٞ
कहा उसने, जिसके पास पुस्तक का ज्ञान थाः मैं ले आऊँगा उसे, आपके पास इससे पहले कि आपकी पलक झपके और जब देखा उसने उसे, अपने पास रखा हुआ, तो कहाः ये मेरे पालनहार का अनुग्रह है, ताकि मेरी परीक्षा ले कि मैं कृतज्ञता दिखाता हूँ या कृतघ्नता और जो कृतज्ञ होता है, वह अपने लाभ के लिए होता है तथा जो कृतघ्न हो, तो निश्चय मेरा पालनहार निस्पृह, महान है।
Arabic explanations of the Qur’an:
قَالَ نَكِّرُواْ لَهَا عَرۡشَهَا نَنظُرۡ أَتَهۡتَدِيٓ أَمۡ تَكُونُ مِنَ ٱلَّذِينَ لَا يَهۡتَدُونَ
कहाः परिवर्तन कर दो उसके लिए उसके सिंहासन में, हम देखेंगे कि वह उसे पहचान जाती है या उनमें से हो जाती है, जो पहचानते न हों।
Arabic explanations of the Qur’an:
فَلَمَّا جَآءَتۡ قِيلَ أَهَٰكَذَا عَرۡشُكِۖ قَالَتۡ كَأَنَّهُۥ هُوَۚ وَأُوتِينَا ٱلۡعِلۡمَ مِن قَبۡلِهَا وَكُنَّا مُسۡلِمِينَ
तो जब वह आई, तो कहा गयाः क्या ऐसा ही तेरा सिंहासन है? उसने कहाः वह तो मानो वही है और हम तो जान गये थे इससे पहले ही और आज्ञाकारी हो गये थे।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَصَدَّهَا مَا كَانَت تَّعۡبُدُ مِن دُونِ ٱللَّهِۖ إِنَّهَا كَانَتۡ مِن قَوۡمٖ كَٰفِرِينَ
और रोक रखा था उसे (ईमान से) उन (पूज्यों) ने जिनकी वह इबादत ( वंदना) कर रही थी अल्लाह के सिवा। निश्चय वह काफ़िरों की जाति में से थी।
Arabic explanations of the Qur’an:
قِيلَ لَهَا ٱدۡخُلِي ٱلصَّرۡحَۖ فَلَمَّا رَأَتۡهُ حَسِبَتۡهُ لُجَّةٗ وَكَشَفَتۡ عَن سَاقَيۡهَاۚ قَالَ إِنَّهُۥ صَرۡحٞ مُّمَرَّدٞ مِّن قَوَارِيرَۗ قَالَتۡ رَبِّ إِنِّي ظَلَمۡتُ نَفۡسِي وَأَسۡلَمۡتُ مَعَ سُلَيۡمَٰنَ لِلَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ
उससे कहा गया कि भवन में प्रवेश कर। तो जब उसे देखा, तो उसे कोई जलाशय (हौद) समझी और खोल दीं[1] अपनी दोनों पिंडलियाँ, (सुलैमान ने) कहाः ये शीशे से निर्मित भवन है। उसने कहाः मेरे पालनहार! मैंने अत्याचार किया अपने प्राण[2] पर और (अब) मैं इस्लाम लाई सुलैमान के साथ अल्लाह सर्वलोक के पालनहार के लिए।
1. पानी से बचाव के लिये कपड़े पाईंचे ऊपर कर लिये। 2. अर्थात अन्य की पूजा-उपासना कर के।
Arabic explanations of the Qur’an:

وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَآ إِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمۡ صَٰلِحًا أَنِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ فَإِذَا هُمۡ فَرِيقَانِ يَخۡتَصِمُونَ
और हमने भेजा समूद की ओर उनके भाई सालेह़ को कि तुम सब इबादत (वंदना) करो अल्लाह की, तो अकस्मात् वे दो गिरोह होकर लड़ने लगे।
Arabic explanations of the Qur’an:
قَالَ يَٰقَوۡمِ لِمَ تَسۡتَعۡجِلُونَ بِٱلسَّيِّئَةِ قَبۡلَ ٱلۡحَسَنَةِۖ لَوۡلَا تَسۡتَغۡفِرُونَ ٱللَّهَ لَعَلَّكُمۡ تُرۡحَمُونَ
उसने कहाः हे मेरी जाति! क्यों तुम शीघ्र चाहते हो बुराई को[1] भलाई से पहले? क्यों तुम क्षमा नहीं माँगते अल्लाह से, ताकि तुमपर दया की जाये?
