কুরআনুল কারীমের অর্থসমূহের অনুবাদ - হিন্দি ভাষায় অনুবাদ * - অনুবাদসমূহের সূচী

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অর্থসমূহের অনুবাদ সূরা: সূরা আল-ফোরকান
আয়াত:
 

सूरा अल्-फ़ुर्क़ान

تَبَارَكَ ٱلَّذِي نَزَّلَ ٱلۡفُرۡقَانَ عَلَىٰ عَبۡدِهِۦ لِيَكُونَ لِلۡعَٰلَمِينَ نَذِيرًا
शुभ है वह (अल्लाह), जिसने फ़ुर्क़ान[1] अवतरित किया अपने भक्त[2] पर, ताकि पूरे संसार-वासियों को सावधान करने वाला हो।
1. फ़ुर्क़ान का अर्थ वह पुस्तक है जिस के द्वारा सच्च और झूठ में विवेक किया जाये और इस से अभिप्राय क़ुर्आन है। 2. भक्त से अभिप्राय मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं, जो पूरे मानव संसार के लिये नबी बना कर भेजे गये हैं। ह़दीस में है कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया कि मुझ से पहले नबी अपनी विशेष जाति के लिये भेजे जाते थे, और मुझे सर्व साधारण लोगों की ओर नबी बना कर भेजा गया है। (सह़ीह़ बुख़ारीः 335, सह़ीह़ मुस्लिमः521)
আরবি তাফসীরসমূহ:
ٱلَّذِي لَهُۥ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَلَمۡ يَتَّخِذۡ وَلَدٗا وَلَمۡ يَكُن لَّهُۥ شَرِيكٞ فِي ٱلۡمُلۡكِ وَخَلَقَ كُلَّ شَيۡءٖ فَقَدَّرَهُۥ تَقۡدِيرٗا
जिसके लिए आकाशों तथा धरती का राज्य है तथा उसने अपने लिए कोई संतान नहीं बनायी और न उसका कोई साझी है राज्य में तथा उसने प्रत्येक वस्तु की उत्पत्ति की, फिर उसे एक निर्धारित रूप दिया।
আরবি তাফসীরসমূহ:

وَٱتَّخَذُواْ مِن دُونِهِۦٓ ءَالِهَةٗ لَّا يَخۡلُقُونَ شَيۡـٔٗا وَهُمۡ يُخۡلَقُونَ وَلَا يَمۡلِكُونَ لِأَنفُسِهِمۡ ضَرّٗا وَلَا نَفۡعٗا وَلَا يَمۡلِكُونَ مَوۡتٗا وَلَا حَيَوٰةٗ وَلَا نُشُورٗا
और उन्होंने उसके अतिरिक्त अनेक पूज्य बना लिए हैं, जो किसी चीज़ की उत्पत्ति नहीं कर सकते और वे स्वयं उत्पन्न किये जाते हैं और न वे अधिकार रखते हैं अपने लिए किसी हानि का, न अधिकार रखते हैं किसी लाभ का, न अधिकार रखते हैं मरण और न जीवन और न पुनः[1] जीवित करने का।
1. अर्थात प्रलय के पश्चात्।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّآ إِفۡكٌ ٱفۡتَرَىٰهُ وَأَعَانَهُۥ عَلَيۡهِ قَوۡمٌ ءَاخَرُونَۖ فَقَدۡ جَآءُو ظُلۡمٗا وَزُورٗا
तथा काफ़िरों ने कहाः ये[1] तो बस एक मनघड़त बात है, जिसे इस[2] ने स्वयं घड़ लिया है और इसपर अन्य लोगों ने उसकी सहायता की है। तो वास्तव में, वो काफ़िर बड़ा अत्याचार और झूठ बना लाये हैं।
1. अर्थात क़ुर्आन। 2. अर्थात मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَقَالُوٓاْ أَسَٰطِيرُ ٱلۡأَوَّلِينَ ٱكۡتَتَبَهَا فَهِيَ تُمۡلَىٰ عَلَيۡهِ بُكۡرَةٗ وَأَصِيلٗا
और कहा कि ये तो पूर्वजों की कल्पित कथायें हैं जिन्हें उसने स्वयं लिख लिया है और वह पढ़ी जाती हैं, उसके समक्ष प्रातः और संध्या।
আরবি তাফসীরসমূহ:
قُلۡ أَنزَلَهُ ٱلَّذِي يَعۡلَمُ ٱلسِّرَّ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ إِنَّهُۥ كَانَ غَفُورٗا رَّحِيمٗا
आप कह दें कि इसे उसने अवतरित किया है, जो आकाशों तथा धरती का भेद जानता है। वास्तव में, वह[1] अति क्षमाशील, दयावान् है।
1. इसी लिये क्षमा याचना का अवसर देता है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَقَالُواْ مَالِ هَٰذَا ٱلرَّسُولِ يَأۡكُلُ ٱلطَّعَامَ وَيَمۡشِي فِي ٱلۡأَسۡوَاقِ لَوۡلَآ أُنزِلَ إِلَيۡهِ مَلَكٞ فَيَكُونَ مَعَهُۥ نَذِيرًا
तथा उन्होंने कहाः ये कैसा रसूल है, जो भोजन करता है तथा बाज़ारों में चलता है? क्यों नहीं उतार दिया गया उसकी ओर कोई फ़रिश्ता, तो वह उसके साथ सावधान करने वाला होता?
