કુરઆન મજીદના શબ્દોનું ભાષાંતર - الترجمة الهندية للمختصر في تفسير القرآن الكريم * - ભાષાંતરોની અનુક્રમણિકા


શબ્દોનું ભાષાંતર આયત: (166) સૂરહ: અલ્ અઅરાફ
فَلَمَّا عَتَوْا عَنْ مَّا نُهُوْا عَنْهُ قُلْنَا لَهُمْ كُوْنُوْا قِرَدَةً خٰسِىِٕیْنَ ۟
फिर जब वे अभिमान एवं हठ के कारण अल्लाह की अवज्ञा करने में सीमा पार कर गए और नसीहत हासिल नहीं की, तो हमने उनसे कहा : ऐ अवज्ञाकारियो! तुम अपमानित बंदर हो जाओ। चुनाँचे वे हमारी मंशा के अनुसार बंदर हो गए। क्योंकि हमारा मामला यह है कि हम जब कसी चीज़ का इरादा करते हैं, तो उससे कहते हैं कि "हो जा" तो वह हो जाती है।
અરબી તફસીરો:
આયતોના ફાયદાઓ માંથી:
• إذا نزل عذاب الله على قوم بسبب ذنوبهم ينجو منه من كانوا يأمرون بالمعروف وينهون عن المنكر فيهم.
• जब किसी जाति पर, उसके गुनाहों के कारण अल्लाह की यातना आती है, तो उससे उनमें से वे लोग बच जाते हैं, जो उन्हें अच्छी बातों का आदेश देते और बुरी बातों से रोकते थे।

• يجب الحذر من عذاب الله؛ فإنه قد يكون رهيبًا في الدنيا، كما فعل سبحانه بطائفة من بني إسرائيل حين مَسَخَهم قردة بسبب تمردهم.
• अल्लाह की यातना से सावधान रहना चाहिए। क्योंकि वह दुनिया में (भी) भयानक हो सकती है। जैसा कि अल्लाह ने बनी इसराईल के एक संप्रदाय के साथ किया था जब उनकी सरकशी के कारण उनकी शक्ल बिगाड़कर बंदर बना दिया था।

• نعيم الدنيا مهما بدا أنه عظيم فإنه قليل تافه بجانب نعيم الآخرة الدائم.
• अल्लाह ने बनी इसराईल पर अपमान व दरिद्रता लिख दी है और बता दिया है कि वह उनपर प्रत्येक युग में ऐसे लोगों को भेजता रहेगा, जो उनके अत्याचार और विमुखता के कारण उन्हें यातना का मज़ा चखाते रहेंगे।

• أفضل أعمال العبد بعد الإيمان إقامة الصلاة؛ لأنها عمود الأمر.
• दुनिया की नेमत चाहे जितनी बड़ी प्रतीत हो, लेकिन आख़िरत की स्थायी नेमत के मुक़ाबले में वह अल्प और तुच्छ है।

• كتب الله على بني إسرائيل الذلة والمسكنة، وتأذن بأن يبعث عليهم كل مدة من يذيقهم العذاب بسبب ظلمهم وانحرافهم.
• ईमान के बाद बंदे का सबसे अच्छा कर्म नमाज़ क़ायम करना है, क्योंकि वह दीन का स्तंभ है।

 
શબ્દોનું ભાષાંતર આયત: (166) સૂરહ: અલ્ અઅરાફ
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الترجمة الهندية للمختصر في تفسير القرآن الكريم، صادر عن مركز تفسير للدراسات القرآنية.

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