1. अर्थात ईमान लाने के बजाय इन्कार क्यों कर रहे हो?
Arabic explanations of the Qur’an:
قَالُواْ ٱطَّيَّرۡنَا بِكَ وَبِمَن مَّعَكَۚ قَالَ طَـٰٓئِرُكُمۡ عِندَ ٱللَّهِۖ بَلۡ أَنتُمۡ قَوۡمٞ تُفۡتَنُونَ
उन्होंने कहाः हमने अपशकुन लिया है तुमसे तथा उनसे, जो तेरे साथ हैं। (सालेह़ ने) कहाः तुम्हारा अपशकुन अल्लाह के पास[1] है, बल्कि तुम लोगों की परीक्षा हो रही है।
1. अर्थात तुम पर जो अकाल पड़ा है वह अल्लाह की ओर से है जिसे तुम्हारे कुकर्मों के कारण अल्लाह ने तुम्हारे भाग्य में लिख दिया है। और यह अशुभ मेरे कारण नहीं बल्कि तुम्हारे कुफ़्र के कारण है। (फ़त्ह़ुल क़दीर)
Arabic explanations of the Qur’an:
وَكَانَ فِي ٱلۡمَدِينَةِ تِسۡعَةُ رَهۡطٖ يُفۡسِدُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا يُصۡلِحُونَ
और उस नगर में नौ व्यक्तियों का एक गिरोह था, जो उपद्रव करते थे धरती में और सुधार नहीं करते थे।
Arabic explanations of the Qur’an:
قَالُواْ تَقَاسَمُواْ بِٱللَّهِ لَنُبَيِّتَنَّهُۥ وَأَهۡلَهُۥ ثُمَّ لَنَقُولَنَّ لِوَلِيِّهِۦ مَا شَهِدۡنَا مَهۡلِكَ أَهۡلِهِۦ وَإِنَّا لَصَٰدِقُونَ
उन्होंने कहाः आपस में शपथ लो अल्लाह की कि हम अवश्य रात्रि में छापा मार देंगे सालेह़ तथा उसके परिवार पर, फिर कहेंगे उस (सालेह़) के उत्तराधिकारी से, हम उपस्थित नहीं थे, उसके परिवार के विनाश के समय और निःसंदेह, हम सत्यवादी ( सच्चे) हैं।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَمَكَرُواْ مَكۡرٗا وَمَكَرۡنَا مَكۡرٗا وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ
और उन्होंने एक षड्यंत्र रचा और हमने भी एक उपाय किया और वे समझ नहीं रहे थे।
Arabic explanations of the Qur’an:
فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ مَكۡرِهِمۡ أَنَّا دَمَّرۡنَٰهُمۡ وَقَوۡمَهُمۡ أَجۡمَعِينَ
तो देखो कैसा रहा उनके षड्यंत्र का परिणाम? हमने विनाश कर दिया उनका तथा उनकी पूरी जाति का।
Arabic explanations of the Qur’an:
فَتِلۡكَ بُيُوتُهُمۡ خَاوِيَةَۢ بِمَا ظَلَمُوٓاْۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّقَوۡمٖ يَعۡلَمُونَ
तो ये उनके घर हैं, उजाड़ पड़े हुए, उनके अत्याचार के कारण, निश्चय इसमें एक बड़ी निशानी है, उन लोगों के लिए, जो ज्ञान रखते हैं।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَأَنجَيۡنَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَكَانُواْ يَتَّقُونَ
तथा हमने बचा लिया उन्हे, जो ईमान लाये और (अल्लाह) से डर रहे थे।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَلُوطًا إِذۡ قَالَ لِقَوۡمِهِۦٓ أَتَأۡتُونَ ٱلۡفَٰحِشَةَ وَأَنتُمۡ تُبۡصِرُونَ
तथा लूत को (भेजा), जब उसने अपनी जाति से कहाः क्या तुम कुकर्म कर रहे हो, जबकि तुम[1] आँखें रखते हो?