আরবি তাফসীরসমূহ:
أَوۡ يُلۡقَىٰٓ إِلَيۡهِ كَنزٌ أَوۡ تَكُونُ لَهُۥ جَنَّةٞ يَأۡكُلُ مِنۡهَاۚ وَقَالَ ٱلظَّـٰلِمُونَ إِن تَتَّبِعُونَ إِلَّا رَجُلٗا مَّسۡحُورًا
अथवा उसकी ओर कोई कोष उतार दिया जाता अथवा उसका कोई बाग़ होता, जिसमें से वह खाता? तथा अत्याचारियों ने कहाः तुमतो बस एक जादू किये हुए व्यक्ति का अनुसरण कर रहे हो।
আরবি তাফসীরসমূহ:
ٱنظُرۡ كَيۡفَ ضَرَبُواْ لَكَ ٱلۡأَمۡثَٰلَ فَضَلُّواْ فَلَا يَسۡتَطِيعُونَ سَبِيلٗا
देखो! आपके संबन्ध में ये कैसी कैसी बातें कर रहे हैं? अतः, वे कुपथ हो गये हैं, वे सुपथ पा ही नहीं सकते।
আরবি তাফসীরসমূহ:
تَبَارَكَ ٱلَّذِيٓ إِن شَآءَ جَعَلَ لَكَ خَيۡرٗا مِّن ذَٰلِكَ جَنَّـٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ وَيَجۡعَل لَّكَ قُصُورَۢا
शुभकारी है वह (अल्लाह), जो यदि चाहे, तो बना दे आपके लिए इससे[1] उत्तम बहुत-से बाग़, जिनमें नहरें प्रवाहित हों और बना दे आपके लिए बहुत-से भवन।
1. अर्थात उन के विचार से उत्तम।
আরবি তাফসীরসমূহ:
بَلۡ كَذَّبُواْ بِٱلسَّاعَةِۖ وَأَعۡتَدۡنَا لِمَن كَذَّبَ بِٱلسَّاعَةِ سَعِيرًا
वास्तविक बात ये है कि उन्होंने झुठला दिया है क़्यामत (प्रलय) को और हमने तैयार किया है, उसके लिए, जो प्रलय को झुठलाये, भड़कती हुई अग्नि।
আরবি তাফসীরসমূহ:

إِذَا رَأَتۡهُم مِّن مَّكَانِۭ بَعِيدٖ سَمِعُواْ لَهَا تَغَيُّظٗا وَزَفِيرٗا
जब वह ( नरक) उन्हें दूर स्थान से देखेगी, तो (प्रलय के झुठलाने वाले) सुन लेंगे उसके क्रोध तथा आवेग की ध्वनि को।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَإِذَآ أُلۡقُواْ مِنۡهَا مَكَانٗا ضَيِّقٗا مُّقَرَّنِينَ دَعَوۡاْ هُنَالِكَ ثُبُورٗا
और जब वह फेंक दिये जायेंगे उसके किसी संकीर्ण स्थान में बंधे हुए, (तो) वहाँ विनाश को पुकारेंगे।
আরবি তাফসীরসমূহ:
لَّا تَدۡعُواْ ٱلۡيَوۡمَ ثُبُورٗا وَٰحِدٗا وَٱدۡعُواْ ثُبُورٗا كَثِيرٗا
(उनसे कहा जायेगाः) आज एक विनाश को मत पुकारो, बहुत-से विनाशों को पुकारो[1]।
1. अर्थात आज तुम्हारे लिये विनाश ही विनाश है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
قُلۡ أَذَٰلِكَ خَيۡرٌ أَمۡ جَنَّةُ ٱلۡخُلۡدِ ٱلَّتِي وُعِدَ ٱلۡمُتَّقُونَۚ كَانَتۡ لَهُمۡ جَزَآءٗ وَمَصِيرٗا
(हे नबी!) आप उनसे कहिए कि क्या ये अच्छा है या स्थायी स्वर्ग, जिसका वचन आज्ञाकारियों को दिया गया है, जो उनका प्रतिफल तथा आवास है?
আরবি তাফসীরসমূহ:
لَّهُمۡ فِيهَا مَا يَشَآءُونَ خَٰلِدِينَۚ كَانَ عَلَىٰ رَبِّكَ وَعۡدٗا مَّسۡـُٔولٗا
उन्हीं को उसमें जो इच्छा वे करेंगे, मिलेगा। वे सदावासी होंगे, आपके पालनहार पर (ये) वचन (पूरा करना) अनिवार्य है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَيَوۡمَ يَحۡشُرُهُمۡ وَمَا يَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ فَيَقُولُ ءَأَنتُمۡ أَضۡلَلۡتُمۡ عِبَادِي هَـٰٓؤُلَآءِ أَمۡ هُمۡ ضَلُّواْ ٱلسَّبِيلَ
तथा जिस दिन वह एकत्र करेगा उन्हें और जिसकी वे इबादत (वंदना) करते थे अल्लाह के सिवाय, तो वह (अल्लाह) कहेगाः क्या तुमही ने मेरे इन भक्तों को कुपथ किया है अथवा वे स्वयं कुपथ हो गये?
আরবি তাফসীরসমূহ:
قَالُواْ سُبۡحَٰنَكَ مَا كَانَ يَنۢبَغِي لَنَآ أَن نَّتَّخِذَ مِن دُونِكَ مِنۡ أَوۡلِيَآءَ وَلَٰكِن مَّتَّعۡتَهُمۡ وَءَابَآءَهُمۡ حَتَّىٰ نَسُواْ ٱلذِّكۡرَ وَكَانُواْ قَوۡمَۢا بُورٗا
वे कहेंगेः तू पवित्र है! हमारे लिए ये योग्य नहीं था कि तेरे सिवा कोई संरक्षक[1] बनायें, परन्तु तूने सुखी बना दिया उनको तथा उनके पूर्वजों को, यहाँ तक कि वे शिक्षा को भूल गये और वे थे ही विनाश के योग्य।
1. अर्थात जब हम स्वयं दूसरे को अपना संरक्षक नहीं समझे, तो फिर अपने विषय में यह कैसे कह सकते हैं कि हमें अपना रक्षक बना लो?
