কুরআনুল কারীমের অর্থসমূহের অনুবাদ - হিন্দি অনুবাদ * - অনুবাদসমূহের সূচী

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অর্থসমূহের অনুবাদ সূরা: সূরা আয-যুমার
আয়াত:
 

सूरा अज़्-ज़ुमर

تَنزِيلُ ٱلۡكِتَٰبِ مِنَ ٱللَّهِ ٱلۡعَزِيزِ ٱلۡحَكِيمِ
इस पुस्तक का अवतरित होना अल्लाह अति प्रभावशाली, तत्वज्ञ की ओर से है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
إِنَّآ أَنزَلۡنَآ إِلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبَ بِٱلۡحَقِّ فَٱعۡبُدِ ٱللَّهَ مُخۡلِصٗا لَّهُ ٱلدِّينَ
हमने आपकी ओर ये पुस्तक सत्य के साथ अवतरित की है। अतः, इबादत (वंदना) करो अल्लाह की शुध्द करते हुए उसके लिए धर्म को।
আরবি তাফসীরসমূহ:
أَلَا لِلَّهِ ٱلدِّينُ ٱلۡخَالِصُۚ وَٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ مِن دُونِهِۦٓ أَوۡلِيَآءَ مَا نَعۡبُدُهُمۡ إِلَّا لِيُقَرِّبُونَآ إِلَى ٱللَّهِ زُلۡفَىٰٓ إِنَّ ٱللَّهَ يَحۡكُمُ بَيۡنَهُمۡ فِي مَا هُمۡ فِيهِ يَخۡتَلِفُونَۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهۡدِي مَنۡ هُوَ كَٰذِبٞ كَفَّارٞ
सुन लो! शुध्द धर्म अल्लाह ही के लिए (योग्य) है तथा जिन्होंने बना रखा है अल्लाह के सिवा संरक्षक, वे कहते हैं कि हम तो उनकी वंदना इसलिए करते हैं कि वह समीप कर देंगें हमें अल्लाह[1] से। वास्तव में, अल्लाह ही निर्णय करेगा उनके बीच जिसमें वे विभेद कर रहे हैं। वास्तव में, अल्लाह उसे सुपथ नहीं दर्शाता जो बड़ा मिथ्यावादी, कृतघ्न हो।
1. मक्का के काफ़िर यह मानते थे कि अल्लाह ही वास्तविक पूज्य है। परन्तु वह यह समझते थे कि उस का दरबार बहुत ऊँचा है इस लिये वह इन पूज्यों को माध्यम बनाते थे। ताकि इन के द्वारा उन की प्रार्थनायें अल्लाह तक पहुँच जायें। यही बात साधारणतः मुश्रिक कहते आये हैं। इन तीन आयतों में उन के इसी कुविचार का खण्डन किया गया है। फिर उन में कुछ ऐसे थे जो समझते थे कि अल्लाह के संतान हैं। कुछ, फ़रिश्तों को अल्लाह की पुत्रियाँ कहते, और कुछ, नबियों (ईसा) को अल्लाह का पुत्र कहते थे। यहाँ इसी का खण्न किया गया है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
لَّوۡ أَرَادَ ٱللَّهُ أَن يَتَّخِذَ وَلَدٗا لَّٱصۡطَفَىٰ مِمَّا يَخۡلُقُ مَا يَشَآءُۚ سُبۡحَٰنَهُۥۖ هُوَ ٱللَّهُ ٱلۡوَٰحِدُ ٱلۡقَهَّارُ
यदि अल्लाह चाहता कि अपने लिए संतान बनाये, तो चुन लेता उसमें से, जिसे पैदा करता है, जिसे चाहता। वह पवित्र है! वही अल्लाह अकेला सबपर प्रभावशाली है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ بِٱلۡحَقِّۖ يُكَوِّرُ ٱلَّيۡلَ عَلَى ٱلنَّهَارِ وَيُكَوِّرُ ٱلنَّهَارَ عَلَى ٱلَّيۡلِۖ وَسَخَّرَ ٱلشَّمۡسَ وَٱلۡقَمَرَۖ كُلّٞ يَجۡرِي لِأَجَلٖ مُّسَمًّىۗ أَلَا هُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡغَفَّـٰرُ
उसने पैदा किया है आकाशों तथा धरती को सत्य के आधार पर। वह लपेट देता है रात्रि को दिन पर तथा दिन को रात्रि पर तथा वशवर्ती किया सूर्य और चन्द्रमा को। प्रत्येक चल रहा है, अपनी निर्धारित अवधि के लिए। सावधान! वही अत्यंत प्रभावशाली, क्षमी है।
আরবি তাফসীরসমূহ:

خَلَقَكُم مِّن نَّفۡسٖ وَٰحِدَةٖ ثُمَّ جَعَلَ مِنۡهَا زَوۡجَهَا وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ ٱلۡأَنۡعَٰمِ ثَمَٰنِيَةَ أَزۡوَٰجٖۚ يَخۡلُقُكُمۡ فِي بُطُونِ أُمَّهَٰتِكُمۡ خَلۡقٗا مِّنۢ بَعۡدِ خَلۡقٖ فِي ظُلُمَٰتٖ ثَلَٰثٖۚ ذَٰلِكُمُ ٱللَّهُ رَبُّكُمۡ لَهُ ٱلۡمُلۡكُۖ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ فَأَنَّىٰ تُصۡرَفُونَ
उसने तुम्हें पैदा किया एक प्राण से, फिर बनाया उसीसे उसका जोड़ा तथा अवतरित किये तुम्हारे लिए पशुओं में से आठ जोड़े। वह पैदा करता है तुम्हें तुम्हारी माताओं के गर्भाषयों में एक रूप में, एक रूप के पश्चात्, तीन अंधेरों में, यही अल्लाह है तुम्हारा पालनहार, उसी का राज्य है। कोई ( सच्चा) वंदनीय नहीं, उसके सिवा। तो तुम कहाँ फिराये जा रहे हो?
আরবি তাফসীরসমূহ:
إِن تَكۡفُرُواْ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَنِيٌّ عَنكُمۡۖ وَلَا يَرۡضَىٰ لِعِبَادِهِ ٱلۡكُفۡرَۖ وَإِن تَشۡكُرُواْ يَرۡضَهُ لَكُمۡۗ وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٞ وِزۡرَ أُخۡرَىٰۚ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُم مَّرۡجِعُكُمۡ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَۚ إِنَّهُۥ عَلِيمُۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ
यदि तुम कृतघ्न बनो, तो अल्लाह निस्पृह है तुमसे और वह प्रसन्न नहीं होता अपने भक्तों की कृतघ्नता से और यदि कृतज्ञता करो, तो वह प्रसन्न हो जायेगा तुमसे और नहीं बोझ उठायेगा कोई उठाने वाला दूसरों का बोझ। फिर तुम्हारे पालनहार ही की ओर तुम्हारा फिरना है। तो वह तुम्हें सूचित कर देगा तुम्हारे कर्मों से। वास्तव में, वह भली-भाँति जानने वाला है दिलों के भेदों को।
আরবি তাফসীরসমূহ:
۞وَإِذَا مَسَّ ٱلۡإِنسَٰنَ ضُرّٞ دَعَا رَبَّهُۥ مُنِيبًا إِلَيۡهِ ثُمَّ إِذَا خَوَّلَهُۥ نِعۡمَةٗ مِّنۡهُ نَسِيَ مَا كَانَ يَدۡعُوٓاْ إِلَيۡهِ مِن قَبۡلُ وَجَعَلَ لِلَّهِ أَندَادٗا لِّيُضِلَّ عَن سَبِيلِهِۦۚ قُلۡ تَمَتَّعۡ بِكُفۡرِكَ قَلِيلًا إِنَّكَ مِنۡ أَصۡحَٰبِ ٱلنَّارِ
तथा जब पहुँचता है मनुष्य को कोई दुःख तो पुकारता है अपने पालनहार को, ध्यानमग्न होकर उसकी ओर। फिर जब हम उसे प्रदान करते हैं कोई सुख अपनी ओर से, तो भूल जाता है उसे, जिसके लिए वह पुकार रहा था इससे पूर्व तथा बना लेता है अल्लाह का साझी, ताकि कुपथ करे उसकी डगर से। आप कह कदें कि आनन्द ले ले अपने कुफ़्र का, थोड़ा सा। वास्तव में, तू नारकियों में है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
أَمَّنۡ هُوَ قَٰنِتٌ ءَانَآءَ ٱلَّيۡلِ سَاجِدٗا وَقَآئِمٗا يَحۡذَرُ ٱلۡأٓخِرَةَ وَيَرۡجُواْ رَحۡمَةَ رَبِّهِۦۗ قُلۡ هَلۡ يَسۡتَوِي ٱلَّذِينَ يَعۡلَمُونَ وَٱلَّذِينَ لَا يَعۡلَمُونَۗ إِنَّمَا يَتَذَكَّرُ أُوْلُواْ ٱلۡأَلۡبَٰبِ
तो क्या जो आज्ञाकारी रहा हो रात्रि के क्षणों में सज्दा करते हुए तथा खड़ा रहकर, (और) डर रहा हो परलोक से तथा आशा रखता हो अल्लाह की दया की, आप कहें कि क्या समान हो जायेंगे जो ज्ञान रखते हों तथा जो ज्ञान नहीं रखते? वास्तव में, शिक्षा ग्रहण करते हैं मतिमान लोग ही।
আরবি তাফসীরসমূহ:
قُلۡ يَٰعِبَادِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱتَّقُواْ رَبَّكُمۡۚ لِلَّذِينَ أَحۡسَنُواْ فِي هَٰذِهِ ٱلدُّنۡيَا حَسَنَةٞۗ وَأَرۡضُ ٱللَّهِ وَٰسِعَةٌۗ إِنَّمَا يُوَفَّى ٱلصَّـٰبِرُونَ أَجۡرَهُم بِغَيۡرِ حِسَابٖ
आप कह दें उन भक्तों से, जो ईमान लाये तथा डरे अपने पालनहार से कि उन्हीं के लिए जिन्होंने सदाचार किये इस संसार में, बड़ी भलाई है तथा अल्लाह की धरती विस्तृत है और धैर्यवान ही अपना पूरा प्रतिफल अगणित दिये जायेंगे।
আরবি তাফসীরসমূহ:

قُلۡ إِنِّيٓ أُمِرۡتُ أَنۡ أَعۡبُدَ ٱللَّهَ مُخۡلِصٗا لَّهُ ٱلدِّينَ
आप कह दें कि मुझे आदेश दिया गया है कि इबादत (वंदना) करूँ अल्लाह की, शुध्द करके उसके लिए धर्म को।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَأُمِرۡتُ لِأَنۡ أَكُونَ أَوَّلَ ٱلۡمُسۡلِمِينَ
तथा मुझे आदेश दिया गया है कि प्रथम आज्ञाकारी हो जाऊँ।
আরবি তাফসীরসমূহ:
قُلۡ إِنِّيٓ أَخَافُ إِنۡ عَصَيۡتُ رَبِّي عَذَابَ يَوۡمٍ عَظِيمٖ
आप कह दें: मैं डरता हूँ, यदि मैं अवैज्ञा करूँ अपने पालनहार की, एक बड़े दिन की यातना से।
আরবি তাফসীরসমূহ:
قُلِ ٱللَّهَ أَعۡبُدُ مُخۡلِصٗا لَّهُۥ دِينِي
आप कह दें: अल्लाह ही की इबादत (वंदना) मैं कर रहा हूँ, शुध्द करके उसके लिए अपने धर्म को।
আরবি তাফসীরসমূহ:
فَٱعۡبُدُواْ مَا شِئۡتُم مِّن دُونِهِۦۗ قُلۡ إِنَّ ٱلۡخَٰسِرِينَ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ وَأَهۡلِيهِمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۗ أَلَا ذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡخُسۡرَانُ ٱلۡمُبِينُ
अतः तुम इबादत (वंदना) करो जिसकी चाहो, उसके सिवा। आप कह दें: वास्तव में, क्षतिग्रस्त वही हैं, जिन्होंने क्षतिग्रस्त कर लिया स्वयं को तथा अपने परिवार को प्रलय के दिन। सावधान! यही खुली क्षति है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
لَهُم مِّن فَوۡقِهِمۡ ظُلَلٞ مِّنَ ٱلنَّارِ وَمِن تَحۡتِهِمۡ ظُلَلٞۚ ذَٰلِكَ يُخَوِّفُ ٱللَّهُ بِهِۦ عِبَادَهُۥۚ يَٰعِبَادِ فَٱتَّقُونِ
उन्हीं के लिए छत्र होंगे अग्नि के, उनके ऊपर से तथा उनके नीचे से छत्र होंगे। यही है, डरा रहा है अल्लाह जिससे, अपने भक्तों को। हे मेरे भक्तो! मुझी से डरो।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَٱلَّذِينَ ٱجۡتَنَبُواْ ٱلطَّـٰغُوتَ أَن يَعۡبُدُوهَا وَأَنَابُوٓاْ إِلَى ٱللَّهِ لَهُمُ ٱلۡبُشۡرَىٰۚ فَبَشِّرۡ عِبَادِ
जो बचे रहे ताग़ूत (असुर)[1] की पूजा से तथा ध्यानमग्न हो गये अल्लाह की ओर, तो उन्हीं के लिए शुभ सूचना है। अतः, आप शुभ सूचना सुना दें मेरे भक्तों को।
1. अल्लाह के अतिरिक्त मिथ्या पूज्यों से।
আরবি তাফসীরসমূহ:
ٱلَّذِينَ يَسۡتَمِعُونَ ٱلۡقَوۡلَ فَيَتَّبِعُونَ أَحۡسَنَهُۥٓۚ أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ هَدَىٰهُمُ ٱللَّهُۖ وَأُوْلَـٰٓئِكَ هُمۡ أُوْلُواْ ٱلۡأَلۡبَٰبِ
जो ध्यान से सुनते हैं इस बात को, फिर अनुसरण करते हैं इस सर्वोत्तम बात का, तो वही हैं, जिन्हें सुपथ दर्शा दिया है अल्लाह ने तथा वही मतिमान हैं।
আরবি তাফসীরসমূহ:
أَفَمَنۡ حَقَّ عَلَيۡهِ كَلِمَةُ ٱلۡعَذَابِ أَفَأَنتَ تُنقِذُ مَن فِي ٱلنَّارِ
तो क्या जिसपर यातना की बात सिध्द हो गयी, क्या आप निकाल सकेंगे उसे, जो नरक में हैं?
আরবি তাফসীরসমূহ:
لَٰكِنِ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوۡاْ رَبَّهُمۡ لَهُمۡ غُرَفٞ مِّن فَوۡقِهَا غُرَفٞ مَّبۡنِيَّةٞ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُۖ وَعۡدَ ٱللَّهِ لَا يُخۡلِفُ ٱللَّهُ ٱلۡمِيعَادَ
किन्तु, जो अपने पालनहार से डरे, उन्हीं के लिए उच्च भवन हैं। जिनके ऊपर निर्मित भवन हैं। प्रवाहित हैं जिनमें नहरें, ये अल्लाह का वचन है और अल्लाह वचन भंग नहीं करता।
আরবি তাফসীরসমূহ:
أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَسَلَكَهُۥ يَنَٰبِيعَ فِي ٱلۡأَرۡضِ ثُمَّ يُخۡرِجُ بِهِۦ زَرۡعٗا مُّخۡتَلِفًا أَلۡوَٰنُهُۥ ثُمَّ يَهِيجُ فَتَرَىٰهُ مُصۡفَرّٗا ثُمَّ يَجۡعَلُهُۥ حُطَٰمًاۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَذِكۡرَىٰ لِأُوْلِي ٱلۡأَلۡبَٰبِ
क्या तुमने नहीं देखा[1] कि अल्लाह ने उतारा आकाश से जल? फिर प्रवाहित कर दिये उसके स्रोत धरती में। फिर निकालता है उससे खेतियाँ विभिन्न रंगों की। फिर सूख जाती हैं, तो तुम देखते हो उन्हें पीली, फिर उसे चूर-चूर कर देता है। निश्चय इसमें बड़ी शिक्षा है मतिमानों के लिए।
1. इस आयत में अल्लाह के एक नियम की ओर संकेत है जो सब में समान रूप से प्रचलित है। अर्थात वर्षा से खेती का उगना और अनेक स्थितियों से गुज़र कर नाश हो जाना। इसे मतिमानों के लिये शिक्षा कहा गया है। क्योंकि मनुष्य की भी यही दशा है। वह शिशु जन्म लेता है फिर युवक और बूढ़ा हो जाता है। और अंततः संसार से चला जाता है।
আরবি তাফসীরসমূহ:

أَفَمَن شَرَحَ ٱللَّهُ صَدۡرَهُۥ لِلۡإِسۡلَٰمِ فَهُوَ عَلَىٰ نُورٖ مِّن رَّبِّهِۦۚ فَوَيۡلٞ لِّلۡقَٰسِيَةِ قُلُوبُهُم مِّن ذِكۡرِ ٱللَّهِۚ أُوْلَـٰٓئِكَ فِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٍ
तो क्या खोल दिया हो अल्लाह ने जिसका सीना इस्लाम के लिए, तो वह एक प्रकाश पर हो अपने पालनहार की ओर से। तो विनाश है जिनके दिल कड़े हो गये अल्लाह के स्मरण से, वही खुले कुपथ में हैं।
আরবি তাফসীরসমূহ:
ٱللَّهُ نَزَّلَ أَحۡسَنَ ٱلۡحَدِيثِ كِتَٰبٗا مُّتَشَٰبِهٗا مَّثَانِيَ تَقۡشَعِرُّ مِنۡهُ جُلُودُ ٱلَّذِينَ يَخۡشَوۡنَ رَبَّهُمۡ ثُمَّ تَلِينُ جُلُودُهُمۡ وَقُلُوبُهُمۡ إِلَىٰ ذِكۡرِ ٱللَّهِۚ ذَٰلِكَ هُدَى ٱللَّهِ يَهۡدِي بِهِۦ مَن يَشَآءُۚ وَمَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنۡ هَادٍ
अल्लाह ही है, जिसने सर्वोत्तम ह़दीस (क़ुर्आन) को अवतरित किया है। ऐसी पुस्तक, जिसकी आयतें मिलती-जुलती बार-बार दुहराई जाने वाली हैं। जिसे (सुनकर) खड़े हो जाते हैं उनके रूँगटे, जो डरते हैं अपने पालनहार से। फिर कोमल हो जाते हैं उनके अंग तथा दिल, अल्लाह के स्मरण की ओर। यही है अल्लाह का मार्गदर्शन, जिसके द्वारा वह संमार्ग पर लगा देता है, जिसे चाहता है और जिसे अल्लाह कुपथ कर दे, तो उसका कोई पथदर्शक नहीं है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
أَفَمَن يَتَّقِي بِوَجۡهِهِۦ سُوٓءَ ٱلۡعَذَابِ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۚ وَقِيلَ لِلظَّـٰلِمِينَ ذُوقُواْ مَا كُنتُمۡ تَكۡسِبُونَ
तो क्या जो अपनी रक्षा करेगा अपने मुख[1] से, बुरी यातना से, प्रलय के दिन? तथा कहा जायेगा अत्याचारियों सेः चखो, जो तुम कर रहे थे।
1. इस लिये कि उस के हाथ पीछे बंधे होंगे। वह अच्छा है या जो स्वर्ग के सुख में होगा वह अच्छा है?
আরবি তাফসীরসমূহ:
كَذَّبَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ فَأَتَىٰهُمُ ٱلۡعَذَابُ مِنۡ حَيۡثُ لَا يَشۡعُرُونَ
झुठला दिया उन्होंने, जो इनसे पूर्व थे। तो आ गयी यातना उनके पास, जहाँ से उन्हें अनुमान (भी) न था।
আরবি তাফসীরসমূহ:
فَأَذَاقَهُمُ ٱللَّهُ ٱلۡخِزۡيَ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَاۖ وَلَعَذَابُ ٱلۡأٓخِرَةِ أَكۡبَرُۚ لَوۡ كَانُواْ يَعۡلَمُونَ
तो चखा दिया अल्लाह ने उन्हें अपमान, सांसारिक जीवन में और आख़िरत (परलोक) की यातना निश्चय अत्यधिक बड़ी है। क्या ही अच्छा होता, यदि वे जानते।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَلَقَدۡ ضَرَبۡنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا ٱلۡقُرۡءَانِ مِن كُلِّ مَثَلٖ لَّعَلَّهُمۡ يَتَذَكَّرُونَ
और हमने मनुष्य के लिए इस क़ुर्आन में प्रत्येक उदाहरण दिये हैं, ताकि वे शिक्षा ग्रहण करें।
আরবি তাফসীরসমূহ:
قُرۡءَانًا عَرَبِيًّا غَيۡرَ ذِي عِوَجٖ لَّعَلَّهُمۡ يَتَّقُونَ
अरबी भाषा में क़ुर्आन, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है, ताकि वे अल्लाह से डरें।
আরবি তাফসীরসমূহ:
ضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلٗا رَّجُلٗا فِيهِ شُرَكَآءُ مُتَشَٰكِسُونَ وَرَجُلٗا سَلَمٗا لِّرَجُلٍ هَلۡ يَسۡتَوِيَانِ مَثَلًاۚ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِۚ بَلۡ أَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ
अल्लाह ने एक उदाहरण दिया है एक व्यक्ति का, जिसमें बहुत-से परस्पर विरोधी साझी हैं तथा एक व्यक्ति पूरा एक व्यक्ति का (दास) है। तो क्या दशा में दोनों समान हो जायेंगे?[1] सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, बल्कि उनमें से अधिक्तर नहीं जानते।
1. इस आयत में मिश्रणवादी और एकेश्वरवादी की दशा का वर्णन किया गया है कि मिश्रणवादी अनेक पूज्यों को प्रसन्न करने में व्याकूल रहता है। तथा एकेश्वरवादी शान्त हो कर केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और एक ही को प्रसन्न करता है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
إِنَّكَ مَيِّتٞ وَإِنَّهُم مَّيِّتُونَ
(हे नबी!) निश्चय आपको मरना है तथा उन्हें भी मरना है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
ثُمَّ إِنَّكُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ عِندَ رَبِّكُمۡ تَخۡتَصِمُونَ
फिर तुम सभी[1] प्रलय के दिन अल्लाह के समक्ष झगड़ोगे।
1. और वहाँ तुम्हारे झगड़े का निर्णय और सब का अन्त सामने आ जायेगा। इस आयत में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मौत को सिध्द किया गया है। जिस प्रकार सूरह आले इमरान, आयतः144 में आप की मौत का प्रमाण बताया गया है।
আরবি তাফসীরসমূহ:

۞فَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّن كَذَبَ عَلَى ٱللَّهِ وَكَذَّبَ بِٱلصِّدۡقِ إِذۡ جَآءَهُۥٓۚ أَلَيۡسَ فِي جَهَنَّمَ مَثۡوٗى لِّلۡكَٰفِرِينَ
तो उससे बड़ा अत्याचारी कौन हो सकता है जो अल्लाह पर झूठ बोले तथा सच को झुठलाये, जब उसके पास आ गया? तो क्या नरक में नहीं है, ऐसे काफ़िरों का स्थान?
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَٱلَّذِي جَآءَ بِٱلصِّدۡقِ وَصَدَّقَ بِهِۦٓ أُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُتَّقُونَ
तथा जो सत्य लाये[1] और जिसने उसे सच माना, तो वही (यातना से) सुरक्षित रहने वाले हैं।
1. इस से अभिप्राय अन्तिम नबी जनाब मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हैं।
আরবি তাফসীরসমূহ:
لَهُم مَّا يَشَآءُونَ عِندَ رَبِّهِمۡۚ ذَٰلِكَ جَزَآءُ ٱلۡمُحۡسِنِينَ
उन्हीं के लिए है, जो वह चाहेंगे उनके पालनहार के यहाँ और यही सदाचारियों का प्रतिफल है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
لِيُكَفِّرَ ٱللَّهُ عَنۡهُمۡ أَسۡوَأَ ٱلَّذِي عَمِلُواْ وَيَجۡزِيَهُمۡ أَجۡرَهُم بِأَحۡسَنِ ٱلَّذِي كَانُواْ يَعۡمَلُونَ
ताकि अल्लाह क्षमा कर दे, जो कुकर्म उन्होंने किये हैं तथा उन्हें प्रदान करे उनका प्रतिफल उनके उत्तम कर्मों के बदले, जो वे कर रहे थे।
আরবি তাফসীরসমূহ:
أَلَيۡسَ ٱللَّهُ بِكَافٍ عَبۡدَهُۥۖ وَيُخَوِّفُونَكَ بِٱلَّذِينَ مِن دُونِهِۦۚ وَمَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنۡ هَادٖ
क्या अल्लाह प्रयाप्त नहीं है अपने भक्त के लिए? तथा वह आपको डराते हैं उनसे, जो उसके सिवा हैं तथा जिसे अल्लाह कुपथ कर दे, तो नहीं है उसे कोई सुपथ दर्शाने वाला।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَمَن يَهۡدِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِن مُّضِلٍّۗ أَلَيۡسَ ٱللَّهُ بِعَزِيزٖ ذِي ٱنتِقَامٖ
और जिसे अल्लाह सुपथ दर्शा दे, तो नहीं है उसे कोई कुपथ करने वाला। क्या नहीं है अल्लाह प्रभुत्वशाली, बदला लेने वाला?
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَلَئِن سَأَلۡتَهُم مَّنۡ خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ لَيَقُولُنَّ ٱللَّهُۚ قُلۡ أَفَرَءَيۡتُم مَّا تَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ إِنۡ أَرَادَنِيَ ٱللَّهُ بِضُرٍّ هَلۡ هُنَّ كَٰشِفَٰتُ ضُرِّهِۦٓ أَوۡ أَرَادَنِي بِرَحۡمَةٍ هَلۡ هُنَّ مُمۡسِكَٰتُ رَحۡمَتِهِۦۚ قُلۡ حَسۡبِيَ ٱللَّهُۖ عَلَيۡهِ يَتَوَكَّلُ ٱلۡمُتَوَكِّلُونَ
और यदि आप, उनसे प्रश्न करें कि किसने पैदा किया है आकाशों तथा धरती को? तो वे अवश्य कहेंगे कि अल्लाह ने। आप कहिये कि तुम बताओ, जिसे तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, यदि अल्लाह मुझे कोई हानि पहुँचाना चाहे, तो क्या ये उसकी हानि दूर कर सकता हैं? अथवा मेरे साथ दया करना चाहे, तो क्या ये रोक सकते हैं उसकी दया को? आप कह दें कि मुझे पर्याप्त है अल्लाह और उसीपर भरोसा करते हैं, भरोसा करने वाले।
আরবি তাফসীরসমূহ:
قُلۡ يَٰقَوۡمِ ٱعۡمَلُواْ عَلَىٰ مَكَانَتِكُمۡ إِنِّي عَٰمِلٞۖ فَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَ
आप कह दें कि हे मेरी जाति के लोगो! तुम काम करो अपने स्थान पर, मैंभी काम कर रहा हूँ। तो शीघ्र ही तुम्हें ज्ञान हो जायेगा।
আরবি তাফসীরসমূহ:
مَن يَأۡتِيهِ عَذَابٞ يُخۡزِيهِ وَيَحِلُّ عَلَيۡهِ عَذَابٞ مُّقِيمٌ
कि किसके पास आती है ऐसी यातना, जो उसे अपमानित कर दे तथा उतरती है किसके ऊपर स्थायी यातना?
আরবি তাফসীরসমূহ:

إِنَّآ أَنزَلۡنَا عَلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبَ لِلنَّاسِ بِٱلۡحَقِّۖ فَمَنِ ٱهۡتَدَىٰ فَلِنَفۡسِهِۦۖ وَمَن ضَلَّ فَإِنَّمَا يَضِلُّ عَلَيۡهَاۖ وَمَآ أَنتَ عَلَيۡهِم بِوَكِيلٍ
वास्तव में, हमने ही अवतरित की है आपपर ये पुस्तक, लोगों के लिए सत्य के साथ। तो जिसने मार्गदर्शन प्राप्त कर लिया, तो उसके अपने (लाभ के) लिए है तथा जो कुपथ हो गया, तो वह कुपथ होता है अपने ऊपर तथा आप उनपर संरक्षक नहीं हैं।
আরবি তাফসীরসমূহ:
ٱللَّهُ يَتَوَفَّى ٱلۡأَنفُسَ حِينَ مَوۡتِهَا وَٱلَّتِي لَمۡ تَمُتۡ فِي مَنَامِهَاۖ فَيُمۡسِكُ ٱلَّتِي قَضَىٰ عَلَيۡهَا ٱلۡمَوۡتَ وَيُرۡسِلُ ٱلۡأُخۡرَىٰٓ إِلَىٰٓ أَجَلٖ مُّسَمًّىۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَتَفَكَّرُونَ
अल्लाह ही खींचता है प्राणों को, उनके मरण के समय तथा जिसके मरण का समय नहीं आया, उसकी निद्रा में। फिर रोक लेता है जिसपर निर्णय कर दिया हो मरण का तथा भेज देता है अन्य को, एक निर्धारित समय तक के लिए। वास्तव में, इसमें कई निशानियाँ हैं उनके लिए, जो मनन-चिन्तन[1] करते हों।
1. इस आयत में बताया जा रहा है कि मरण तथा जीवन अल्लाह के नियंत्रण में हैं। निद्रा में प्राणों को खींचने का अर्थ है, उन की संवेदन शक्ति को समाप्त कर देना। अतः कोई इस निद्रा की दशा पर विचार करे तो यह समझ सकता है कि अल्लाह मुर्दों को भी जीवित कर सकता है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
أَمِ ٱتَّخَذُواْ مِن دُونِ ٱللَّهِ شُفَعَآءَۚ قُلۡ أَوَلَوۡ كَانُواْ لَا يَمۡلِكُونَ شَيۡـٔٗا وَلَا يَعۡقِلُونَ
क्या उन्होंने बना लिए हैं अल्लाह के अतिरिक्त बहुत-से अभिस्तावक (सिफ़ारिशी)? आप कह दें: क्या (ये सिफ़ारिश करेंगे) यदि वे अधिकार न रखते हों किसी चीज़ का और न ही समझ सकते हों?
আরবি তাফসীরসমূহ:
قُل لِّلَّهِ ٱلشَّفَٰعَةُ جَمِيعٗاۖ لَّهُۥ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ ثُمَّ إِلَيۡهِ تُرۡجَعُونَ
आप कह दें कि अनुशंसा (सिफ़ारिश) तो सब अल्लाह के अधिकार में है। उसी के लिए है आकाशों तथा धरती का राज्य। फिर उसी की ओर तुम फिराये जाओगे।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَإِذَا ذُكِرَ ٱللَّهُ وَحۡدَهُ ٱشۡمَأَزَّتۡ قُلُوبُ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِۖ وَإِذَا ذُكِرَ ٱلَّذِينَ مِن دُونِهِۦٓ إِذَا هُمۡ يَسۡتَبۡشِرُونَ
तथा जब वर्णन किया जाता है अकेले अल्लाह का, तो संकीर्ण होने लगते हैं उनके दिल, जो ईमान नहीं रखते आख़िरत[1] पर तथा जब वर्णन किया जाता है उनका, जो उसके सिवा हैं, तो वे सहसा प्रसन्न हो जाते हैं।
1. इस में मुश्रिकों की दशा का वर्णन किया जा रहा है कि वह अल्लाह की महिमा और प्रेम को स्वीकार तो करते हैं फिर भी जब अकेले अल्लाह की महिमा तथा प्रशंसा का वर्णन किया जाता है तो प्रसन्न नहीं होते जब तक दूसरे पीरों-फ़क़ीरों तथा देवताओं के चमत्कार की चर्चा न की जाये।
আরবি তাফসীরসমূহ:
قُلِ ٱللَّهُمَّ فَاطِرَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ عَٰلِمَ ٱلۡغَيۡبِ وَٱلشَّهَٰدَةِ أَنتَ تَحۡكُمُ بَيۡنَ عِبَادِكَ فِي مَا كَانُواْ فِيهِ يَخۡتَلِفُونَ
(हे नबी!) आप कहें: हे अल्लाह आकाशों तथा धरती के पैदा करने वाले, परोक्ष तथा प्रत्यक्ष के ज्ञानी! तू ही निर्णय करेगा अपने भक्तों के बीच, जिस बात में वे झगड़ रहे थे।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَلَوۡ أَنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُواْ مَا فِي ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعٗا وَمِثۡلَهُۥ مَعَهُۥ لَٱفۡتَدَوۡاْ بِهِۦ مِن سُوٓءِ ٱلۡعَذَابِ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۚ وَبَدَا لَهُم مِّنَ ٱللَّهِ مَا لَمۡ يَكُونُواْ يَحۡتَسِبُونَ
और यदि उनका, जिन्होंने अत्याचार किया है, जो कुछ धरती में है, सब हो जाये तथा उसके समान उसके साथ और आ जाये, तो वे उसे दण्ड में दे देंगे[1] घोर यातना के बदले, प्रलय के दिन तथा खुल जायेगी उनके लिए अल्लाह की ओर, से वो बात, जिसे वे समझ नहीं रहे थे।
1. परन्तु वह सब स्वीकार्य नहीं होगा। (देखियेः सूरह बक़रह, आयतः48, तथा सूरह आले इमरान, आयतः91)
আরবি তাফসীরসমূহ:

وَبَدَا لَهُمۡ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُواْ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَهۡزِءُونَ
तथा खुल जायेंगी उनके लिए उनके करतूतों की बुराईयाँ और उन्हें घेर लेगा, जिसका वे उपहास कर रहे थे।
আরবি তাফসীরসমূহ:
فَإِذَا مَسَّ ٱلۡإِنسَٰنَ ضُرّٞ دَعَانَا ثُمَّ إِذَا خَوَّلۡنَٰهُ نِعۡمَةٗ مِّنَّا قَالَ إِنَّمَآ أُوتِيتُهُۥ عَلَىٰ عِلۡمِۭۚ بَلۡ هِيَ فِتۡنَةٞ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ
और जब पहुँचता है मनुष्यों को कोई दुःख, तो हमें पुकारता है। फिर जब हम प्रदान करते हैं कोई सुख अपनी ओर से, तो कहता हैः ये तो मुझे प्रदान किया गया है ज्ञान के कारण। बल्कि, ये एक परीक्षा है। किन्तु, लोगों में से अधिक्तर (इसे) नहीं जानते।
আরবি তাফসীরসমূহ:
قَدۡ قَالَهَا ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ فَمَآ أَغۡنَىٰ عَنۡهُم مَّا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ
यही बात, उन लोगों ने भी कही थी, जो इनसे पूर्व थे। तो नहीं काम आया उनके, जो कुछ वे कमा रहे थे।
আরবি তাফসীরসমূহ:
فَأَصَابَهُمۡ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُواْۚ وَٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ مِنۡ هَـٰٓؤُلَآءِ سَيُصِيبُهُمۡ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُواْ وَمَا هُم بِمُعۡجِزِينَ
फिर आ पड़े उनपर उनके सब कुकर्म और जो अत्याचार किये हैं इनमें से, आ पड़ेंगे उनपर (भी) उनके कुकर्म तथा वे (हमें) विवश करने वाले नहीं हैं।
আরবি তাফসীরসমূহ:
أَوَلَمۡ يَعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ يَبۡسُطُ ٱلرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقۡدِرُۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ
क्या उन्हें ज्ञान नहीं कि अल्लाह फैलाता है जीविका, जिसके लिए चाहता है तथा नापकर देता है (जिसके लिए चाहता है)? निश्चय इसमें कई निशानियाँ हैं, उन लोगों के लिए, जो ईमान रखते हैं।
আরবি তাফসীরসমূহ:
۞قُلۡ يَٰعِبَادِيَ ٱلَّذِينَ أَسۡرَفُواْ عَلَىٰٓ أَنفُسِهِمۡ لَا تَقۡنَطُواْ مِن رَّحۡمَةِ ٱللَّهِۚ إِنَّ ٱللَّهَ يَغۡفِرُ ٱلذُّنُوبَ جَمِيعًاۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلۡغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ
आप कह दें मेरे उन भक्तों से, जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किये हैं कि तुम निराश[1] न हो अल्लाह की दया से। वास्तव में, अल्लाह क्षमा कर देता है सब पापों को। निश्चय वह अति क्षमी, दयावान् है।
1. नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास कुछ मुश्रिक आये जिन्हों ने बहुत जानें मारीं और बहुत व्यभिचार किये थे। और कहाः वास्तव में आप जो कुछ कह रहे हैं वह बहुत अच्छा है। तो आप बातयें कि हम ने जो कुकर्म किये हैं उन के लिये कोई कफ़्फ़ारा (प्रायश्चित) है? उसी पर क़ुर्क़ान की आयत 68 और यह आयत उतरी। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4810)
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَأَنِيبُوٓاْ إِلَىٰ رَبِّكُمۡ وَأَسۡلِمُواْ لَهُۥ مِن قَبۡلِ أَن يَأۡتِيَكُمُ ٱلۡعَذَابُ ثُمَّ لَا تُنصَرُونَ
तथा झुक पड़ो अपने पालनहार की ओर और आज्ञाकारी हो जाओ उसके, इससे पूर्व कि तुमपर यातना आ जाये, फिर तुम्हारी सहायता न की जाये।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَٱتَّبِعُوٓاْ أَحۡسَنَ مَآ أُنزِلَ إِلَيۡكُم مِّن رَّبِّكُم مِّن قَبۡلِ أَن يَأۡتِيَكُمُ ٱلۡعَذَابُ بَغۡتَةٗ وَأَنتُمۡ لَا تَشۡعُرُونَ
तथा पालन करो उस सर्वोत्तम (क़र्आन) का, जो अवतरित किया गया है तुम्हारी ओर तुम्हारे पालनहार की ओर से, इससे पूर्व कि आ पड़े तुमपर यातना और तुम्हें ज्ञान न हो।
আরবি তাফসীরসমূহ:
أَن تَقُولَ نَفۡسٞ يَٰحَسۡرَتَىٰ عَلَىٰ مَا فَرَّطتُ فِي جَنۢبِ ٱللَّهِ وَإِن كُنتُ لَمِنَ ٱلسَّـٰخِرِينَ
(ऐसा न हो कि) कोई व्यक्ति कहे कि हाय संताप! इस बात पर कि मैं आलस्य किया अल्लाह के पक्ष में तथा मैं उपहास करने वालों में रह गया।
আরবি তাফসীরসমূহ:

أَوۡ تَقُولَ لَوۡ أَنَّ ٱللَّهَ هَدَىٰنِي لَكُنتُ مِنَ ٱلۡمُتَّقِينَ
अथवा कहे कि यदि अल्लाह मुझे सुपथ दिखाता, तो मैं डरने वालों में से हो जाता।
আরবি তাফসীরসমূহ:
أَوۡ تَقُولَ حِينَ تَرَى ٱلۡعَذَابَ لَوۡ أَنَّ لِي كَرَّةٗ فَأَكُونَ مِنَ ٱلۡمُحۡسِنِينَ
अथवा कहे जब देख ले यातना को कि यदि मुझे (संसार में) फिरकर जाने का अवसर हो जाये, तो मैं अवश्य सदाचारियों में से हो जाऊँगा।
আরবি তাফসীরসমূহ:
بَلَىٰ قَدۡ جَآءَتۡكَ ءَايَٰتِي فَكَذَّبۡتَ بِهَا وَٱسۡتَكۡبَرۡتَ وَكُنتَ مِنَ ٱلۡكَٰفِرِينَ
हाँ, आईं तुम्हारे पास मेरी निशानियाँ, तो तुमने उन्हें झुठला दिया और अभिमान किया तथा तुम थे ही काफ़िरों में से।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَيَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ تَرَى ٱلَّذِينَ كَذَبُواْ عَلَى ٱللَّهِ وُجُوهُهُم مُّسۡوَدَّةٌۚ أَلَيۡسَ فِي جَهَنَّمَ مَثۡوٗى لِّلۡمُتَكَبِّرِينَ
और प्रलय के दिन आप उन्हें देखेंगे, जिन्होंने अल्लाह पर झूठ बोले कि उनके मुख काले होंगे। तो क्या नरक में नहीं है अभिमानियों का स्थान?
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَيُنَجِّي ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوۡاْ بِمَفَازَتِهِمۡ لَا يَمَسُّهُمُ ٱلسُّوٓءُ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ
तथा बचा लेगा अल्लाह जो आज्ञाकारी रहे, उन्हें, उनकी सफलता के साथ। नहीं लगेगा उन्हें कोई दुःख और न वे उदासीन होंगे।
আরবি তাফসীরসমূহ:
ٱللَّهُ خَٰلِقُ كُلِّ شَيۡءٖۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ وَكِيلٞ
अल्लाह ही प्रत्येक वस्तु का पैदा करने वाला तथा वही प्रत्येक वस्तु का रक्षक है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
لَّهُۥ مَقَالِيدُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۗ وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ أُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ
उसी के अधिकार में हैं आकाशों तथा धरती की कुंजियाँ[1] तथा जिन्होंने नकार दिया अल्लाह की आयतों को, वही क्षति में हैं।
1. अर्थात सब का विधाता तथा स्वामी वही है। वही सब की व्यवस्था करता है। और सब उसी के अधीन तथा अधिकार में हैं।
আরবি তাফসীরসমূহ:
قُلۡ أَفَغَيۡرَ ٱللَّهِ تَأۡمُرُوٓنِّيٓ أَعۡبُدُ أَيُّهَا ٱلۡجَٰهِلُونَ
आप कह दें: तो क्या अल्लाह से अन्य की तुम मुझे इबादत (वंदना) करने का आदेश देते हो, हे अज्ञानो?
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَلَقَدۡ أُوحِيَ إِلَيۡكَ وَإِلَى ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِكَ لَئِنۡ أَشۡرَكۡتَ لَيَحۡبَطَنَّ عَمَلُكَ وَلَتَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡخَٰسِرِينَ
तथा वह़्यी की गई है आपकी ओर तथा उन (नबियों) की ओर, जो आपसे पूर्व (हुए) कि यदि आपने शिर्क किया, तो अवश्य व्यर्थ हो जायेगा आपका कर्म तथा आप हो जायेंगे[1] क्षतिग्रस्तों में से।
1. इस आयत का भावार्थ यह है कि यदि मान लिया जाये कि आप के जीवन का अन्त शिर्क पर हुआ, और क्षमा याचना नहीं की तो आप के भी कर्म नष्ट हो जायेंगे। ह़ालाँकि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और सभी नबी शिर्क से पाक थे। इस लिये कि उन का संदेश ही एकेश्वरवाद और शिर्क का खण्डन है। फिर भी इस में संबोधित नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को किया गया है। और यह साधारण नियम बताया गया कि शिर्क के साथ अल्लाह के हाँ कोई कर्म स्वीकार्य नहीं। तथा ऐसे सभी कर्म निष्फल होंगे जो एकेश्वरवाद की आस्था पर आधारित न हों। चाहे वह नबी हो या उस का अनुयायी हो।
আরবি তাফসীরসমূহ:
بَلِ ٱللَّهَ فَٱعۡبُدۡ وَكُن مِّنَ ٱلشَّـٰكِرِينَ
बल्कि आप अल्लाह ही की इबादत (वंदना) करें तथा कृज्ञयों में रहें।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَمَا قَدَرُواْ ٱللَّهَ حَقَّ قَدۡرِهِۦ وَٱلۡأَرۡضُ جَمِيعٗا قَبۡضَتُهُۥ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ وَٱلسَّمَٰوَٰتُ مَطۡوِيَّـٰتُۢ بِيَمِينِهِۦۚ سُبۡحَٰنَهُۥ وَتَعَٰلَىٰ عَمَّا يُشۡرِكُونَ
तथा उन्होंने अल्लाह का सम्मान नहीं किया, जैसे उसका सम्मान करना चाहिये था और धरती पूरी उसकी एक मुट्ठी में होगी, प्रलय के दिन तथा आकाश लपेटे हुए होंगे उसके हाथ[1] में। वह पवित्र तथा उच्च है उस शिर्क से, जो वे कर रहे हैं।
1. ह़दीस में आता है कि एक यहूदी विद्वान नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया और कहाः हम अल्लाह के विषय में (अपनी धर्म पुस्तकों में) यह पाते हैं कि प्रलय के दिन आकाशों को एक उंगली, तथा भूमि को एक उंगली पर और पेड़ों को एक उंगली, जल तथा तरी को एक उंगली पर और समस्त उत्पत्ति को एक उंगली पर रख लेगा, तथा कहेगाः "मैं ही राजा हूँ।" यह सुन कर आप हँस पड़े। और इसी आयत को पढ़ा। (सह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीसः 4812, 6519, 7382, 7413)
আরবি তাফসীরসমূহ:

وَنُفِخَ فِي ٱلصُّورِ فَصَعِقَ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَن فِي ٱلۡأَرۡضِ إِلَّا مَن شَآءَ ٱللَّهُۖ ثُمَّ نُفِخَ فِيهِ أُخۡرَىٰ فَإِذَا هُمۡ قِيَامٞ يَنظُرُونَ
तथा सूर (नरसिंधघा) फूँका[1] जायेगा, तो निश्चेत होकर गिर जायेंगे, जो आकाशों तथा धरती में हैं। परन्तु जिसे अल्लाह चाहे, फिर उसे पुनः फूँका जायेगा, तो सहसा सब खड़े देख रहे होंगे।
1. नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहाः दूसरी फूँक के पश्चात् सब से पहले मैं सिर उठाऊँगा। तो मूसा अर्श पकड़े हुये खड़े होंगे। मूझे ज्ञान नहीं कि वह ऐसे ही रह गये थे, या फूँकने के पश्चात् मुझ से पहले उठ चुके होंगे। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4813) दूसरी ह़दीस में है कि दोनों फूकों के बीच चालीस की अवधि होगी। और मनुष्य की दुमची की हड्डी के सिवा सब सड़ जायेगा। और उसी से उस को फिर बनाया जायेगा। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4814)
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَأَشۡرَقَتِ ٱلۡأَرۡضُ بِنُورِ رَبِّهَا وَوُضِعَ ٱلۡكِتَٰبُ وَجِاْيٓءَ بِٱلنَّبِيِّـۧنَ وَٱلشُّهَدَآءِ وَقُضِيَ بَيۡنَهُم بِٱلۡحَقِّ وَهُمۡ لَا يُظۡلَمُونَ
तथा जगमगाने लगेगी धरती, अपने पालनहार की ज्योति से और प्रस्तुत किये जायेंगे कर्म लेख तथा लाया जायेगा नबियों और साक्षियों को तथा निर्णय किया जायेगा उनके बीच सत्य (न्याय) के साथ और उनपर अत्याचार नहीं किया जायेगा।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَوُفِّيَتۡ كُلُّ نَفۡسٖ مَّا عَمِلَتۡ وَهُوَ أَعۡلَمُ بِمَا يَفۡعَلُونَ
तथा पूरा-पूरा दिया जायेगा प्रत्येक जीव को, उसका कर्मफल तथा वह भली-भाँति जानने वाला है उसे, जो वे कर रहे हैं।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَسِيقَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ إِلَىٰ جَهَنَّمَ زُمَرًاۖ حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءُوهَا فُتِحَتۡ أَبۡوَٰبُهَا وَقَالَ لَهُمۡ خَزَنَتُهَآ أَلَمۡ يَأۡتِكُمۡ رُسُلٞ مِّنكُمۡ يَتۡلُونَ عَلَيۡكُمۡ ءَايَٰتِ رَبِّكُمۡ وَيُنذِرُونَكُمۡ لِقَآءَ يَوۡمِكُمۡ هَٰذَاۚ قَالُواْ بَلَىٰ وَلَٰكِنۡ حَقَّتۡ كَلِمَةُ ٱلۡعَذَابِ عَلَى ٱلۡكَٰفِرِينَ
तथा हाँके जायेंगे, जो काफ़िर हो गये नरक की ओर, झुण्ड बनाकर। यहाँतक कि जब वे उसके पास आयेंगे, तो खोल दिये जायेंगे उसके द्वार तथा उनसे कहेंगे उसके रक्षक (फ़रिश्तेः) क्या नहीं आये तुम्हारे पास रसूल तुममें से, जो तुम्हें सुनाते, तुम्हारे पालनहार की आयतें तथा सचेत करते तुम्हें, इस दिन का सामना करने से? वे कहेंगेः क्यों नहीं? परन्तु, सिध्द हो गया यातना का शब्द, काफ़िरों पर।
আরবি তাফসীরসমূহ:
قِيلَ ٱدۡخُلُوٓاْ أَبۡوَٰبَ جَهَنَّمَ خَٰلِدِينَ فِيهَاۖ فَبِئۡسَ مَثۡوَى ٱلۡمُتَكَبِّرِينَ
कहा जायेगा कि प्रवेश कर जाओ नरक के द्वारों में, सदावासी होकर उसमें। तो बुरा है घमंडियों का निवास स्थान।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَسِيقَ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوۡاْ رَبَّهُمۡ إِلَى ٱلۡجَنَّةِ زُمَرًاۖ حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءُوهَا وَفُتِحَتۡ أَبۡوَٰبُهَا وَقَالَ لَهُمۡ خَزَنَتُهَا سَلَٰمٌ عَلَيۡكُمۡ طِبۡتُمۡ فَٱدۡخُلُوهَا خَٰلِدِينَ
तथा भेज दिये जायेंगे, जो लोग डरते रहे अपने पालनहार से, स्वर्ग की ओर झुण्ड बनाकर। यहाँतक कि जब वे आ जायेंगे उसके पास तथा खोल दिये जायेंगे उसके द्वार और कहेंगे उनसे उसके रक्षकः सलाम है तुमपर, तुम प्रसन्न रहो। तुम प्रवेश कर जाओ उसमें, सदावासी होकर।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَقَالُواْ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي صَدَقَنَا وَعۡدَهُۥ وَأَوۡرَثَنَا ٱلۡأَرۡضَ نَتَبَوَّأُ مِنَ ٱلۡجَنَّةِ حَيۡثُ نَشَآءُۖ فَنِعۡمَ أَجۡرُ ٱلۡعَٰمِلِينَ
तथा वे कहेंगेः सब प्रशंसा अल्लाह के लिए हैं, जिसने सच कर दिखाया हमसे अपना वचन तथा हमें उत्तराधिकारी बना दिया इस धरती का, हम रहें स्वर्ग में, जहाँ चाहें। क्या ही अच्छा है कार्यकर्ताओं[1] का प्रतिफल।
1. अर्थात एकेश्वरवादी सदाचारियों का।
আরবি তাফসীরসমূহ:

وَتَرَى ٱلۡمَلَـٰٓئِكَةَ حَآفِّينَ مِنۡ حَوۡلِ ٱلۡعَرۡشِ يُسَبِّحُونَ بِحَمۡدِ رَبِّهِمۡۚ وَقُضِيَ بَيۡنَهُم بِٱلۡحَقِّۚ وَقِيلَ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ
तथा आप देखेंगे फ़रिश्तों को घेरे हुए अर्श (सिंहासन) के चतुर्दिक, वे पवित्रता गान कर रहे होंगे अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ, निर्णय कर दिया जायेगा लोगों के बीच सत्य के साथ तथा कह दिया जायेगा कि सब प्रशंसा अल्लाह, सर्वलोक के पालनहार के लिए है।[1]
1. अर्थात जब ईमान वाले स्वर्ग में और मुश्रिक नरक में चले जायेंगे तो उस समय का चित्र यह होगा कि अल्लाह के अर्श को फ़रिश्ते हर ओर से घेरे हुये उस की पवित्रता तथा प्रशंसा का गान कर रहे होंगे।
আরবি তাফসীরসমূহ:

 
অর্থসমূহের অনুবাদ সূরা: সূরা আয-যুমার
সূরাসমূহের সূচী পৃষ্ঠার নাম্বার
 
কুরআনুল কারীমের অর্থসমূহের অনুবাদ - হিন্দি অনুবাদ - অনুবাদসমূহের সূচী

হিন্দি ভাষায় কুরআনুল কারীমের অর্থসমূহের অনুবাদ। অনুবাদ করেছেন মাওলানা আযিযুল হক আল-উমরি। প্রকাশ করেছে বাদশাহ ফাহাদ মুসহাফ শরীফ মুদ্রণ কমপ্লেক্স। প্রকাশকাল ১৪৩৩হি.

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