1. (देखियेः सूरह आराफ़ः84, और सूरह हूदः82-83)। इस्लाम में स्त्री से भी अस्वभाविक संभोग वर्जित है। (सुनन नसाई ह़दीस संख्याः8985, और सुनन इब्ने माजा ह़दीस संख्याः1924)
Arabic explanations of the Qur’an:
أَئِنَّكُمۡ لَتَأۡتُونَ ٱلرِّجَالَ شَهۡوَةٗ مِّن دُونِ ٱلنِّسَآءِۚ بَلۡ أَنتُمۡ قَوۡمٞ تَجۡهَلُونَ
क्या तुम पुरुषों के पास जाते हो, काम वासना की पूर्ति के लिए? तुम लोग बड़े नासमझ हो।
Arabic explanations of the Qur’an:

۞فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوۡمِهِۦٓ إِلَّآ أَن قَالُوٓاْ أَخۡرِجُوٓاْ ءَالَ لُوطٖ مِّن قَرۡيَتِكُمۡۖ إِنَّهُمۡ أُنَاسٞ يَتَطَهَّرُونَ
तो उसकी जाति का उत्तर बस ये था कि उन्होंने कहाः लूत के परिजनों को निकाल दो अपने नगर से, वास्तव में, ये लोग बड़े पवित्र बन रहे हैं।
Arabic explanations of the Qur’an:
فَأَنجَيۡنَٰهُ وَأَهۡلَهُۥٓ إِلَّا ٱمۡرَأَتَهُۥ قَدَّرۡنَٰهَا مِنَ ٱلۡغَٰبِرِينَ
तो हमने बचा लिया उसे तथा उसके परिवार को, उसकी पत्नी के सिवा, जिसे हमने नियत कर दिया पीछे रह जाने वालों में।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَأَمۡطَرۡنَا عَلَيۡهِم مَّطَرٗاۖ فَسَآءَ مَطَرُ ٱلۡمُنذَرِينَ
और हमने उनपर बहुत अधिक वर्षा कर दी। तो बुरी हो गयी सावधान किये हुए लोगों की वर्षा।
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قُلِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ وَسَلَٰمٌ عَلَىٰ عِبَادِهِ ٱلَّذِينَ ٱصۡطَفَىٰٓۗ ءَآللَّهُ خَيۡرٌ أَمَّا يُشۡرِكُونَ
आप कह दें: सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है और सलाम है उसके उन भक्तों पर, जिन्हें उसने चुन लिया। क्या अल्लाह उत्तम है या वह, जिसे वे साझी बनाते हैं?
