Translation of the Meanings of the Noble Qur'an - Indian Translation * - Translations’ Index

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Translation of the meanings Surah: Al-A‘lā
Ayah:
 

सूरा अल्-आला

سَبِّحِ ٱسۡمَ رَبِّكَ ٱلۡأَعۡلَى
अपने सर्वोच्च प्रभु के नाम की पवित्रता का स्मरण करो।
Arabic explanations of the Qur’an:
ٱلَّذِي خَلَقَ فَسَوَّىٰ
जिसने पैदा किया और ठीक-ठीक बनाया।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَٱلَّذِي قَدَّرَ فَهَدَىٰ
और जिसने अनुमान लगाकर निर्धारित किया, फिर सीधी राह दिखायी।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَٱلَّذِيٓ أَخۡرَجَ ٱلۡمَرۡعَىٰ
और जिसने चारा उपजाया।[1]
1. (1-4) इन आयतों में जिस पालनहार ने अपने नाम की पवित्रता का वर्णन करने का आदेश दिया है उस का परिचय दिया गया है कि वह पालनहार है जिस ने सभी को पैदा किया, फिर उन को संतुलित किया, और उन के लिये एक विशेष प्रकार का अनुमान बनाया जिस की सीमा से नहीं निकल सकते, और उन के लिये उस कार्य को पूरा करने की राह दिखाई जिस के लिये उन्हें पैदा किया है।
Arabic explanations of the Qur’an:
فَجَعَلَهُۥ غُثَآءً أَحۡوَىٰ
फिर उसे (सुखा कर) कूड़ा बना दिया।[1]
1. (4-5) इन आयतों में बताया गया है कि प्रत्येक कार्य अनुक्रम से धीरे धीरे होते हैं। धरती के पौधे धीरे धीरे गुंजान और हरे भरे होते हैं। ऐसे ही मानवीय योग्तायें भी धीरे धीरे पूरी होती हैं।
Arabic explanations of the Qur’an:
سَنُقۡرِئُكَ فَلَا تَنسَىٰٓ
(हे नबी!) हम तुम्हें ऐसा पढ़ायेंगे कि भूलोगे नहीं।
Arabic explanations of the Qur’an:
إِلَّا مَا شَآءَ ٱللَّهُۚ إِنَّهُۥ يَعۡلَمُ ٱلۡجَهۡرَ وَمَا يَخۡفَىٰ
परन्तु, जिसे अल्लाह चाहे। निश्चय ही वह सभी खुली तथा छिपी बातों को जानता है।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَنُيَسِّرُكَ لِلۡيُسۡرَىٰ
और हम तुम्हें सरल मार्ग का साहस देंगे।[1]
1. (6-8) इन में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह निर्देश दिया गया है कि इस की चिन्ता न करें कि क़ुर्आन मुझे कैसे याद होगा, इसे याद कराना हमारा काम है, और इस का सुरक्षित रहना हमारी दया से होगा। और यह उस की दया और रक्षा है कि इस मानव संसार में किसी धार्मिक ग्रन्थ के संबंध में यह दावा नहीं किया जा सकता कि वह सुरक्षित है, यह गर्व केवल क़ुर्आन को ही प्राप्त है।
Arabic explanations of the Qur’an:
فَذَكِّرۡ إِن نَّفَعَتِ ٱلذِّكۡرَىٰ
तो आप धर्म की शिक्षा देते रहें। अगर शिक्षा लाभदायक हो।
Arabic explanations of the Qur’an:
سَيَذَّكَّرُ مَن يَخۡشَىٰ
डरने वाला ही शिक्षा ग्रहण करेगा।
Arabic explanations of the Qur’an:

وَيَتَجَنَّبُهَا ٱلۡأَشۡقَى
और दुर्भाग्य उससे दूर रहेगा।
Arabic explanations of the Qur’an:
ٱلَّذِي يَصۡلَى ٱلنَّارَ ٱلۡكُبۡرَىٰ
जो भीषण अग्नि में जायेगा।
Arabic explanations of the Qur’an:
ثُمَّ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحۡيَىٰ
फिर उसमें न मरेगा, न जीवित रहेगा।[1]
1. (9-13) इन में बताया गया है कि आप को मात्र इस का प्रचार प्रसार करना है। और इस की सरल राह यह है कि जो सुने और मानने को लिये तैयार हो उसे शिक्षा दी जाये। किसी के पीछे पड़ने की आवश्यक्ता नहीं है। जो हत्भागे हैं वही नहीं सुनेंगे और नरक की यातना के रूप में अपना दुष्परिणाम देखेंगे।
Arabic explanations of the Qur’an:
قَدۡ أَفۡلَحَ مَن تَزَكَّىٰ
वह सफल हो गया, जिसने अपना शुध्दिकरण किया।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَذَكَرَ ٱسۡمَ رَبِّهِۦ فَصَلَّىٰ
तथा अपने पालनहार के नाम का स्मरण किया और नमाज़ पढ़ी।[1]
1. (14-15) इन आयतों में कहा गया है कि सफलता मात्र उन के लिये है जो आस्था, स्वभाव तथा कर्म की पवित्रता को अपनायें, और नमाज़ अदा करते रहें।
Arabic explanations of the Qur’an:
بَلۡ تُؤۡثِرُونَ ٱلۡحَيَوٰةَ ٱلدُّنۡيَا
बल्कि तुम लोग तो सांसारिक जीवन को प्राथमिकता देते हो।
Arabic explanations of the Qur’an:
وَٱلۡأٓخِرَةُ خَيۡرٞ وَأَبۡقَىٰٓ
जबकि आख़िरत का जीवन ही उत्त्म और स्थायी है।
Arabic explanations of the Qur’an:
إِنَّ هَٰذَا لَفِي ٱلصُّحُفِ ٱلۡأُولَىٰ
यही बात, प्रथम ग्रन्थों में है।
Arabic explanations of the Qur’an:
صُحُفِ إِبۡرَٰهِيمَ وَمُوسَىٰ
(अर्थात) इब्राहीम तथा मूसा के ग्रन्थों में।[1]
1. (16-19) इन आयतों का भावार्थ यह है कि वास्तव में रोग यह है कि काफ़िरों को सांसारिक स्वार्थ के कारण नबी की बातें अच्छी नहीं लगतीं। जब कि परलोक ही स्थायी है। और यही सभी आदि ग्रन्थों की शिक्षा है।
Arabic explanations of the Qur’an:

 
Translation of the meanings Surah: Al-A‘lā
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Translation of the Quran meaning into Indian by Maulana Azizul-Haqq Al-Umary, published by King Fahd Complex for the Printing of the Holy Quran, printed in 1433 H.

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