আরবি তাফসীরসমূহ:
فَقَدۡ كَذَّبُوكُم بِمَا تَقُولُونَ فَمَا تَسۡتَطِيعُونَ صَرۡفٗا وَلَا نَصۡرٗاۚ وَمَن يَظۡلِم مِّنكُمۡ نُذِقۡهُ عَذَابٗا كَبِيرٗا
उन्हों[1] ने तो तुम्हें झुठला दिया तुम्हारी बातों में, तो तुम न यातना को फेर सकोगे और न अपनी सहायता कर सकोगे और जो भी अत्याचार[2] करेगा तुममें से, हम उसे घोर यातना चखायेंगे।
1. यह अल्लाह का कथन है, जिसे वह मिश्रणवादियों से कहेगा कि तुम्हारे पूज्यों ने स्वयं अपने पूज्य होने को नकार दिया। 2. अत्याचार से तात्पर्य शिर्क (मिश्रणवाद) है। (सूरह लुक़्मान, आयतः 13)
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَمَآ أَرۡسَلۡنَا قَبۡلَكَ مِنَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ إِلَّآ إِنَّهُمۡ لَيَأۡكُلُونَ ٱلطَّعَامَ وَيَمۡشُونَ فِي ٱلۡأَسۡوَاقِۗ وَجَعَلۡنَا بَعۡضَكُمۡ لِبَعۡضٖ فِتۡنَةً أَتَصۡبِرُونَۗ وَكَانَ رَبُّكَ بَصِيرٗا
और नहीं भेजा हमने आपसे पूर्व किसी रसूल को, परन्तु वे भोजन करते और बाज़ारों में (भी) चलते[1] फिरते थे तथा हमने बना दिया तुममें से एक को दूसरे के लिए परीक्षा का साधन, तो क्या तुम धैर्य रखोगे? तथा आपका पालनहार सब कुछ देखने[2] वाला है।
1. अर्थात वे मानव पुरुष थे। 2. आयत का भावार्थ यह है कि अल्लाह चाहता तो पूरा संसार रसूलों का साथ देता। परन्तु वह लोगों की रसूलों द्वारा तथा रसूलों की लोगों द्वारा परीक्षा लेना चाहता है कि लोग ईमान लाते हैं या नहीं और रसूल धैर्य रखते हैं या नहीं।
আরবি তাফসীরসমূহ:

۞وَقَالَ ٱلَّذِينَ لَا يَرۡجُونَ لِقَآءَنَا لَوۡلَآ أُنزِلَ عَلَيۡنَا ٱلۡمَلَـٰٓئِكَةُ أَوۡ نَرَىٰ رَبَّنَاۗ لَقَدِ ٱسۡتَكۡبَرُواْ فِيٓ أَنفُسِهِمۡ وَعَتَوۡ عُتُوّٗا كَبِيرٗا
तथा उन्होंने कहा जो हमसे मिलने की आशा नहीं रखतेः हमपर फ़रिश्ते क्यों नहीं उतारे गये या हम अपने पालनहार को देख लेते? उन्होंने अपने में बड़ा अभिमान कर लिया है तथा बड़ी अवज्ञा[1] की है।
1. अर्थात ईमान लाने के लिये अपने समक्ष फ़रिश्तों के उतरने तथा अल्लाह को देखने की माँग कर के।
আরবি তাফসীরসমূহ:
يَوۡمَ يَرَوۡنَ ٱلۡمَلَـٰٓئِكَةَ لَا بُشۡرَىٰ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُجۡرِمِينَ وَيَقُولُونَ حِجۡرٗا مَّحۡجُورٗا
जिस दिन[1] वे फ़रिश्तों को देख लेंगे, उस दिन कोई शुभ सूचना नहीं होगी अपराधियों के लिए तथा वे कहेंगेः[2] वंचित, वंचित है!!