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أَمَّنۡ خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَنۢبَتۡنَا بِهِۦ حَدَآئِقَ ذَاتَ بَهۡجَةٖ مَّا كَانَ لَكُمۡ أَن تُنۢبِتُواْ شَجَرَهَآۗ أَءِلَٰهٞ مَّعَ ٱللَّهِۚ بَلۡ هُمۡ قَوۡمٞ يَعۡدِلُونَ
ये वो है, जिसने उत्पत्ति की है आकाशों तथा धरती की और उतारा है तुम्हारे लिए आकाश से जल, फिर हमने उगा दिया उसके द्वारा भव्य बाग़, तुम्हारे बस में न था कि उगा देते उसके वृक्ष, तो क्या कोई पूज्य है अल्लाह के साथ? बल्कि यही लोग (सत्य से) कतरा रहे हैं।
Arabic explanations of the Qur’an:
أَمَّن جَعَلَ ٱلۡأَرۡضَ قَرَارٗا وَجَعَلَ خِلَٰلَهَآ أَنۡهَٰرٗا وَجَعَلَ لَهَا رَوَٰسِيَ وَجَعَلَ بَيۡنَ ٱلۡبَحۡرَيۡنِ حَاجِزًاۗ أَءِلَٰهٞ مَّعَ ٱللَّهِۚ بَلۡ أَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ
या वो है, जिसने धरती को रहने योगय्य बनाया तथा उसके बीच नहरें बनायीं और उसके लिए पर्वत बनाये और बना दी, दो सागरों के बीच एक रोक। तो क्या कोई पूज्य है अल्लाह के साथ? बल्कि उनमें से अधिक्तर ज्ञान नहीं रखते।
Arabic explanations of the Qur’an:
أَمَّن يُجِيبُ ٱلۡمُضۡطَرَّ إِذَا دَعَاهُ وَيَكۡشِفُ ٱلسُّوٓءَ وَيَجۡعَلُكُمۡ خُلَفَآءَ ٱلۡأَرۡضِۗ أَءِلَٰهٞ مَّعَ ٱللَّهِۚ قَلِيلٗا مَّا تَذَكَّرُونَ
या वो है, जो व्याकुल की प्रार्थना सुनता है, जब उसे पुकारे और दूर करता है दुःख तथा तुम्हें बनाता है धरती का अधिकारी, क्या कोई पूज्य है अल्लाह के साथ? तुम बहुत कम ही शिक्षा ग्रहण करते हो।
Arabic explanations of the Qur’an:
أَمَّن يَهۡدِيكُمۡ فِي ظُلُمَٰتِ ٱلۡبَرِّ وَٱلۡبَحۡرِ وَمَن يُرۡسِلُ ٱلرِّيَٰحَ بُشۡرَۢا بَيۡنَ يَدَيۡ رَحۡمَتِهِۦٓۗ أَءِلَٰهٞ مَّعَ ٱللَّهِۚ تَعَٰلَى ٱللَّهُ عَمَّا يُشۡرِكُونَ
या वो है, जो तुम्हें राह दिखाता है सूखे तथा सागर के अंधेरों में तथा भेजता है वायुओं को शुभ सूचना देने के लिए अपनी दया (वर्षा) से पहले, क्या कोई और पूज्य है अल्लाह के साथ? उच्च है अल्लाह उस शिर्क से, जो वे कर रहे हैं।
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أَمَّن يَبۡدَؤُاْ ٱلۡخَلۡقَ ثُمَّ يُعِيدُهُۥ وَمَن يَرۡزُقُكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِۗ أَءِلَٰهٞ مَّعَ ٱللَّهِۚ قُلۡ هَاتُواْ بُرۡهَٰنَكُمۡ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ
या वो है, जो आरंभ करता है उत्पत्ति का, फिर उसे दुहरायेगा तथा जो तुम्हें जीविका देता है आकाश तथा धरती से, क्या कोई पूज्य है अल्लाह के साथ? आप कह दें कि अपना प्रमाण लाओ, यदि तुम सच्चे[1] हो।
1. आयत संख्या 60 से यहाँ तक का सारांश यह है कि जब अल्लाह ने ही पूरे विश्व की उत्पत्ति की है और सब की व्यवस्था वही कर रहा है, और उस का कोई साझी नहीं तो फिर यह मिथ्या पूज्य अल्लाह के साथ कहाँ से आ गये? यह तो ज्ञान और समझ में आने की बात नहीं और न इस का कोई प्रमाण है।
