పవిత్ర ఖురాన్ యొక్క భావార్థాల అనువాదం - الترجمة الهندية للمختصر في تفسير القرآن الكريم * - అనువాదాల విషయసూచిక


భావార్ధాల అనువాదం వచనం: (88) సూరహ్: సూరహ్ అల్-మాఇదహ్
وَكُلُوْا مِمَّا رَزَقَكُمُ اللّٰهُ حَلٰلًا طَیِّبًا ۪— وَّاتَّقُوا اللّٰهَ الَّذِیْۤ اَنْتُمْ بِهٖ مُؤْمِنُوْنَ ۟
अल्लाह अपनी जीविका में से जो कुछ तुम्हें प्रदान करता है, उसमें से इस हाल में खाओ कि वह हलाल और पवित्र (अच्छी) हो, उस समय नहीं अगर वह हराम हो जैसे कि बलपूर्वक ली गई या गंदी चीज़। तथा अल्लाह से, उसकी आज्ञाओं का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरो। क्योंकि अल्लाह वही है जिसपर तुम ईमान रखते हो और तुम्हारा उसपर ईमान रखना तुम्हारे लिए यह आवश्यक कर देता है कि तुम उससे डरो।
అరబీ భాషలోని ఖుర్ఆన్ వ్యాఖ్యానాలు:
ఈ పేజీలోని వచనాల ద్వారా లభించే ప్రయోజనాలు:
• الأمر بتوخي الطيب من الأرزاق وترك الخبيث.
• अच्छी जीविका तलाशने तथा बुरी जीविका त्यागने का आदेश।

• عدم المؤاخذة على الحلف عن غير عزم للقلب، والمؤاخذة على ما كان عن عزم القلب ليفعلنّ أو لا يفعلنّ.
• दिल के संकल्प के बिना क़सम खाने पर पकड़ न करना, तथा उस क़सम पर पकड़ करना जो दिल के संकल्प से हो कि वह ऐसा अवश्य करेगा या नहीं करेगा।

• بيان أن كفارة اليمين: إطعام عشرة مساكين، أو كسوتهم، أو عتق رقبة مؤمنة، فإذا لم يستطع المكفِّر عن يمينه الإتيان بواحد من الأمور السابقة، فليكفِّر عن يمينه بصيام ثلاثة أيام.
• इस बात का वर्णन कि क़सम का प्रायश्चित : दस निर्धनों को भोजन कराना, या उन्हें कपड़े पहनाना, या एक मोमिन दास मुक्त करना है। यदि अपनी क़सम का प्रायश्चित करने वाला उक्त चीज़ों में से कोई एक भी चीज़ न कर सके, तो वह तीन दिन के रोज़े रखकर अपनी क़सम का प्रायश्चित करे।

• قوله تعالى: ﴿... إنَّمَا الْخَمْرُ ...﴾ هي آخر آية نزلت في الخمر، وهي نص في تحريمه.
• अल्लाह का कथन : ﴾...إنَّمَا الْخَمْرُ ...﴿ शराब के संबंध में उतरने वाली अंतिम आयत है, तथा यह शराब को स्पष्ट रूप से निषिद्ध ठहराती है।

 
భావార్ధాల అనువాదం వచనం: (88) సూరహ్: సూరహ్ అల్-మాఇదహ్
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الترجمة الهندية للمختصر في تفسير القرآن الكريم، صادر عن مركز تفسير للدراسات القرآنية.

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