1. अर्थात मरने के समय। ( देखियेः अन्फ़ालः13) अथवा प्रलय के दिन। 2. अर्थात वह कहेंगे कि हमारे लिये सफलता तथा स्वर्ग निषेधित है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَقَدِمۡنَآ إِلَىٰ مَا عَمِلُواْ مِنۡ عَمَلٖ فَجَعَلۡنَٰهُ هَبَآءٗ مَّنثُورًا
और उनके कर्मों[1] को हम लेकर धूल के समान उड़ा देंगे।
1. अर्थात ईमान न होने के कारण उन के पुण्य के कार्य व्यर्थ कर दिये जायेंगे।
আরবি তাফসীরসমূহ:
أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَنَّةِ يَوۡمَئِذٍ خَيۡرٞ مُّسۡتَقَرّٗا وَأَحۡسَنُ مَقِيلٗا
स्वर्ग के अधिकारी, उस दिन अच्छे स्थान तथा सुखद शयनकक्ष में होंगे।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَيَوۡمَ تَشَقَّقُ ٱلسَّمَآءُ بِٱلۡغَمَٰمِ وَنُزِّلَ ٱلۡمَلَـٰٓئِكَةُ تَنزِيلًا
जिस दिन, चिर जायेगा आकाश बादल के साथ[1] और फ़रिश्ते निरन्तर उतार दिये जायेंगे।
1. अर्थात आकाश चीरता हुआ बादल छा जायेगा और अल्लाह अपने फ़रिश्तों के साथ लोगों का ह़िसाब करने के लिये ह़श्र के मैदान में आ जायेगा। (देखियेः सूरह बक़रह, आयतः210)
আরবি তাফসীরসমূহ:
ٱلۡمُلۡكُ يَوۡمَئِذٍ ٱلۡحَقُّ لِلرَّحۡمَٰنِۚ وَكَانَ يَوۡمًا عَلَى ٱلۡكَٰفِرِينَ عَسِيرٗا
उस दिन, वास्तविक राज्य अति दयावान का होगा और काफ़िरों पर एक कड़ा दिन होगा।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَيَوۡمَ يَعَضُّ ٱلظَّالِمُ عَلَىٰ يَدَيۡهِ يَقُولُ يَٰلَيۡتَنِي ٱتَّخَذۡتُ مَعَ ٱلرَّسُولِ سَبِيلٗا
उस दिन, अत्याचारी अपने दोनों हाथ चबायेगा, वह कहेगाः क्या ही अच्छा होता कि मैंने रसूल का साथ दिया होता।
আরবি তাফসীরসমূহ:
يَٰوَيۡلَتَىٰ لَيۡتَنِي لَمۡ أَتَّخِذۡ فُلَانًا خَلِيلٗا
हाय मेरा दुर्भाग्य! काश मैंने अमुक को मित्र न बनाया होता।
আরবি তাফসীরসমূহ:
لَّقَدۡ أَضَلَّنِي عَنِ ٱلذِّكۡرِ بَعۡدَ إِذۡ جَآءَنِيۗ وَكَانَ ٱلشَّيۡطَٰنُ لِلۡإِنسَٰنِ خَذُولٗا
उसने मुझे कुपथ कर दिया शिक्षा (क़ुर्आन) से, इसके पश्चात् कि मेरे पास आयी और शैतान मनुष्य को (समय पर) धोखा देने वाला है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَقَالَ ٱلرَّسُولُ يَٰرَبِّ إِنَّ قَوۡمِي ٱتَّخَذُواْ هَٰذَا ٱلۡقُرۡءَانَ مَهۡجُورٗا
तथा रसूल[1] कहेगाः हे मेरे पालनहार! मेरी जाति ने इस क़ुर्आन को त्याग[2] दिया।
1. अर्थात मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम। (इब्ने कसीर) 2. अर्थात इसे मिश्रण्वादियों ने न ही सुना और न माना।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَكَذَٰلِكَ جَعَلۡنَا لِكُلِّ نَبِيٍّ عَدُوّٗا مِّنَ ٱلۡمُجۡرِمِينَۗ وَكَفَىٰ بِرَبِّكَ هَادِيٗا وَنَصِيرٗا
और इसी प्रकार, हमने बना दिया प्रत्येक का शत्रु, कुछ अपराधियों को और आपका पालनहार मार्गदर्शन देने तथा सहायता करने को बहुत है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَوۡلَا نُزِّلَ عَلَيۡهِ ٱلۡقُرۡءَانُ جُمۡلَةٗ وَٰحِدَةٗۚ كَذَٰلِكَ لِنُثَبِّتَ بِهِۦ فُؤَادَكَۖ وَرَتَّلۡنَٰهُ تَرۡتِيلٗا
तथा काफ़िरों ने कहाः क्यों नहीं उतार दिया गया आपपर क़ुर्आन पूरा एक ही बार[1]? इसी प्रकार, (इसलिए किया गया) ताकि हम आपके दिल को दृढ़ता प्रदान करें और हमने इसे क्रमशः प्रस्तुत किया है।
1. अर्थात तौरात तथा इंजील के समान एक ही बार क्यों नहीं उतारा गया, आगामी आयतों में उस का कारण बताया जा रहा है कि क़ुर्आन 23 वर्ष में क्रमशः आवश्यक्तानुसार क्यों उतारा गया।
আরবি তাফসীরসমূহ:

وَلَا يَأۡتُونَكَ بِمَثَلٍ إِلَّا جِئۡنَٰكَ بِٱلۡحَقِّ وَأَحۡسَنَ تَفۡسِيرًا
(और इसलिए भी कि) वे आपके पास कोई उदाहरण लायें, तो हम आपके पास सत्य ले आयें और उत्तम व्याख्या।