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قُل لَّا يَعۡلَمُ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ ٱلۡغَيۡبَ إِلَّا ٱللَّهُۚ وَمَا يَشۡعُرُونَ أَيَّانَ يُبۡعَثُونَ
आप कह दें कि नहीं जानता है, जो आकाशों तथा धरती में है, परोक्ष को अल्लाह के सिवा और वे नहीं जानते कि कब फिर जीवित किये जायेंगे।
Arabic explanations of the Qur’an:
بَلِ ٱدَّـٰرَكَ عِلۡمُهُمۡ فِي ٱلۡأٓخِرَةِۚ بَلۡ هُمۡ فِي شَكّٖ مِّنۡهَاۖ بَلۡ هُم مِّنۡهَا عَمُونَ
बल्कि समाप्त हो गया है उनका ज्ञान आख़िरत (परलोक) के विषय में, बल्कि वे द्विधा में हैं, बल्कि वे उससे अंधे हैं।
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وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ أَءِذَا كُنَّا تُرَٰبٗا وَءَابَآؤُنَآ أَئِنَّا لَمُخۡرَجُونَ
और कहा काफ़िरों नेः क्या जब हम हो जायेंगे मिट्टी तथा हमारे पूर्वज, तो क्या हम अवश्य निकाले[1] जायेंगे?
1. अर्थात प्रलय के दिन अपनी समाधियों से जीवित निकाले जायेंगे।
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لَقَدۡ وُعِدۡنَا هَٰذَا نَحۡنُ وَءَابَآؤُنَا مِن قَبۡلُ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّآ أَسَٰطِيرُ ٱلۡأَوَّلِينَ
हमें इसका वचन दिया जा चुका है तथा हमारे पूर्वजों को इससे पहले, ये तो बस अगलों की बनायी हुई कथाएँ हैं।
Arabic explanations of the Qur’an:
قُلۡ سِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَٱنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُجۡرِمِينَ
(हे नबी!) आप कह दें कि चलो-फिरो धरती में, फिर देखो कि कैसा हुआ अपराधियों का परिणाम!
Arabic explanations of the Qur’an:
وَلَا تَحۡزَنۡ عَلَيۡهِمۡ وَلَا تَكُن فِي ضَيۡقٖ مِّمَّا يَمۡكُرُونَ
और आप शोक न करें उनपर और न किसी संकीर्णता में रहें उससे, जो चालें वे चल रहे हैं।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا ٱلۡوَعۡدُ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ
तथा वे कहते हैं: कब ये धमकी पूरी होगी, यदि तुम सच्चे हो?
Arabic explanations of the Qur’an:
قُلۡ عَسَىٰٓ أَن يَكُونَ رَدِفَ لَكُم بَعۡضُ ٱلَّذِي تَسۡتَعۡجِلُونَ
आप कह दें: संभव है कि तुम्हारे समीप हो उसमें से कुछ, जिसे तुम शीघ्र चाहते हो।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَإِنَّ رَبَّكَ لَذُو فَضۡلٍ عَلَى ٱلنَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَشۡكُرُونَ
तथा निःसंदेह, आपका पालनहार बड़ा दयालु है लोगों[1] पर। परन्तु, उनमें से अधिक्तर कृतज्ञ नहीं होते।
1. अर्थात लोगों को अपने अनुग्रह से अवसर देता रहता है।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَإِنَّ رَبَّكَ لَيَعۡلَمُ مَا تُكِنُّ صُدُورُهُمۡ وَمَا يُعۡلِنُونَ
