د قرآن کریم د معناوو ژباړه - هندي ژباړه - عزيز الحق عمري

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अस्-सफ़्फ़

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1 : 61

سَبَّحَ لِلّٰهِ مَا فِی السَّمٰوٰتِ وَمَا فِی الْاَرْضِ ۚ— وَهُوَ الْعَزِیْزُ الْحَكِیْمُ ۟

अल्लाह के पवित्र होने का गान किया, हर उस चीज़ ने जो आकाशों और धरती में है और वही सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है। info
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2 : 61

یٰۤاَیُّهَا الَّذِیْنَ اٰمَنُوْا لِمَ تَقُوْلُوْنَ مَا لَا تَفْعَلُوْنَ ۟

ऐ ईमान वालो! तुम वह बात क्यों कहते हो जो तुम करते नहीं? info
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3 : 61

كَبُرَ مَقْتًا عِنْدَ اللّٰهِ اَنْ تَقُوْلُوْا مَا لَا تَفْعَلُوْنَ ۟

अल्लाह को अत्यंत अप्रिय है कि तुम वह बात कहो, जो तुम करते नहीं। info
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4 : 61

اِنَّ اللّٰهَ یُحِبُّ الَّذِیْنَ یُقَاتِلُوْنَ فِیْ سَبِیْلِهٖ صَفًّا كَاَنَّهُمْ بُنْیَانٌ مَّرْصُوْصٌ ۟

निःसंदेह अल्लाह उन लोगों से प्रेम करता है, जो उसके मार्ग में पंक्तिबद्ध होकर युद्ध करते हैं, गोया वे एक सीसा पिलाई हुई इमारत हैं। info
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5 : 61

وَاِذْ قَالَ مُوْسٰی لِقَوْمِهٖ یٰقَوْمِ لِمَ تُؤْذُوْنَنِیْ وَقَدْ تَّعْلَمُوْنَ اَنِّیْ رَسُوْلُ اللّٰهِ اِلَیْكُمْ ؕ— فَلَمَّا زَاغُوْۤا اَزَاغَ اللّٰهُ قُلُوْبَهُمْ ؕ— وَاللّٰهُ لَا یَهْدِی الْقَوْمَ الْفٰسِقِیْنَ ۟

तथा याद करो जब मूसा ने अपनी जाति से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम मुझे क्यों कष्ट देते हो, जबकि निश्चय तुम जानते हो कि मैं तुम्हारी ओर अल्लाह का रसूल हूँ? फिर जब वे टेढ़े हो गए, तो अल्लाह ने उनके दिलों को टेढ़ा कर दिया और अल्लाह अवज्ञाकारी लोगों को सीधा मार्ग नहीं दिखाता। info
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