আরবি তাফসীরসমূহ:
ٱلَّذِينَ يُحۡشَرُونَ عَلَىٰ وُجُوهِهِمۡ إِلَىٰ جَهَنَّمَ أُوْلَـٰٓئِكَ شَرّٞ مَّكَانٗا وَأَضَلُّ سَبِيلٗا
जो अपने मुखों के बल, नरक की ओर एकत्र किये जायेंगे, उन्हीं का सबसे बुरा स्थान है तथा सबसे अधिक कुपथ हैं।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡكِتَٰبَ وَجَعَلۡنَا مَعَهُۥٓ أَخَاهُ هَٰرُونَ وَزِيرٗا
तथा हमने ही मूसा को पुस्तक (तौरात) प्रदान की और उसके साथ उसके भाई हारून को सहायक बनाया।
আরবি তাফসীরসমূহ:
فَقُلۡنَا ٱذۡهَبَآ إِلَى ٱلۡقَوۡمِ ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا فَدَمَّرۡنَٰهُمۡ تَدۡمِيرٗا
फिर हमने कहाः तुम दोनों उस जाति की ओर जाओ, जिसने हमारी आयतों (निशानियों) को झुठला दिया। अन्ततः, हमने उन्हें ध्वस्त-निरस्त कर दिया।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَقَوۡمَ نُوحٖ لَّمَّا كَذَّبُواْ ٱلرُّسُلَ أَغۡرَقۡنَٰهُمۡ وَجَعَلۡنَٰهُمۡ لِلنَّاسِ ءَايَةٗۖ وَأَعۡتَدۡنَا لِلظَّـٰلِمِينَ عَذَابًا أَلِيمٗا
और नूह़ की जाति ने जब रसूलों को झुठलाया, तो हमने उन्हें डुबो दिया और लोगों के लिए उन्हें शिक्षाप्रद प्रतीक बना दिया तथा हमने[1] तैयार की है, अत्याचारियों के लिए दुःखदायी यातना।
1. अर्थात प्रलोक में नरक की यातना।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَعَادٗا وَثَمُودَاْ وَأَصۡحَٰبَ ٱلرَّسِّ وَقُرُونَۢا بَيۡنَ ذَٰلِكَ كَثِيرٗا
तथा आद, समूद, कुवें वालों तथा बहुत-से समूदायों को, इसके बीच।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَكُلّٗا ضَرَبۡنَا لَهُ ٱلۡأَمۡثَٰلَۖ وَكُلّٗا تَبَّرۡنَا تَتۡبِيرٗا
और प्रत्येक को हमने उदाहरण दिये तथा प्रत्येक को पूर्णतः नाश कर[1] दिया।
1. सत्य को स्वीकार न करने पर।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَلَقَدۡ أَتَوۡاْ عَلَى ٱلۡقَرۡيَةِ ٱلَّتِيٓ أُمۡطِرَتۡ مَطَرَ ٱلسَّوۡءِۚ أَفَلَمۡ يَكُونُواْ يَرَوۡنَهَاۚ بَلۡ كَانُواْ لَا يَرۡجُونَ نُشُورٗا
तथा ये[1] लोग उस बस्ती[2] पर आये गये हैं, जिनपर बुरी वर्षा की गयी, तो क्या उन्होंने उसे नहीं देखा? बल्कि ये लोग पुनः जीवित होने का विश्वास नहीं रखते।
1. अर्थात मक्का के मुश्रिक। 2. अर्थात लूत जाति की बस्ती पर जिस का नाम "सदूम" था जिस पर पत्थरों की वर्षा हुई। फिर भी शिक्षा ग्रहण नहीं की।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَإِذَا رَأَوۡكَ إِن يَتَّخِذُونَكَ إِلَّا هُزُوًا أَهَٰذَا ٱلَّذِي بَعَثَ ٱللَّهُ رَسُولًا
और (हे नबी!) जब वे आपको देखते हैं, तो आपको उपहास बना लेते हैं (और कहते हैं) कि क्या यही है, जिसे अल्लाह ने रसूल बनाकर भेजा है?
আরবি তাফসীরসমূহ:
إِن كَادَ لَيُضِلُّنَا عَنۡ ءَالِهَتِنَا لَوۡلَآ أَن صَبَرۡنَا عَلَيۡهَاۚ وَسَوۡفَ يَعۡلَمُونَ حِينَ يَرَوۡنَ ٱلۡعَذَابَ مَنۡ أَضَلُّ سَبِيلًا
इसने तो हमें अपने पूज्यों से कुपथ कर दिया होता, यदि हम उनपर अडिग न रहते और वे शीघ्र ही जान लेंगे, जिस समय यातना देखेंगे कि कौन अधिक कुपथ है?
আরবি তাফসীরসমূহ:
أَرَءَيۡتَ مَنِ ٱتَّخَذَ إِلَٰهَهُۥ هَوَىٰهُ أَفَأَنتَ تَكُونُ عَلَيۡهِ وَكِيلًا
क्या आपने उसे देखा, जिसने अपना पूज्य अपनी अभिलाषा को बना लिया है, तो क्या आप उसके संरक्षक[1] हो सकते हैं?
1. अर्थात उसे सुपथ दर्शा सकते हैं?
আরবি তাফসীরসমূহ:

أَمۡ تَحۡسَبُ أَنَّ أَكۡثَرَهُمۡ يَسۡمَعُونَ أَوۡ يَعۡقِلُونَۚ إِنۡ هُمۡ إِلَّا كَٱلۡأَنۡعَٰمِ بَلۡ هُمۡ أَضَلُّ سَبِيلًا
क्या आप समझते हैं कि उनमें से अधिक्तर सुनते और समझते हैं? वे पशुओं के समान हैं, बल्कि उनसे भी अधिक कुपथ हैं।
1. अर्थात उसे सुपथ दर्शा सकते हैं?