और वास्तव में, आपका पालनहार जानता है उसे, जो छुपाते हैं उनके दिल तथा जो व्यक्त करते हैं।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَمَا مِنۡ غَآئِبَةٖ فِي ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِ إِلَّا فِي كِتَٰبٖ مُّبِينٍ
और कोई छुपी चीज़ नहीं है आकाश तथा धरती में, परन्तु वह खुली पुस्तक में[1] है।
1. इस से तात्पर्य (लौह़े मह़फ़ूज़) सुरक्षित पुस्तक है जिस में सब कुछ अंकित है।
Arabic explanations of the Qur’an:
إِنَّ هَٰذَا ٱلۡقُرۡءَانَ يَقُصُّ عَلَىٰ بَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ أَكۡثَرَ ٱلَّذِي هُمۡ فِيهِ يَخۡتَلِفُونَ
निःसंदेह, ये क़ुर्आन वर्णन कर रहा है इस्राईल की संतान के समक्ष, उन अधिक्तर बातों को जिनमें वे विभेद कर रहे हैं।
Arabic explanations of the Qur’an:

وَإِنَّهُۥ لَهُدٗى وَرَحۡمَةٞ لِّلۡمُؤۡمِنِينَ
और वास्तव में, वह मार्गदर्शन तथा दया है, ईमान वालों के लिए।
Arabic explanations of the Qur’an:
إِنَّ رَبَّكَ يَقۡضِي بَيۡنَهُم بِحُكۡمِهِۦۚ وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡعَلِيمُ
निःसंदेह, आपका पालनहार[1] निर्णय कर देगा उनके बीच अपने आदेश से तथा वही प्रबल, सबकुछ जानने वाला है।
1. अर्थात प्रलय के दिन। और सत्य तथा असत्य को अलग कर के उस का बदला देगा।
Arabic explanations of the Qur’an:
فَتَوَكَّلۡ عَلَى ٱللَّهِۖ إِنَّكَ عَلَى ٱلۡحَقِّ ٱلۡمُبِينِ
अतः, आप भरोसा करें अल्लाह पर, वस्तुतः, आप खुले सत्य पर हैं।
Arabic explanations of the Qur’an:
إِنَّكَ لَا تُسۡمِعُ ٱلۡمَوۡتَىٰ وَلَا تُسۡمِعُ ٱلصُّمَّ ٱلدُّعَآءَ إِذَا وَلَّوۡاْ مُدۡبِرِينَ
वास्तव में, आप नहीं सुना सकेंगे मुर्दौं को और न सुना सकेंगे बहरों को अपनी पुकार, जब वे भागे जा रहे हों पीठ फेर[1] कर।
1. अर्थात जिन की अंतरात्मा मर चुकी हो, और जिन की दुराग्रह ने सत्य और असत्य का अन्तर समझने की क्षमता खो दी हो।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَمَآ أَنتَ بِهَٰدِي ٱلۡعُمۡيِ عَن ضَلَٰلَتِهِمۡۖ إِن تُسۡمِعُ إِلَّا مَن يُؤۡمِنُ بِـَٔايَٰتِنَا فَهُم مُّسۡلِمُونَ
तथा आप अंधे को मार्गदर्शन नहीं दे सकते उनके कुपथ से, आप तो बस उसी को सुना सकते हैं, जो ईमान रखता हो हमारी आयतों पर, फिर वह आज्ञाकारी हो।
Arabic explanations of the Qur’an:
۞وَإِذَا وَقَعَ ٱلۡقَوۡلُ عَلَيۡهِمۡ أَخۡرَجۡنَا لَهُمۡ دَآبَّةٗ مِّنَ ٱلۡأَرۡضِ تُكَلِّمُهُمۡ أَنَّ ٱلنَّاسَ كَانُواْ بِـَٔايَٰتِنَا لَا يُوقِنُونَ
और जब आ जायेगा बात पूरी होने का समय उनके ऊपर[1], तो हम निकालेंगे उनके लिए एक पशु धरती से, जो बात करेगा उनसे[2] कि लोग हमारी आयतों पर विश्वास नहीं करते थे।