আরবি তাফসীরসমূহ:
أَلَمۡ تَرَ إِلَىٰ رَبِّكَ كَيۡفَ مَدَّ ٱلظِّلَّ وَلَوۡ شَآءَ لَجَعَلَهُۥ سَاكِنٗا ثُمَّ جَعَلۡنَا ٱلشَّمۡسَ عَلَيۡهِ دَلِيلٗا
क्या आपने उसे नहीं देखा कि आपके पालनहार ने कैसे छाया को फैला दिया और यदि वह चाहता, तो उसे स्थिर[1] बना देता, फिर हमने सूर्य को उसपर प्रमाण[2] बना दिया।
1. अर्थात सदा छाया ही रहती। 2. अर्थात छाया सूर्य के साथ फैलती तथा सिमटती है। और यह अल्लाह के सामर्थ्य तथा उस के एक मात्र पूज्य होने का प्रामाण है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
ثُمَّ قَبَضۡنَٰهُ إِلَيۡنَا قَبۡضٗا يَسِيرٗا
फिर हम उस (छाया को) समेट लेते हैं, अपनी ओर धीरे-धीरे।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَهُوَ ٱلَّذِي جَعَلَ لَكُمُ ٱلَّيۡلَ لِبَاسٗا وَٱلنَّوۡمَ سُبَاتٗا وَجَعَلَ ٱلنَّهَارَ نُشُورٗا
और वही है, जिसने रात्रि को तुम्हारे लिए वस्त्र[1] बनाया तथा निद्रा को शान्ति तथा दिन को जागने का समय।
1. अर्थात रात्रि का अंधेरा वस्त्र के समान सब को छुपा लेता है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَهُوَ ٱلَّذِيٓ أَرۡسَلَ ٱلرِّيَٰحَ بُشۡرَۢا بَيۡنَ يَدَيۡ رَحۡمَتِهِۦۚ وَأَنزَلۡنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ طَهُورٗا
तथा वही है, जिसने वायुयों को भेजा शुभ सूचना बनाकर, अपनी दया (वर्षा) से पूर्व तथा हमने आकाश से स्वच्छ जल बरसाया।
আরবি তাফসীরসমূহ:
لِّنُحۡـِۧيَ بِهِۦ بَلۡدَةٗ مَّيۡتٗا وَنُسۡقِيَهُۥ مِمَّا خَلَقۡنَآ أَنۡعَٰمٗا وَأَنَاسِيَّ كَثِيرٗا
ताकि जीवित कर दें उसके द्वारा निर्जीव नगर को तथा उसे पिलायें उनमें से, जिन्हें हमने पैदा किया है; बहुत-से पशुओं तथा मानव को।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَلَقَدۡ صَرَّفۡنَٰهُ بَيۡنَهُمۡ لِيَذَّكَّرُواْ فَأَبَىٰٓ أَكۡثَرُ ٱلنَّاسِ إِلَّا كُفُورٗا
तथा हमने विभिन्न प्रकार से इसे वर्णन कर दिया है, ताकि वे शिक्षा ग्रहण करें। परन्तु, अधिक्तर लोगों ने अस्वीकार करते हुए कुफ़्र ग्रहण कर लिया।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَلَوۡ شِئۡنَا لَبَعَثۡنَا فِي كُلِّ قَرۡيَةٖ نَّذِيرٗا
और यदि हम चाहते, तो भेज देते प्रत्येक बस्ती में एक सचेत करने[1] वाला।
1. अर्थात रसूल। इस में यह संकेत है कि मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पूरे मनुष्य विश्व के लिये एक अन्तिम रसूल हैं।
আরবি তাফসীরসমূহ:
فَلَا تُطِعِ ٱلۡكَٰفِرِينَ وَجَٰهِدۡهُم بِهِۦ جِهَادٗا كَبِيرٗا
अतः, आप काफ़िरों की बात न मानें और इस (क़ुर्आन के) द्वारा उनसे भारी जिहाद (संघर्ष)[1] करें।
1. अर्थात क़ुर्आन के प्रचार-प्रसार के लिये भरपूर प्रयास करें।
আরবি তাফসীরসমূহ:
۞وَهُوَ ٱلَّذِي مَرَجَ ٱلۡبَحۡرَيۡنِ هَٰذَا عَذۡبٞ فُرَاتٞ وَهَٰذَا مِلۡحٌ أُجَاجٞ وَجَعَلَ بَيۡنَهُمَا بَرۡزَخٗا وَحِجۡرٗا مَّحۡجُورٗا
वही है, जिसने मिला दिया दो सागरों को, ये मीठा रुचिकार है और वो नमकीन खारा और उसने बना दिया दोनों के बीच एक पर्दा[1] एवं रोक।
1. ताकि एक का पानी और स्वाद दूसरे में न मिले।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَهُوَ ٱلَّذِي خَلَقَ مِنَ ٱلۡمَآءِ بَشَرٗا فَجَعَلَهُۥ نَسَبٗا وَصِهۡرٗاۗ وَكَانَ رَبُّكَ قَدِيرٗا
तथा वही है, जिसने पानी (वीर्य) से मनुष्य को उत्पन्न किया, फिर उसके वंश तथा ससुराल के संबंध बना दिये, आपका पालनहार अति सामर्थ्यवान है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَيَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَا يَنفَعُهُمۡ وَلَا يَضُرُّهُمۡۗ وَكَانَ ٱلۡكَافِرُ عَلَىٰ رَبِّهِۦ ظَهِيرٗا
और वे लोग इबादत (वंदना) करते हैं अल्लाह के सिवा उनकी, जो न उन्हें लाभ पहुँचा सकते हैं और न हानि पहुँचा सकते हैं और काफ़िर अपने पालनहार का विरोधी बन गया है।
আরবি তাফসীরসমূহ:

وَمَآ أَرۡسَلۡنَٰكَ إِلَّا مُبَشِّرٗا وَنَذِيرٗا
और हमने आपको बस शुभसूचना देने, सावधान करने वाला बनाकर भेजा है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
قُلۡ مَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍ إِلَّا مَن شَآءَ أَن يَتَّخِذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ سَبِيلٗا
आप कह दें: मैं इस[1] पर तुमसे कोई बदला नहीं माँगता, परन्तु ये कि जो चाहे अपने पालनहार की ओर मार्ग बना ले।
1. अर्थात क़ुर्आन पहुँचाने पर।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَتَوَكَّلۡ عَلَى ٱلۡحَيِّ ٱلَّذِي لَا يَمُوتُ وَسَبِّحۡ بِحَمۡدِهِۦۚ وَكَفَىٰ بِهِۦ بِذُنُوبِ عِبَادِهِۦ خَبِيرًا
तथा आप भरोसा कीजिए उस नित्य जीवी पर, जो मरेगा नहीं और उसकी पवित्रता का गान कीजिए उसकी प्रशंसा के साथ और आपका पालनहार प्रयाप्त है, अपने भक्तों के पापों से सूचित होने को।
আরবি তাফসীরসমূহ:
ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَمَا بَيۡنَهُمَا فِي سِتَّةِ أَيَّامٖ ثُمَّ ٱسۡتَوَىٰ عَلَى ٱلۡعَرۡشِۖ ٱلرَّحۡمَٰنُ فَسۡـَٔلۡ بِهِۦ خَبِيرٗا
जिसने उत्पन्न कर दिया आकाशों तथा धरती को और जो कुछ उनके बीच है, छः दिनों में, फिर (सिंहासन) पर स्थिर हो गया, अति दयावान्, उसकी महिमा किसी ज्ञानी से पूछो।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱسۡجُدُواْۤ لِلرَّحۡمَٰنِ قَالُواْ وَمَا ٱلرَّحۡمَٰنُ أَنَسۡجُدُ لِمَا تَأۡمُرُنَا وَزَادَهُمۡ نُفُورٗا۩
और जब, उनसे कहा जाता है कि रह़मान (अति दयावान्) को सज्दा करो, तो कहते हैं कि रह़मान क्या है? क्या हम (उसे) सज्दा करने लगें, जिसे आप आदेश दें? और (दरअसल) इस (आमंत्रण) ने उनको और अधिक भड़का दिया।
আরবি তাফসীরসমূহ:
تَبَارَكَ ٱلَّذِي جَعَلَ فِي ٱلسَّمَآءِ بُرُوجٗا وَجَعَلَ فِيهَا سِرَٰجٗا وَقَمَرٗا مُّنِيرٗا
शूभ है वह, जिसने आकाश में राशि चक्र बनाये तथा उसमें सूर्य और प्रकाशित चाँद बनाया।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَهُوَ ٱلَّذِي جَعَلَ ٱلَّيۡلَ وَٱلنَّهَارَ خِلۡفَةٗ لِّمَنۡ أَرَادَ أَن يَذَّكَّرَ أَوۡ أَرَادَ شُكُورٗا
वही है, जिसने रात्रि तथा दिन को, एक-दूसरे के पीछे आते-जाते बनाया, उसके लिए, जो शिक्षा ग्रहण करना चाहे या कृतज्ञ होना चाहे।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَعِبَادُ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلَّذِينَ يَمۡشُونَ عَلَى ٱلۡأَرۡضِ هَوۡنٗا وَإِذَا خَاطَبَهُمُ ٱلۡجَٰهِلُونَ قَالُواْ سَلَٰمٗا
और अति दयावान् के भक्त वो हैं, जो धरती पर नम्रता से चलते[1] हैं और जब अशिक्षित (अक्खड़) लोग उनसे बात करते हैं, तो सलाम करके अलग[2] हो जाते हैं।
1. अर्थात घमंड से अकड़ कर नहीं चलते। 2. अर्थात उन से उलझते नहीं।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَٱلَّذِينَ يَبِيتُونَ لِرَبِّهِمۡ سُجَّدٗا وَقِيَٰمٗا
और जो रात्रि व्यतीत करते हैं, अपने पालनहार के लिए सज्दा करते हुए तथा खड़े[1] होकर।
1. अर्थात अल्लाह की इबादत करते हुये।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَٱلَّذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا ٱصۡرِفۡ عَنَّا عَذَابَ جَهَنَّمَۖ إِنَّ عَذَابَهَا كَانَ غَرَامًا
तथा जो प्रार्थना करते हैं कि हे हमारे पालनहार! फेर दे हमसे नरक की यातना को, वास्तव में, उसकी यातना चिपक जाने वाली है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
إِنَّهَا سَآءَتۡ مُسۡتَقَرّٗا وَمُقَامٗا
वास्तव में, वह बुरा आवास और स्थान है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَٱلَّذِينَ إِذَآ أَنفَقُواْ لَمۡ يُسۡرِفُواْ وَلَمۡ يَقۡتُرُواْ وَكَانَ بَيۡنَ ذَٰلِكَ قَوَامٗا
तथा जो व्यय (खर्च) करते समय अपव्यय नहीं करते और न कृपण (कंजूसी) करते हैं और वह इसके बीच, संतुलित रहता है।
আরবি তাফসীরসমূহ:

وَٱلَّذِينَ لَا يَدۡعُونَ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَ وَلَا يَقۡتُلُونَ ٱلنَّفۡسَ ٱلَّتِي حَرَّمَ ٱللَّهُ إِلَّا بِٱلۡحَقِّ وَلَا يَزۡنُونَۚ وَمَن يَفۡعَلۡ ذَٰلِكَ يَلۡقَ أَثَامٗا
और जो नहीं पुकारते हैं, अल्लाह के साथ किसी दूसरे[1] पूज्य को और न वध करते हैं, उस प्राण को, जिसे अल्लाह ने वर्जित किया है, परन्तु उचित कारण से और न व्यभिचार करते हैं और जो ऐसा करेगा, वह पाप का सामना करेगा।