1. अर्थात प्रलय होने का समय। 2. यह पशु वही है जो प्रलय के समीप होने का एक लक्षण है जैसा कि ह़दीस में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का कथन है कि प्रलय उस समय तक नहीं होगी जब तक तुम दस लक्षण न देख लो, उन में से एक पशु का निकालना है। (देखियेः सह़ीह़ मुस्लिम ह़दीस संख्याः2901) आप का दूसरा कथन यह है कि सर्व प्रथम जो लक्षण होगा वह सूर्य का पश्चिम से निकलना होगा। तथा पूर्वान्ह से पहले पशु का निकलना इन में से जो भी पहले होगा शीघ्र ही दूसरा उस के पश्चात होगा। (देखियेः सह़ीह़ मुस्लिम ह़दीस संख्याः2941) और यह पशु मानव भाषा में बात करेगा जो अल्लाह के सामर्थ्य का एक चिन्ह होगा।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَيَوۡمَ نَحۡشُرُ مِن كُلِّ أُمَّةٖ فَوۡجٗا مِّمَّن يُكَذِّبُ بِـَٔايَٰتِنَا فَهُمۡ يُوزَعُونَ
तथा जिस दिन हम घेर लायेंग प्रत्येक समुदाय से एक गिरोह, उनका, जो झुठलाते रहे हमारी आयतों को, फिर वे सब (एकत्र किये जाने के लिए) रोक दिये जायेंगे।
Arabic explanations of the Qur’an:
حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءُو قَالَ أَكَذَّبۡتُم بِـَٔايَٰتِي وَلَمۡ تُحِيطُواْ بِهَا عِلۡمًا أَمَّاذَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ
यहाँतक कि जब सब आ जायेंगे, तो अल्लाह उनसे कहेगाः क्या तुमने मेरी आयतों को झुठला दिया, जबकि तुमने उनका पूरा ज्ञान नहीं किया, अन्यथा तुम और क्या कर रहे थे?
Arabic explanations of the Qur’an:
وَوَقَعَ ٱلۡقَوۡلُ عَلَيۡهِم بِمَا ظَلَمُواْ فَهُمۡ لَا يَنطِقُونَ
और सिध्द हो जायेगा यातना का वचन, उनके ऊपर, उनके अत्याचार के कारण। तब वे बात नहीं कर सकेंगे।
Arabic explanations of the Qur’an:
أَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّا جَعَلۡنَا ٱلَّيۡلَ لِيَسۡكُنُواْ فِيهِ وَٱلنَّهَارَ مُبۡصِرًاۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ
क्या उन्होंने नहीं दखा कि हमने रात बनाई, ताकि वे शान्त रहें उसमें तथा दिन को दिखाने वाला[1]। वास्तव में, इसमें बड़ी निशानियाँ (लक्षण) हैं, उन लोगों के लिए, जो ईमान लाते हैं।
1. जिस के प्रकाश में वह देखें और अपनी जीविका के लिये प्रयास करें।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَيَوۡمَ يُنفَخُ فِي ٱلصُّورِ فَفَزِعَ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَن فِي ٱلۡأَرۡضِ إِلَّا مَن شَآءَ ٱللَّهُۚ وَكُلٌّ أَتَوۡهُ دَٰخِرِينَ
और जिस दिन फूँका जायेगा[1] सूर (नरसिंघा) में, तो घबरा जायेंगे वे, जो आकाशों तथा धरती में हैं। परन्तु वह, जिसे अल्लाह चाहे तथा सब उस (अल्लाह) के समक्ष आ जायेंगे, विवश होकर।
1. अर्थात प्रलय के दिन।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَتَرَى ٱلۡجِبَالَ تَحۡسَبُهَا جَامِدَةٗ وَهِيَ تَمُرُّ مَرَّ ٱلسَّحَابِۚ صُنۡعَ ٱللَّهِ ٱلَّذِيٓ أَتۡقَنَ كُلَّ شَيۡءٍۚ إِنَّهُۥ خَبِيرُۢ بِمَا تَفۡعَلُونَ