1. अब्दुल्लाह बिन मस्ऊद रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि मैं ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से प्रश्न किया कि कौन सा पाप सब से बड़ा है? फ़रमायाः यह कि तुम अल्लाह का साझी बनाओ जब कि उस ने तुम्हें पैदा किया है। मैं ने कहाः फिर कौन सा? फरमायाः अपनी संतान को इस भय से मार दो कि वह तुम्हारे साथ खायेगी। मैं ने कहाः फिर कौन सा? फरमायाः अपने पड़ोसी की पत्नी से व्यभिचार करना। यह आयत इसी पर उतरी। (देखियेः सह़ीह़ बुख़ारीः4761)
আরবি তাফসীরসমূহ:
يُضَٰعَفۡ لَهُ ٱلۡعَذَابُ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ وَيَخۡلُدۡ فِيهِۦ مُهَانًا
दुगनी की जायेगी उसके लिए यातना, प्रलय के दिन तथा सदा उसमें अपमानित[1] होकर रहेगा।
1. इब्ने अब्बास ने कहाः जब यह आयत उतरी तो मक्का वासियों ने कहाः हम ने अल्लाह का साझी बनाया है और अवैध जान भी मारी है तथा व्यभिचार भी किया है। तो अल्लाह ने यह आयत उतारी। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4765)
আরবি তাফসীরসমূহ:
إِلَّا مَن تَابَ وَءَامَنَ وَعَمِلَ عَمَلٗا صَٰلِحٗا فَأُوْلَـٰٓئِكَ يُبَدِّلُ ٱللَّهُ سَيِّـَٔاتِهِمۡ حَسَنَٰتٖۗ وَكَانَ ٱللَّهُ غَفُورٗا رَّحِيمٗا
उसके सिवा, जिसने क्षमा याचना कर ली और ईमान लाया तथा कर्म किया अच्छा कर्म, तो वही हैं, बदल देगा अल्लाह, जिनके पापों को पुण्य से तथा अल्लाह अति क्षमी, दयावान् है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَمَن تَابَ وَعَمِلَ صَٰلِحٗا فَإِنَّهُۥ يَتُوبُ إِلَى ٱللَّهِ مَتَابٗا
और जिसने क्षमा याचना करली और सदाचार किये, तो वास्तव में, वही अल्लाह की ओर झुक जाता है।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَٱلَّذِينَ لَا يَشۡهَدُونَ ٱلزُّورَ وَإِذَا مَرُّواْ بِٱللَّغۡوِ مَرُّواْ كِرَامٗا
तथा जो मिथ्या साक्ष्य नहीं देते और जब व्यर्थ के पास से गुज़रते हैं, तो सज्जन बनकर गुज़र जाते हैं।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَٱلَّذِينَ إِذَا ذُكِّرُواْ بِـَٔايَٰتِ رَبِّهِمۡ لَمۡ يَخِرُّواْ عَلَيۡهَا صُمّٗا وَعُمۡيَانٗا
और जब उन्हें शिक्षा दी जाये उनके पालनहार की आयतों द्वारा, उनपर नहीं गिरते अन्धे तथा बहरे हो[1] कर।
1. अर्थात आयतों में सोच विचार करते हैं।
আরবি তাফসীরসমূহ:
وَٱلَّذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا هَبۡ لَنَا مِنۡ أَزۡوَٰجِنَا وَذُرِّيَّـٰتِنَا قُرَّةَ أَعۡيُنٖ وَٱجۡعَلۡنَا لِلۡمُتَّقِينَ إِمَامًا
तथा जो प्रार्थना करते हैं कि हे हमारे पालनहार! हमें हमारी पत्नियों तथा संतानों से आँखों की ठंडक प्रदान कर और हमें आज्ञाकारियों का अग्रणी बना दे।
আরবি তাফসীরসমূহ:
أُوْلَـٰٓئِكَ يُجۡزَوۡنَ ٱلۡغُرۡفَةَ بِمَا صَبَرُواْ وَيُلَقَّوۡنَ فِيهَا تَحِيَّةٗ وَسَلَٰمًا
यही लोग, उच्च भवन अपने धैर्य के बदले में पायेंगे और स्वागत किये जायेंगे, उसमें आशीर्वाद तथा सलाम के साथ।
আরবি তাফসীরসমূহ:
خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ حَسُنَتۡ مُسۡتَقَرّٗا وَمُقَامٗا
वे उसमें सदावासी होंगे। वह अच्छा निवास तथा स्थान है!
আরবি তাফসীরসমূহ:
قُلۡ مَا يَعۡبَؤُاْ بِكُمۡ رَبِّي لَوۡلَا دُعَآؤُكُمۡۖ فَقَدۡ كَذَّبۡتُمۡ فَسَوۡفَ يَكُونُ لِزَامَۢا
(हे नबी!) आप कह दें कि यदि तुम्हारा, उसे पुकारना न[1] हो, तो मेरा पालनहार तुम्हारी क्या परवाह करेगा? तुमने तो झुठला दिया है, तो शीघ्र ही (उसका दण्ड) चिपक जाने वाला होगा।
1. अर्थात उस से प्रार्थना तथा उस की इबादत न करो।
আরবি তাফসীরসমূহ:

 
অর্থসমূহের অনুবাদ সূরা: সূরা আল-ফোরকান
সূরাসমূহের সূচী পৃষ্ঠার নাম্বার
 
কুরআনুল কারীমের অর্থসমূহের অনুবাদ - হিন্দি ভাষায় অনুবাদ - অনুবাদসমূহের সূচী

হিন্দি ভাষায় কুরআনুল কারীমের অর্থসমূহের অনুবাদ। অনুবাদ করেছেন আযীযুল হক আল-উমরী। প্রকাশ করেছে বাদশাহ ফাহাদ মুসহাফ শরীফ মুদ্রণ কমপ্লেক্স। প্রকাশকাল ১৪৩৩হি.।

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