और तुम देखते हो पर्वतों को, तो उन्हें समझते हो स्थिर (अचल) हैं, जबकि वे उस दिन उड़ेंगे बादल के समान, ये अल्लाह की रचना है, जिसने सुदृढ़ किया है प्रत्येक चीज़ को, निश्चय वह भली-भाँति सूचित है उससे, जो तुम कर रहे हो।
Arabic explanations of the Qur’an:

مَن جَآءَ بِٱلۡحَسَنَةِ فَلَهُۥ خَيۡرٞ مِّنۡهَا وَهُم مِّن فَزَعٖ يَوۡمَئِذٍ ءَامِنُونَ
जो भलाई[1] लायेगा, तो उसके लिए उससे उत्तम (प्रतिफल) है और वह उस दिन की व्यग्रता से निर्भय रहने वाले होंगे।
1. अर्थात एक अल्लाह के प्रति आस्था तथा तदानुसार कर्म ले कर प्रलय के दिन आयेगा।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَمَن جَآءَ بِٱلسَّيِّئَةِ فَكُبَّتۡ وُجُوهُهُمۡ فِي ٱلنَّارِ هَلۡ تُجۡزَوۡنَ إِلَّا مَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ
और जो बुराई लायेगा, तो वही झोंक दिये जायेंगे औंधे मुँह नरक में, (तथा कहा जायेगाः) तुम्हें वही बदला दिया जा रहा है, जो तुम करते रहे हो।
Arabic explanations of the Qur’an:
إِنَّمَآ أُمِرۡتُ أَنۡ أَعۡبُدَ رَبَّ هَٰذِهِ ٱلۡبَلۡدَةِ ٱلَّذِي حَرَّمَهَا وَلَهُۥ كُلُّ شَيۡءٖۖ وَأُمِرۡتُ أَنۡ أَكُونَ مِنَ ٱلۡمُسۡلِمِينَ
मुझे तो बस यही आदेश दिया गया है कि इस नगर (मक्का) के पालनहार की इबादत (वंदना) करूँ, जिसने इसे आदरणीय बनाया है तथा उसी के अधिकार में है प्रत्येक चीज़ और मुझे आदेश दिया गया है कि आज्ञाकारियों में रहूँ।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَأَنۡ أَتۡلُوَاْ ٱلۡقُرۡءَانَۖ فَمَنِ ٱهۡتَدَىٰ فَإِنَّمَا يَهۡتَدِي لِنَفۡسِهِۦۖ وَمَن ضَلَّ فَقُلۡ إِنَّمَآ أَنَا۠ مِنَ ٱلۡمُنذِرِينَ
तथा क़ुर्आन पढ़ता रहूँ, तो जिसने सुपथ अपनाया, तो वह अपने ही लाभ के लिए सुपथ अपनायेगा और जो कुपथ हो जाये, तो आप कह दें कि वास्तव में, मैं तो बस सावधान करने वालों में से हूँ।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَقُلِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ سَيُرِيكُمۡ ءَايَٰتِهِۦ فَتَعۡرِفُونَهَاۚ وَمَا رَبُّكَ بِغَٰفِلٍ عَمَّا تَعۡمَلُونَ
तथा आप कह दें कि सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, वह शीघ्र तुम्हें दिखा देगा अपनी निशानियाँ, जिन्हें तुम पहचान[1] लोगे और तुम्हारा पालनहार उससे अचेत नहीं है, जो कुछ तुम कर रहे हो।
1. (देखियेः सूरह ह़ा, मीम, सज्दा, आयतः53)
Arabic explanations of the Qur’an:

 
Translation of the meanings Surah: An-Naml
Surahs’ Index Page Number
 
Translation of the Meanings of the Noble Qur'an - Indian Translation - Translations’ Index

Translation of the Quran meaning into Indian by Maulana Azizul-Haqq Al-Umary, published by King Fahd Complex for the Printing of the Holy Quran, printed in 1433 H.

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